छपी-अनछपीः पिछले साल 1.34 लाख बच्चे रहे स्कूल से बाहर, नीतीश की कामना- हज की दुआ से दूर हो कोरोना

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना। ’हिन्दुस्तान’ और प्रभात खबर के पटना संस्कारण में आज की सबसे बड़ी खबर स्कूलों में दाखिले पर है। हिन्दुस्तान की हेडिंग है- नौवीं में दाखिले को एक से राज्यव्यापी अभियान। प्रभात खबर ने लिखा है कि राज्य में 80 हजार स्कूल हैं और ड्राॅप आउट यानी बीच में ही पढ़ाई छोड़ने वालों की संख्या कम करने के लिए यह अभियान चलाया जाता है।
विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कक्षा आठ के बाद ड्राॅप आउट बहुत होता है। पिछले साल 1.34 लाख बच्चे स्कूल से बाहर रहे। 65,715 ऐसे मिले जिनका कभी नामांकन ही नहीं हुआ और 68, 537 बच्चों ने बीच में ही स्कूल छोड़ दिया।
जागरण ने अपने हिन्दुत्ववादी एजेंडे पर कायम रहते हुए अपनी सबसे बड़ी खबर की हेडिंग लगायी है- पूरे उप्र में था दंगे कराने का षडयंत्र। इसकी नजर में हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम पर अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी दंगा कराने का षडयंत्र था। दूसरी ओर हिन्दुस्तान की हेडिंग है- रांची में हालात सुधरे, छह थाना क्षेत्रों में दी गयी ढील। रांची के प्रभात खबर में भी लिखा है- शहर में शांति। प्रभात खबर, रांची में ही एक खबर है कि ’अमनपसंद’ मुसलमानों ने जमीयते उलेमा हिन्द के महासचिव की प्रेस वार्ता रोकी। अखबार यह भी लिख सकता था कि स्थानीय लोगों ने लेकिन इसकी नजर में जिन्होंने रोका वे अमनपसंद थे, बाकी का पता नहीं।
भास्कर ने एम्स में मसौढ़ी की एक डाॅक्टर के सिजेरियन आॅपरेशन के दौरान रूई पेट में ही छोड़ देने के विवाद को लीड की जगह दी है। हेडिंग है-
पेट में काॅटन छोड़ने वाली डाॅक्टर पर नहीं
पीड़िता पर ही केस…जिसकी फिर सर्जरी। ’हिन्दुस्तान’ अखबार के अनुसार उस महिला के पेट से रूई नहीं बैंडेज निकला है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को हज भवन में हज यात्रियों के लिए आयोजित कार्यक्रम में दुआ में शामिल हुए। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि कोरोना के कारण दो साल बाद हो रही हज यात्रा से सबका भला होगा और कोरोना व दूसरी नुकसान देने वाली चीजों को खात्मा होगा।
अनछपीः बिहार सरकार हर साल मनेर में सूफी महोत्सव कराती है। रविवार को भी इसका आयोजन कराया गया। हिन्दुस्तान में छपी इसकी खबर की हेडिंग पढ़िए- आवारा हवा का झोंका हूं, निकला हूं पल दो पल के लिए। लेकिन प्रभात खबर की हेडिंग थोड़ी अलग है- सूफी-संतों की धरती रहा है बिहारः डिप्टी सीएम। इस खबर में जिस बात की सबसे कम चर्चा है वह यह है कि यह मनेर में किस सूफी की दरगाह है जिनके लिए यह आयोजन हुआ है। हिन्दुस्तान में एक कोने में जानकारी दी गयी है कि प्रसिद्ध सूफी संत हजरत मखदमू शाह कमालुद्दीन अहमद याहया मनेरी और मखदमू शाह दौलत मनेरी रहमतुल्लाह के परिसर में हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक सोहबत मेला लगा। दूसरी ओर उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि बुद्ध और महावीर समेत कई सूफी संत यहीं से रहे। सूफी महोत्सव वास्तव में बिहार के नेताओं और अफसरों के लिए मौज मस्ती की चीज बनकर रह गया है। यहां से सूफी की शिक्षाओं पर कोई बात आगे बढ़े तो इस महोत्सव का महत्व सिद्ध होगा।

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