आखिरकार पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय ने निकाली उर्दू प्रोफेसर के लिए वैकेंसी

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट
मगध विश्वविद्यालय से तीन साल पहले अलग होकर बने पटना स्थित पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय ने भारी विरोध के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए वैकेंसी में उर्दू को शामिल कर लिया है।
इससे पहले पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय या पीपीयू की तरफ से जारी बहाली सूचना में उर्दू के असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए निर्धारित पदों पर कैंची चला दी थी। इसके बाद उर्दू वर्ग ने यह कहकर इसका भारी विरोध किया कि उर्दू बिहार की दूसरी सरकारी भाषा है लेकिन राज्य सरकार की यूनिवर्सिटी ने फैकल्टी बहाली में इसे ही किनारा लगा दिया। अब इन पदों पर बहाली की सूचना दी गयी है। इसे पीपीयू की वेबसाइट पर देखा जा सकता है।
पीपीयू की ओर से 17 विषयों के 1048 पदों पर गेस्ट फैकल्टी की बहाली के लिए पिछले हफ्ते शुक्रवार को विज्ञापन निकाला था। इस विज्ञापन में उर्दू के लिए कोई वैकेंसी दर्ज नहीं थी।
इस बारे में पीपीयू के उर्दू विभागाध्यक्ष अबू बक्र रिजवी का कहना है कि उर्दू के साथ भेदभाव के कारण ऐसा हो रहा है।
बिहार में उर्दू दूसरी सरकारी भाषा होने के बावजूद स्कूल और काॅलेजों में दिन प्रतिदिन इसकी हालत खराब होती जा रही है। उर्दू को सरकारी स्कूलों में अनिवार्य भाषा की सूची से निकाले जाने का भी काफी विरोध हुआ है। इसी तरह सरकारी कार्यालयों में उर्द को दरकिनार करने की शिकायत मिलती रहती है।
इमारत शरिया, बिहार-झारखंड व उड़ीसा ने पिछले हाल ही में एक राज्यव्यापी अभियान भी चलाया था। इसमें मांग की गयी थी कि उर्दू को दूसरी सरकारी भाषा होने की हैसियत से हर जगह प्रचलन में लाया जाए। उनकी मांग थी कि उर्दू को सरकारी स्कूलों में पहले की तरह अनिवार्य विषय घोषित किया जाए और सरकारी कार्यालयों में उर्दू का इस्तेमाल पूर्णतः किया जाए।

 

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