क्यों चली जा रही है आंखों की रौशनी? हो रही है मौत?

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट पटना
कोरोना के शिकार मरीज़ एक नई मुसीबत में मुब्तला होने लगे हैं। कई लोग ब्लैक फं़गस से संक्रमित पाए जा रहे हैं। बिहार में इस बीमारी से संक्रमित होने वालों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है। इनमें से कुछ मरीज़ों का इलाज पटना के रूबन और पारस अस्पताल में चल रहा है। डाॅक्टरों के अनुसार, ब्लैक फंगस स्टेराॅयड दवा के असंतुलित इस्तेमाल की वजह से होता है। डाॅक्टर यह भी बताते हैं कि कोविड-19 के इलाज के दौरान मरीज़ में ब्लैक फं़गस का संक्रमण हो जाता है। इससे जिस्म के कई आॅर्गन काम करना बंद कर देते हैं और आखि़रकार मरीज़ की मौत हो जाती है। महाराष्ट्र में अब तक 50 से ज़्यादा मरीज़ों की मौत इस बीमारी से हो चुकी है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, साइनस की परेशानी, नाक का बंद हो जाना, आधा चेहरा सुन्न पड़ जाना इस बीमारी के लक्षण हैं। इसके अलावा, आंखों में सूजन, धुंधलापन, सीने में दर्द उठना, सांस लेने में समस्या होना और बुख़ार होना भी ब्लैक फ़ंगस संक्रमण के लक्षण हैं। डायबीटीज़ के रोगियों या जिनका इम्युनिटी सिस्टम कमज़ोर है, उनके लिए यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।

इस तरह के लक्षण पाए जाने पर कुछ लोग बिना डाॅक्टरी सलाह के स्टेराॅयड जैसी दवा का इस्तेमाल करने लगते हैं। इससे आंखों की रौशनी चले जाने जैसे अन्य घातक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

पटना स्थित रूबन मेमारियल अस्पताल के डायरेक्टर डाॅ. सत्यजीत कुमार सिंह कहते हैं कि स्टेराॅयड की दवा डाॅक्टरों की सलाह से ही लेनी चाहिए।

मौजूदा दौर काफ़ी संभल कर रहने का है। ज़रा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए एहतियात बरतें, स्वस्थ रहें। हेल्थ डेस्क, बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना।

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