बिहार में हुआ एक खेला- चिराग की झोंपड़ी में आग, जदूय ने लिया बदला

 बिहार लोक संवाद डाॅट नेट पटना

बिहार की राजनीति में पिछले कई सप्ताह से ’खेला होबे’ की चर्चा चल रही थी और इसका पहली बानगी सामने आयी चिराग पासवान की अध्यक्षता वाली लोक जनशक्ति पार्टी या लोजपा में बगावत की खबर से।

जिन सांसदों के बारे में बगावत की खबर है उनमें उनके चचेरे भाई प्रिंस कुमार, चंदन कुमार, वीणा देवी और महबूब अली कैसर शामिल हैं। स्वर्गीय रामविलास पासवान द्वारा स्थापित लोजपा ने 2019 केे लोकसभा चुनाव में छह सीटों पर एनडीए गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था और उसे सभी सीटों पर जीत मिली थी। अभी इस मामले में चिराग पासवान का कोई बयान सामने नहीं आया है।

खबर यह है कि लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान समेत कुछ छह सांसदों में पांच ने बगावत कर दी है। चूंकि लोजपा का दलीय निशान झोंपड़ी है, इसलिए कहा जा रहा है कि इसमें अब आग लग गयी है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसारं बागी सांसदों ने पहले तो चिराग पासवान को पार्टी के संसदीय दल के नेता पद से हटा दिया और फिर उनके चाचा पशुपति पारस पासवान को नया नेता चुन लिया है। बागी सांसदों ने चिराग को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष मानने से भी इनकार कर दिया है। इस बारे में आज दोपहर बार पशुपति पारस प्रेस वार्ता कर सकते हैं।

लोक जनशक्ति पार्टी में इस आग की चिनगारी तो काफी पहले से थी लेकिन इसकी लपटें रविवार को उजागर हुईं जब यह खबर आयी कि इसकी पार्टी के पांच सांसद अध्यक्ष चिराग पासवान को डंप करने जा रहे हैं। यह भी खबर आयी कि इन बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्होंने अपने गुट को अलग मान्यता देने की मांग की है।

इस बगावत के पीछे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड का हाथ भी बताया जा रहा है। जदयू पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में अपने काफी खराब प्रदर्शन के लिए चिराग पासवान को ही जिम्मेदार मानती रही है। अब एक तरह से जदयू ने चिराग से बदला ले लिया है।

बिहार लोकसभा चुनाव 2020 में जदयू की सीटें 70 से घटकर 43 रह गयी थीं। वह चुनाव चिराग पासवान ने एनडीए से अलग होकर लड़ा था और जदयू के हर उम्मीदवार के खिलाफ अपने उम्मीदवार दिये थे। इससे लोजपा के तो सिर्फ एक उम्मीदवार को जीत मिली लेकिन जदयू के काफी उम्मीदवार हार गये।

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