छपी-अनछपी: निजी मेडिकल कॉलेजों में आधी सीटों पर सरकारी फीस, महागठबंधन व भाजपा का आज बड़ा प्रोग्राम

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की आधी सीटों पर सरकारी दर पर पढ़ाई को जरूरी कर दिया गया है। यह खबर सभी अखबारों में लीड है लेकिन इसमें यह बात दबा दी गई के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी फीस बढ़ा दी गई है। बिहार में आज सरकारी दलों के महागठबंधन और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी का बड़ा कार्यक्रम हो रहा है जिसकी खबर सभी जगह प्रमुखता से दी गई है। विश्वविद्यालयों में 4638 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने की खबर भी प्रमुखता से ली गई है।

जागरण के अनुसार राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्नातक यानी एमबीबीएस, स्नातकोत्तर यानी एमडी-एमएस के साथ सुपर स्पेशलिटी के पाठ्यक्रमों के फीस एक समान कर दी गयी हैं और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की 50% सीटों पर सरकारी दरों पर पढ़ाई अनिवार्य कर दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट ने शुक्रवार को यह फैसला लिया। जागरण के अनुसार बिहार के कुल 8 निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की कुल 1050 सीटें हैं। इस वक्त एमबीबीएस और पीजी में सरकारी कॉलेज लगभग 40-50 हज़ार रुपये सालाना फीस लेते हैं। दूसरी तरफ प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस के लिए 15-20 लाख रुपए सालाना और पीजी के लिए 40-50 लाख रुपये सालाना फीस लगती है। हैरत की बात यह है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चुपचाप 5300 रुपए सालाना फीस बढ़ा दी गई लेकिन इसकी चर्चा अखबारों में नहीं है।

भाजपा मुक्त भारत का एलान होगा

जागरण की सुर्खी है: महागठबंधन आज करेगा भाजपा मुक्त भारत का ऐलान। हिन्दुस्तान ने लिखा है: महागठबंधन के 7 दलों की पूर्णिया में रैली आज। बिहार में सरकार चला रहे जदयू, राजद समेत महागठबंधन के सात दलों की साझी ताकत आज पूर्णिया के रंगभूमि मैदान में दिखेगी। रंगभूमि मैदान में महागठबंधन की महारैली के निशाने पर केन्द्र की सरकार होगी। छह माह पहले भाजपा के राज्य की सरकार से हटने के एक माह बाद ही गृहमंत्री अमित शाह ने इस मैदान पर सद्भावना रैली की थी और उन्होंने महागठबंधन तथा नीतीश सरकार पर कई सवाल उछाले थे। शाह-मोदी के साथ ही केन्द्र सरकार की नितियां भी शनिवार की रैली में महागठबंधन के शीर्ष नेताओं के निशाने पर होंगी। इस रैली से महागठबंधन बिहार की 40 सीटों पर अप्रैल-मई 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव का शंखनाद भी करने जा रहा है। साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की देशभर की विपक्षी पार्टियों को नरेन्द्र मोदी तथा भाजपा के खिलाफ एकजुट करने की मुहिम को भी बल मिलने के आसार हैं। रैली को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, कांग्रेस कोटे के मंत्री आफाक आलम, सीपीएम के ललन चौधरी, सीपीआई के ओम प्रकाश नारायण भी संबोधित करेंगे।

अमित शाह लौरिया व पटना में

हिन्दुस्तान ने पहले पेज पर सूचना दी है: चंपारण में आज भाजपा की सभा, शाह करेंगे संबोधित। जागरण ने लिखा है: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की आज वाल्मीकि नगर और पटना में सभाएं। देश के गृह मंत्री व भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर बिहार आ रहे हैं। पार्टी की ओर से हर लोकसभा क्षेत्र में हो रही रैली के क्रम में वाल्मीकिनगर में रैली होने जा रही है। इसमें वे शामिल होंगे। पटना में किसान मजदूर समागम में भी भाग लेंगे। गृह मंत्री का बिहार दौरा लोकसभा चुनाव के शंखनाद के रूप में देखा जा रहा है। दोनों कार्यक्रमों में उनके निशाने पर महागठबंधन रहेगा।

असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली अटकी

भास्कर की दूसरी सबसे बड़ी सुर्खी है: 50% से अधिक आरक्षण पर 4368 असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया रद्द। हिंदुस्तान में भी यह दूसरी सबसे बड़ी खबर है। अखबारों के अनुसार पटना हाईकोर्ट ने राज्य के 12 विश्वविद्यालयों में 4638 असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली के विज्ञापन को रद्द कर दिया है। इससे पूर्व कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करने के बाद 10 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा की एकलपीठ ने शुक्रवार को डॉ. अमोद प्रबोध एवं अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर फैसला दिया। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश का असर कुछ विषयों जैसे उर्दू, फारसी व बांग्ला आदि में असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली पर नहीं होगा। कोर्ट में मामले पर सुनवाई के दौरान वरीय अधिवक्ता पीके शाही (उस समय महाधिवक्ता नहीं बने थे, याचिकाकर्ता के वकील थे) और अधिवक्ता एसएस सुंदरम ने बताया था कि राज्य के सभी बारह विश्वविद्यालयों में विभिन्न विषयों में 4638 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने विज्ञापन प्रकाशित किया था। उनका कहना था कि प्रावधानों के अनुसार आरक्षण की सीमा किसी भी सूरत में पचास फीसदी से अधिक नहीं हो सकती। लेकिन 4638 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर बहाली के लिए 1223 पद ही सामान्य श्रेणी के लिए रखे गए।

