क्या शहाबुद्दीन को जबरन कोरोना पाॅजिटिव किया गया? आजम खान भी संक्रमित

सैयद जावेद हसन, बिहार लोक संवाद डाॅन नेट पटना

राजद नेता और पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन की मौत को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

1 मई, 2021 को शहाबुद्दीन की हुई मौत की कहानी अगस्त 2004 में सीवान में हुए हत्याकांड से शुरू होती है।

सीवान के रहने वाले दो भाइयों सतीश और गिरीश रौशन की हत्या इस लिए कर दी जाती है कि उन्होंने फिरौती की रकम देने से इंकार कर दिया था। इन दोनों का तीसरा भाई राजीव रौशन अपने दोनों भाइयों की हत्या का चश्मदीद गवाह था। 6 जून, 2014 को उसकी भी गोली मारकर हत्या कर दी जाती है।

आरोप है कि इन तीनों की हत्या में शहाबुद्दीन और उनके गुर्गों का हाथ था।

9 दिसंबर, 2015 को सीवान के एक स्पेशल जज ने इन हत्याओं के लिए शहाबुद्दीन और उनके तीन गुर्गों को दोषी पाया और उम्र क़ैद की सजा सुना दी।

पटना हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा।

15 फरवरी, 2018 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से शहाबुद्दीन को सीवान से दिल्ली के तिहाड़ जेल में शिफ्ट कर दिया गया।

20 अप्रील 2021 को शहाबुद्दीन को जेल से दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। शहाबुद्दीन को कोरोना संक्रमित पाया गया था।

सवाल उठाया जा रहा है कि जेल में शहाबुद्दीन कोरोना संक्रमित कैसे हो गए। हालांकि शहाबुद्दीन को तिहाड़ के हाई सेक्युरिटी जेल नंबर 2 में रखा गया था।

आरजेडी विधायक अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने शहाबुद्दीन की मौत को लेकर तिहाड़ जेल प्रशासन और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शाहीन ने कहा है कि एक साजिश के तहत मो. शहाबुद्दीन की हत्या की गई है। शाहीन का कहना है कि शहाबुद्दीन तिहाड़ जेल के सेप्रेट वार्ड में थे तब वहां कोरोना कैसे पहुँचा और जब वो संक्रमित हो भी गए तब उनका इलाज बेहतर अस्पताल में कराने के बजाए दीन दयाल जैसे हॉस्पिटल में ही क्यों कराया गया? उनका इलाज एम्स या दूसरे बड़े अस्पतालों में क्यों नही कराया गया?

हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार और जेल प्रशासन को शहाबुद्दीन के लिए समुचित चिकित्सा व्यवस्था करने और देखभाल करने का आदेश जारी किया था।

शाहीन ने कहा कि इन सबके बावजूद शहाबुद्दीन की हुई मौत के पीछे कोई साजिश रची गई है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जाँच की माँग की।

इस बीच वन इंडिया वेबसाइट ने बताया है कि उत्तरप्रदेश के सीतापुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी के सीनीयर लीडर आजम खां भी कोविड पाॅजिटिव पाए गए हैं। उनके साथ-साथ 12 अन्य कैदी भी पाॅजिटिव पाए गए हैं।

सवाल यह है कि जेल में बंद हाई प्रोफाइल पाॅलिटिकल लीडर्स आखिर किस तरह कोरोना पाॅजिटिव हुए जा रहे हैं? सरकार को तमाम कैदियों की सेहत के बारे में भी मानवाधिकार के आधार पर कदम उठाना चाहिए।

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