छपी-अनछपी: सुप्रीम कोर्ट जज बहाली में सरकार को चाहिए हिस्सेदारी, पंखा-बत्ती का बिजली बिल 89 हज़ार!

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। सुप्रीम कोर्ट में जजों की बहाली में मोदी सरकार अपनी हिस्सेदारी के लिए पूरा जोर लगाए हुए है जिसके लिए अब क़ानून मंत्री ने चिट्ठी लिखी है। यह खबर जागरण ने पहले पेज पर प्रमुखता से दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में एक बुजुर्ग ने यह शिकायत की कि उनके पास एक बल्ब जलाने के लिए 89 हज़ार रुपये तक का बिल आया है। इस खबर को अच्छी जगह मिली है। भारत में 1 फ़ीसदी अमीरों के पास देश की 40% संपत्ति होने की खबर को भी अहमियत दी गई है।

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर है: बिजली के बिल में आ रही गड़बड़ियों की जांच होगी। जागरण में इसी की सुर्खी है: एक बल्ब जलाने का बिल 89 हज़ार, सीएम ने कहा- तुरंत निदान करें। सोमवार को ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम’ में खपत से काफी अधिक बिजली बिल मिलने की कई शिकायतें पहुंचीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को तत्काल मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। एक गरीब बुजुर्ग के घर का 42 हजार और 53 हजार का बिजली बिल देखकर सीएम ने पदाधिकारियों से कहा- कमाल है, इतना ज्यादा कैसे आ रहा है। तीसरे महीने का बिल 89 हज़ार था। पश्चिम चंपारण जिले से आए बुजुर्ग बिजली बिल की पीड़ा सुनाते हुए सीएम के समक्ष फफक कर रोने लगे। सीएम ने उन्हें चुप कराते हुए पूछा कि समस्या बताएं। बुजुर्ग व्यक्ति ने उनसे कहा कि साल-सालभर पर बिजली बिल आता है। इतना ज्यादा बिल आया है, हम दे नहीं पाएंगे। सीएम ने पूछा, आप अपने घर पर क्या करते हैं कि इतना बिजली बिल आया है। बुजुर्ग ने कहा कि सिर्फ बत्ती-पंखा चलता है।

धान खरीद: पैक्सों को एक्स्ट्रा खर्च सरकार देगी

जागरण की सबसे बड़ी खबर है: धान खरीद में लगी अतिरिक्त राशि वहन करेगी सरकार। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार की शाम धान अधिप्राप्ति को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिया कि धान की सरकारी खरीद में पैक्सों की जो अतिरिक्त राशि खर्च हो रही है उसका भुगतान सरकार करेगी।

मुआवजाज़े का सवाल

भास्कर की सबसे बड़ी खबर है: बक्सर में किसानों की जमीन का नियमों के खिलाफ अधिग्रहण! मुआवजा भी पुराने बाजार मूल्य के आधार पर। अखबार लिखता है कि चौसा के बनारपुर में पावर प्लांट फूंके जाने के बाद किसान अब भी धरने में बैठे हैं जहां काम बंद है। एसटीपीएल द्वारा लगभग 9000 करोड़ खर्च कर बनाए जा रहे 1320 मेगावॉट थर्मल पावर प्रोजेक्ट में हंगामा की बड़ी वजह उचित मुआवज़े की मांग है। प्रोजेक्ट निर्माण में मुख्य प्लांट के लिए 2013 में 1058 एकड़ जमीन अधिकृत हो चुकी है। प्लांट तक कोयला लाने के लिए बन रहे रेल कॉरिडोर के लिए 147 एकड़ और गंगा से पानी लाने के लिए 45 एकड़ भूमि का अधिग्रहण प्रक्रिया में है। करीब 1000 किसान प्रभावित हैं, इनमें महज 69 लोगों ने मुआवजा लिया है। बाकी ने ये कहकर इनकार किया है कि जमीनों का बाजार मूल्य अधिक है। सरकार ने कम पैसे देने के लिए भूमि का दर निर्धारण ठीक से नहीं किया है।

सुप्रीम कोर्ट जज बहाली में सरकार का दखल

जागरण में पहले पेज पर सुर्खी है: सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति में हो सरकार की भी हिस्सेदारी। इस बारे में कानून मंत्री ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को m.o.p. के पुनर्गठन का सुझाव दिया है। अखबार लिखता है कि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर न्यायपालिका और सरकार के बीच चल रही खींचतान में एक नया मोड़ आ गया है। केंद्रीय कानून मंत्री किरन रिजिजू ने प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर मेमोरंडा ऑफ प्रोसीजर यानी m.o.p. के पुनर्गठन का सुझाव दिया है। उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति कि कॉलेजियम प्रणाली में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने के लिए शोध एवं मूल्यांकन समिति (सर्च कम इवैल्यूएशन कमेटी एसइएसी) बनाने का सुझाव दिया है। उन्होंने इसमें केंद्र सरकार का एक प्रतिनिधि शामिल करने की बात भी कही है। इस बारे में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश का कहना है कि कॉलेजियम में सुधार की जरूरत तो है लेकिन यह सरकार जो चाहती है वह पूर्ण अधीनता है। सरकार द्वारा किया जा रहा है इलाज न्यायपालिका के लिए जहर की गोली है।