कांग्रेस का रायपुर अधिवेशन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी का अधिवेशन शुरू हुआ लेकिन इसमें पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल नहीं हुईं। कायदे से इसमें कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्यों के लिए चुनाव होना चाहिए था लेकिन अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में संचालन समिति ने सर्वसम्मति से चुनाव नहीं कराने का फैसला किया। संचालन समिति ने सभी सदस्यों को नामित करने का अधिकार खड़गे को सौंप दिया है। पार्टी ने सीडब्ल्यूसी के सदस्यों की संख्या बढ़ाने का भी फैसला किया है। पार्टी सीडब्ल्यूसी के सदस्यों की संख्या 23 से बढ़ाकर 35 कर रही है। मकसद एससी/एसटी, ओबीसी, महिलाओं और अल्पसंख्यकों को हिस्सेदारी सुनिश्चित की जा सके। साथ पार्टी की सबसे अहम समिति में 50 आरक्षण 50 वर्ष से कम आयु के सदस्यों को दिया जा सके। पार्टी में 26 वर्षों से सीडब्ल्यूसी के सदस्यों के चुनाव नहीं हुए हैं। 1997 में तत्कालीन अध्यक्ष सीताराम केसरी की अध्यक्षता में कोलकाता अधिवेशन के वक्त चुनाव हुए थे।

चपरासी बहाली के लिए 3 लाख!

भास्कर की खबर है: रेलवे में चपरासी की नौकरी के लिए चीफ कंट्रोलर ने मांगे थे तीन लाख, जेल भेजे गए। सीबीआई ने पूर्व मध्य रेल के ज़ोनल मुख्यालय में तैनात चीफ कंट्रोलर ऑपरेटिंग अभय कुमार को ₹50,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। अभय कुमार ने वैशाली के लालगंज के रहने वाले राजकिशोर कपूर से उनके बेटे को रेलवे में चपरासी की नौकरी लगवाने के नाम पर ₹3,00,000 की मांग की थी। इसके लिए ऐडवान्स में ₹50,000 मांगे थे।

कुछ और सुर्खियां

  • ‘यूपी में का बा’ पार्ट 2 गाने पर भोजपुरी गायिका नेहा को नोटिस… फिर पति की नौकरी छिनी, तनाव की वजह से अस्पताल में भर्ती
  • उपेंद्र कुशवाहा ने विधान परिषद से इस्तीफा दिया
  • हिंडनबर्ग- अदानी शेयर घोटाला मामले की कवरेज पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
  • यूएन में यूक्रेन पर पारित प्रस्ताव से दूर रहा भारत
  • पटना सिटी में दो जमीन कारोबारियों की हत्या

अनछपी: बिहार के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की आधी सीटों पर सरकारी कॉलेजों के बराबर फीस को जरूरी करार देने की घोषणा एक अच्छा कदम है लेकिन असली सवाल यह है कि सरकार किस हद तक अपनी इस घोषणा को लागू करवा सकती है। ध्यान रहे कि स्कूलों में आरटीई के तहत 25% गरीब विद्यार्थियों को मुफ्त में पढ़ाने का आदेश केंद्र सरकार ने जारी कर रखा है लेकिन अक्सर यह शिकायत मिलती है कि स्कूल ऐसा नहीं करते। अभी कैबिनेट ने यह फैसला तो कर लिया है लेकिन यह भी देखना दिलचस्प होगा कि प्राइवेट कॉलेजों के मालिक इसे सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं या अदालत चले जाते हैं। आधी सीटों पर सरकारी फीस की घोषणा वैसे तो लोकलुभावन है लेकिन यह भी सोचने की बात है कि 20-20 लाख रुपये सालाना फ़ीस देकर एमबीबीएस बनने वाले डॉक्टरों से समाज की सेवा की उम्मीद कैसे की जा सकती है। जब सरकार ही प्राइवेट कॉलेजों को मुनाफा कमाने की इजाजत दे दे तो आम लोगों को कहां से राहत मिलेगी। वैसे आजकल आईआईटी व मेडिकल कॉलेजों में भी फीस काफी बढ़ा दी गई है लेकिन प्राइवेट कॉलेजों की फीस समाज में पैसे के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देने वाली है। ऐसे में जरूरी लगता है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस निर्धारित करने के लिए एक समिति बने ना कि यह पूरी तरह मालिकों के हाथ में हो।

 

 

 

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