कोविड-19 से निजात दिलाने के लिए मुस्लिम डाॅक्टर्स ने संभाला मोर्चा, तीन स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने पर हो रहा है विचार

सैयद जावेद हसन, बिहार लोक संवाद डाॅट नेट पटना

कोविड-19 की वर्तमान परिस्थितियों पर बिहार के मशहूर मुस्लिम चिकित्सकों की रविवार को एक वर्चुअल मीटिंग हुई। मीटिंग के दौरान चिकित्सकों ने कोरोनावायरस जैसे संक्रमण से लोगों को सुरक्षित रखने और उन्हें राहत पहुंचाने के उपायों पर चर्चा की गई। जमाअते इस्लामी हिन्द बिहार के तत्वावधान में आयोजित इस मीटिंग की अध्यक्षता मशहूर सर्जन डाॅ. अहमद अब्दुल हई ने की।

मीटिंग के दौरान तीन प्रस्तावों पर सहमति बनी। पहला, मेडिकल काउंसिलिंग का काम हर जिले में जल्द से जल्द शुरू किया जाए। दूसरा, आॅक्सीजन बैंक स्थापित करके जरूरतमंद कोरोना मरीजों को उनके घर तक आॅक्सीजन उपलब्ध कराया जाए। तीसरा, टेम्परेरी कोविड सेंटर कायम करने का प्रयास किया जाए। इसके लिए उपयुक्त स्थानों का चयन किया जाए।

मीटिंग में बिहार और झारखंड के चिकित्सकों ने भाग लिया।

मीटिंग को संबोधित करते हुए जमाअते इस्लामी हिन्द बिहार के प्रदेश् अध्यक्ष मौलाना रिजवान अहमद इस्लाही ने कहा कि वर्तमान समय में हम सब लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी है। कुरान में कहा गया है कि एक आदमी की जान बचाना पूरी मानव जाति की जान बचाना है।

मौलान रिजवान अहमद ने चिकित्सकों से अपील करते हुए कहा कि एक डाॅक्टर के रूप में कोरोना संक्रमण पर काबू पाने और कोरोना संक्रमितों को राहत पहुंचाने के लिए आपसे जहां तक संभव हो, प्रयास करें। सरकार अकेले इस काम को नहीं कर सकती। उन्होंने तमाम जिलों में मेडिकल कंसल्टेशन के लिए डाक्टरों की टीम बनाने, आॅक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराने और कोरोना मरीजों की अन्य सहायता करने के लिए ठोस रणनीति अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कहा कि ऐसा करके हमारे डाॅक्टर पुण्य के भागीदार होंगे।

मीटिंग में हिस्सा लेते हुए अब्दुलहई ने टम्परेरी कोविड हाॅस्पीटल, मेडिकल काउंसिलिंग और अक्सीजन बैंक जैसी सुविधाएं शुरू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डाॅक्टरों की मौजूदगी और दवाओं के इंतेजाम के बारे में हमें सोचना है। उन्होंने हेल्पलाइन नंबार जारी करने का भी सुझाव दिया।

अरशद अजमल ने कहा कि डाॅक्टर्स रजिस्ट्रेशन के लिए कोई जगह बना लें। मेडिकल एडवाइज बहुत जरूरी है। डाॅक्टर अगर हर रोज दो-दो घंटे भी आॅनलाइन कंसल्टेशन के लिए समय दे दें तो काफी हो सकता है।

डा. आफताब ने रांची का अनुभव साझा करते हु कहा कि माइल्ड सिस्टम वालों के लिए दो डाॅक्टर को असाइन किया गया है। एक डाॅक्टर ने कोआॅर्डिनेटर की जिम्मेदारी संभाली है। कोआॅर्डिनेटर के जरिये माइल्ड सिस्टम वालों के लिए आॅनलाइन कंसल्टिंग की सुविधा प्रदान की जाती है। कुछ ऐसे डाॅक्टरों और कम्पाउंडरों की भी सेवा ली गई है, जों होम विजिट की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। इसके साथ ही दो सौ, पांच सौ, हजार रुपये की मुफ्त दवा भी उपलब्ध करा रहे हैं। लोगों को आॅक्सीजन सिलिंडर भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

डाॅ. मस्लेहुद्दीन ने कहा कि पटना में आॅक्सीजन की कमी सबसे बड़ा मसला है। एनएमसीएच में भी आॅक्सीजन का संकट है। प्राइवेट अस्पतालों की भी यही समस्या है। इसलिए सबसे बड़ी जरूरत आॅक्सीजन उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि आॅनलाइन कंसल्टेशन भी जरूरी है इसलिए कि लोगों को समय पर बीमारी के बारे में जानकारी नहीं होती है।

डाॅ. महमूदुल हसन ने कहा कि डाॅक्टर्स का एक गु्रप मिलकर माइल्ड, मोडरेट, सिवियर मरीज के लिए एक स्टैंडर्ड प्रोटोकोल बना ले ताकि इलाज में सुविधा हो।

ख्वाजा इरफान ने कहा कि कुछ डाॅक्टर्स की क्लिनिक खाली है, वहां से कोरोना संक्रमितों को राहत पहुंचाने का काम हो सकता है। इसके लिए उन्होंने एक-दो डाॅक्टरों की क्लिनिक का नाम भी सुझाया।

डाॅ. अब्दुस सलाम ने कहा एक कंट्रोल रूम होना चाहिए। साथ ही एक टाॅल फ्री नंबर जारी होना चाहिए जिसपर लोगों को सलाह दी जा सके। कुछ मोबाइल डाक्टर्स की भी सेवा ली जानी चाहिए।

डाॅ. अब्बास मुस्तफा ने कहा कि एक ऐसा सिस्टम विकसित होना चाहिए जिसके तहत डाॅक्टर मरीजों को गाइड करें कि उन्हें कौन सी दवा लेनी है और कौन-कौन सी जांच करानी है। उन्होंने कहा कि मरीजों का घर पर ही इलाज हो तो ज्यादा बेहतर है। हमलोग आॅक्सीजन रिफिलिंग की सुविधा प्रदान कर सकते हैं। काॅशन मनी के तौर पर मरीजों से पैसा जमा कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि घर पर जाकर मरीज को एडवाइस करना और माॅनिटर करना इस बात पर निर्भर करता है कि हमारे पास हैंड्स कितने हैं।

डा. मोहम्मद एजाज ने पेशकश करते हुए कहा कि वो प्रतिदिन 10 मरीज को आॅनलाइन मुफ्त एडवाइज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास कुछ ऐसे लोग भी हैं जो होम सैम्पलिंग का काम कर सकते हैं।

आज की मीटिंग में आए सुझावों को ठोस और व्यवहारिक रूप देने के लिए सोमवार को डाॅ. अहमद अब्दुल हई की अध्यक्षता में एक फिर मीटिंग होगी। मीटिंग के बाद कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण पाने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

 

 

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