इस शेल्टर होम में रहती हैं दो तरह की लड़कियां, एक के साथ होता है….

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट।

ये महिलाएं चाहे संगीता हों या रंजीता या फिर मामला चाहे हसीना का हो या मरियम का, इन सकबे के तार पटना के गायघाट स्थित इस सरकारी महिला रिमांड होम से जुड़े हैं। समाज कल्याण विभाग के तहत संचालित इस शेल्टर होम में तकरीबन तीन सौ महिलाएं रहती हैं। ये महिलाएं या तो किसी अपराध की दोषी होती हैं या बदनसीब या फिर दिव्यांग। इन्हें शेल्टर होम में पनाह देने का मकसद बेहतर जिन्दगी जीने का अवसर प्रदान करना होता है। लेकिन यहां ये उल्टे बेपनहा हो जाती हैं और एक नये चक्रव्यूह में फंस जाती हैं। उन्हें शारीरिक यातना पहुंचाई जाती है, यहां तक कि देह व्यापार के दलदल में भी धकेल दिया जाता है। ऐसी ही पांच महिलाओं का मामला इन दिनों काफी चर्चा में है। इनमें बांग्लादेश की दो महिलाओं का मामला भी शामिल है जिनका कुछ अता-पता नहीं है। पटना हाईकोर्ट जहां एक तरफ़ रिमांड होम मामले का संज्ञान ले चुका है और सरकार से जवाब तलब किया है, वहीं विभिन्न महिला संगठन पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए सड़क पर आंदोलन करने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। इस दौरान प्रेस कांफ्रेंस का सिलसिला भी जारी है। बिहार महिला समाज की निवेदिता झा कहती हैं कि बिहार सरकार ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड से कोई सबक नहीं लिया। ऐपवा की मीना तिवारी सोशल आॅडिट पर जोर देती हैं और तमाम महिला शेल्टर होम्स के सिस्टम को पारदर्शी बनाने की मांग करती हैं। सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट सीमा समृद्धि सवाल करती हैं कि आखिर क्यों पीड़ित महिला की एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है। उन्होंनंे देशभर के शेल्टर होम का सुपरविजन संबंधित राज्य के हाईकोर्ट से कराने की भी वकालत की। सीमा ने आरोपों से घिरी गायघाट शेल्टर होम की सुपरिंटेंडेंट वंदना गुप्ता को अब तक सस्पेंड न किए जाने पर भी एतराज जाहिर किया। गायघाट शेल्टर होम का केस देख रहीं एडवोकेट मीनू कुमारी ने दो बांग्लादेशी महिलाओं को दलाल के हाथों बेच दिए जानेे की आशंका व्यक्त की। बिहार लोक संवाद डाॅट नेट ने महिला विकास मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष वीणा मानवी से ख़ास बातचीत की। इस दौरान मानवी ने बेहद चैंकाने वाली बातें बताईं।

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