पटना के डीएम-एसपी पर लगा 5000-5000 का जुर्माना, जाने क्यों?

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट
पटना की एक निचली अदालत ने शुक्रवार को पटना के डीएम और एससपी पर 5000-5000 रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने कहा है कि इनकी तनख्वाह से यह रकम काटकर तीस दिनों के अंदर अदालत को तामिला रिपोर्ट दी जाए।
एडीजे-सत्रह अविनाश कुमार-1 ने 6 मई 2000 को दर्ज कराये गये हत्या के प्रयास के एक मामले में पिछले आठ वर्षों में एक भी गवाह पेश नहीं करने के कारण यह आदेश पारित किया है। तब मनीष कुमार झा नाम के आदमी ने पटना के कोतवाली थाने में तीन लोगों के खिलाफ छुरा मारकर जान से मारने के प्रयास का केस किया था।
अदालत का कहना है कि क्रिमिनल कोड के तहत गवाहों को पेश करने की जिम्मेदारी डीएम और एसएसपी पर है लेकिन उनकी तरफ से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गयी।
अदालत ने सूबे के डीजीपी और मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि पटना के डीएम और एसएसपी के वेतन से पांच-पांच हजार रुपये काटकर मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करें। अदालत ने डीजीपी और मुख्य सचिव से इन दोनों अधिकारियों- डीएम और एसएसपी- के गलत आचरण, आदेश की अवहेलना और लापरवाही पर ध्यान देने को कहा है।
अदालत ने पिछले साल 19 दिसंबर को दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। उसने इस साल 18 जनवरी, 27 जनवरी और 23 फरवरी को उनके हाजिर होने की तारीख भी मुकर्रर की थी लेकिन कोई हाजिर नहीं हुआ और न ही किसी की गवाही हुई।
अदालत के इस आदेश से यह स्पष्ट नहीं है कि किस डीएम और एसएसपी के वेतन से जुर्माने की राशि काटी जाएगी क्योंकि पिछले आठ सालों में इस पद आसीन अफसरों का तबादला हो चुका है।

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