पटना के लोगों से 1.18 करोड़ की ठगी

ऑनलाइन ई-कॉमर्स के नाम पर पटना के कई लोगों से एक करोड़ रुपए से अधिक ठगने की खबर सभी अखबारों में प्रमुखता से छपी है। ऑनलाइन ई-कॉमर्स कंपनी को सामान बेचने वाले फर्म में निवेश और 25 फीसदी मुनाफे का लालच देकर नौ लोगों से 1 करोड़ 18 लाख 59 हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। इस बाबत एसके पुरी थाने में सोमवार को पीड़ित कामता कुमार सिंह (दीघा) ने ठगी और धमकी देने का केस कराया है। व्यवसायी कामता कुमार सिंह का आरोप है कि राजीव रंजन, ललन तिवारी समेत अन्य ने उन्हें खुद को एक फर्म का निदेशक बताया तथा कहा कि वे चीन समेत अन्य देशों से इलेक्ट्रॉनिक सामान मंगाते हैं। फिर बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों से साझेदारी कर सामान बेचते हैं। पीड़ित को कंपनी के प्रोजेक्ट में रुपये लगाने की बात कही गई। यह भी कहा गया कि अगर वे कंपनी में रुपये लगाते हैं तो उससे आने वाले मुनाफे का 25 प्रतिशत हिस्सा उन्हें मिलेगा। लालच में आकर उन्होंने 51 लाख 71 हजार 500 रुपये दे दिये।

एक फीसद लोग, 40% दौलत

हिन्दुस्तान की एक अहम सुर्खी है: भारत में एक फीसदी अमीरों के पास देश की 40% संपत्ति। दूसरी ओर नीचे से 50 प्रतिशत आबादी के पास कुल संपत्ति का सिर्फ तीन फीसदी हिस्सा ही है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के पहले दिन सोमवार को अपनी वार्षिक असमानता रिपोर्ट में अधिकार समूह ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने यह जानकारी दी। इसके मुताबिक भारत के दस सबसे धनी लोगों पर पांच प्रतिशत कर लगाने से बच्चों को स्कूल वापस लाने के लिए पूरा धन मिल सकता है। सिर्फ एक अरबपति गौतम अडानी को 2017-2021 के बीच मिले लाभ पर एकमुश्त कर लगाकर 1.79 लाख करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं।

कुछ अन्य सुर्खियां

  • धूप के बाद भी बिहार में कोल्ड डे के आसार, 6 डिग्री तक गिरेगा तापमान
  • अग्निवीरों से मोदी ने कहा गेमचेंजर होगा अग्निपथ
  • मतांतरण के मामले में अल्पसंख्यकों के खिलाफ टिप्पणियां हटाएं: सुप्रीम कोर्ट
  • सीमा की विवादित जमीन पर पुल बना रहा नेपाल
  • दुष्कर्म मामले में शाहनवाज हुसैन की सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज
  • मोदी का रोड शो कर भाजपा ने 2024 के लिए बाहें चढ़ाईं
  • इस साल एक भी चुनाव नहीं हारना: नड्डा
  • हर घर की एक गृहिणी को दो हजार मिलेंगे: प्रियंका (कर्नाटक में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की घोषणा)

 

अनछपी: बिहार में बिजली बिल का खेल भी अजीब है। जहां एक तरफ बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो बिजली का बिल नहीं अदा करते या उसमें हेराफेरी करते हैं तो दूसरी तरफ ऐसी शिकायतें भी हजारों की संख्या में होंगी जिनमें बिजली का बिल सही समय पर न देने और अनाप-शनाप बिल भेजने की बात कही जाती है। बिहार में इस समय प्रीपेड मीटर लगाने का भी सिलसिला जारी है लेकिन अब भी बड़ी संख्या में लोग बिजली इस्तेमाल करने के बाद उसका बिल जमा करते हैं। बड़ी संख्या में लोग बिजली दफ्तर के चक्कर लगाते मिल जाएंगे जिन्हें बिजली का बिल सही समय पर नहीं दिया जाता है। ऐसे लोग भी काफी संख्या में है जिन्हें 100-500 की जगह हजार-दस हज़ार का बिल थमा दिया जाता है। बिजली विभाग की कमान बड़े-बड़े आईएएस ऑफिसर संभालते हैं लेकिन क्या उन्हें यह बात नहीं मालूम होती है कि यह गोरखधंधा क्यों किया जाता है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है बिजली कर्मियों द्वारा अवैध वसूली। चाहे वह मामूली स्टाफ हो या बिजली का इंजीनियर सब इस मिलीभगत में रहते हैं कि उपभोक्ताओं को ऐसा बिल दिया जाए कि वह परेशान होकर उनके दफ्तरों के चक्कर लगाएं और फिर मोलभाव कर घूस की रकम ली जाए। ऐसे में जरूरी है कि बिजली विभाग अपने कर्मचारियों को हर महीने समय पर बिल देने की हिदायत दे और देर होने पर उन पर जुर्माना लगाने की व्यवस्था की जाए।

 

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