प्रवासी मजदूर परिवार को 10 हजार रुपये प्रतिमाह देने की मांग, बिहार पर बढ़ सकता है दबाव

सैयद जावेद हसन, बिहार लोक संवाद डाॅट नेट पटना
बंधुआ मजदूर मुक्ति मोर्चा ने दिल्ली में प्रवासी मजदूर नीति बनाने की मांग की है। इसके साथ ही मोर्चा ने कहा है किे प्रत्येक प्रवासी परिवार को 10 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाने चाहिए।

मोर्चा के महासचिव निर्मल गोराना ने सोमवार को दिल्ली में जारी एक बयान में कहा कि प्रवासी मजदूरों का पलायन रोकने के लिए प्रवासी मजदूर नीति लागू करनी होगी। उन्होंने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान प्रवासी मजदूरों ने फिर से अपने कार्यस्थल से निकलकर अपने राज्य की ओर पलायन प्रारंभ कर दिया है। धीरे-धीरे मजदूर सड़कों पर चलने और बस और रेलवे स्टेशन के आसपास एकत्रित होने लगे हैं। मजदूरों को यह भय है कि कोरोना के प्रकोप से फिर से लम्बा लाॅकडाउन न लग जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी सरकार के पास प्रवासी मजदूर की नीति दूर-दूर तक नहीं दिखाई देती है। उसी का परिणाम है की प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों में अपने आप को बेसहारा महसूस कर रहे हैं। आज प्रवासी मजदूर फिर से मजबूर हो गया है।

गोराना ने कहा कि सर्वप्रथम मजदूरों का तत्काल पंजीकरण शुरू किया जाए और प्रवासी मजदूरों को मुफ्त भोजन एवं राशन उपलब्ध करवाया जाए। इसके साथ ही प्रवासी मजदूरों की यात्रा के लिए निशुल्क यात्रा के साधन उपलब्ध करवाए जाएं। इसके लिए प्रवासी मजदूरों के लिए बने हुए कानून एवं अन्य संबंधित कानूनों का क्रियान्वयन करने के लिए ठोस नीति बनाकर उसे तत्काल लागू किया जाए।

बिहार में प्रवासी मजदूर
मोराना के बयान का असर बिहार पर भी हो सकता है। बिहार के लगभग 25 लाख प्रवासी मजदूर हैं जो किसी न किसी राज्य में जाकर मजदूरी करते हैं। कोरोना की पहली लहर और लाॅकडाउन में अधिकांश मजदूर प्रदेश वापस लौट आए थे। तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी का रजिस्ट्रेशन कराने और उन्हें रोजगार मुहैया कराने की बात कही थी। लेकिन कुछ ही महीने बाद मजदूरों का मोह अपने राज्य से भंग हो गया था और वे अन्य राज्यों में वापस जाने लगे थे। अब जबकि कोरोना की दूसरी लहर चलने लगी हैै और अन्य राज्यों में लाॅकडाउन और रात्रि कफ्र्यू की स्थिति है, बिहार के मजदूर वापस आने लगे हैं। महाराष्ट्र, अहमदाबाद, दिल्ली, हरियाणा से वापस आ रहे मजदूरों ने बताया कि फैक्ट्रियां बंद होने लगी हैं और बेरोजगारी की स्थिति उत्पन्न हो गई है इसलिए वे वापस अपने गांव-घर लौटने को मजबूर हैं। हालांकि ऐसे कई फैक्ट्री मालिक थे जिन्होंने रेल और बसव का किराया देकर मजदूरों को वापस काम पर बुलाया था।

इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपील करते हुए कहा है कि जो लोग दूसरे राज्यों में परेशान हैं, वे जल्द से जल्द अपने राज्य में वापस आ जाएं। रेलवे ने वापसी के लिए कई स्पेशल ट्रेनों का परिचालन भी शुरू किया है। इन सबसे बहुत बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर वापस बिहार आएंगे। ऐसे में प्रदेश सरकार पर प्रवासी मजदूरों के लिए बिहार में नीति बनाने का दबाव बढ़ सकता है और बंधुआ मजदूर मुक्ति मोर्चा ने जो मांग दिल्ली सरकार से की है, उसकी गूंज बिहार में भी सुनाई दे सकती है।

बिहार सरकार दे रही है 10 लाख रुपये तक का लोन

देश में कोरोना संक्रमण के कारण बिहार राज्य के मजदूर जो बाहर राज्य काम करने के लिए गए थे उनके वापस आने पर राज्य सरकार श्रम संसाधन विभाग के द्वारा मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत रोजगार और स्वयं का व्यवसाय करने को लेकर 10 लाख का लोन दिया जा रहा है इसको लेकर बिहार सरकार के श्रम संसाधन मंत्री जीवेश मिश्रा ने बताया की बिहार आने वाले मजदूरों को सरकार रोजगार देगी। इस को लेकर पंचायत स्तर पर साढ़े नौ लाख मजदूरों की स्किल मैपिंग कराई जा चुकी है साथ ही आने वाले मजदूरों को राज्य सरकार स्वयं का व्यवसाय करने के लिए 1000000 रुपए का लोन मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के माध्यम से देने का कार्य कर रही है, ताकि आने वाले मजदूर अपने हुनर और कौशल के माध्यम से अपना व्यवसाय कर बिहार के अन्य और लोगों को भी रोजगार देने का काम करें।

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