छपी-अनछपी: रेलवे घोटाले में लालू-राबड़ी चार्जशीट, धर्म बदलने पर एससी के दर्जा पर फैसले के लिए आयोग

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में सत्ता गंवाने के बाद भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने नीतीश कुमार के नए साझीदार लालू प्रसाद को हर तरफ से घेरने की तैयारी तेज कर दी है। कहने को तो यह कार्रवाई सीबीआई कर रही है लेकिन जानकार समझते हैं कि यह किसके इशारे पर हो रहा है। लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के समय के इस मामले में लालू और अन्य 15 लोगों पर चार्जशीट दाखिल की गई है। यह मामला जमीन लेने के बदले नौकरी देने का है। यही खबर अधिकतर अखबारों में लीड बनी है।

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी हेडलाइन है: लालू-राबड़ी समेत 16 पर चार्जशीट। इसमें बताया गया है कि नौकरी के बदले 1,05,292 वर्गफुट जमीन ली गयी जिसकी कीमत 4.39 करोड़ रुपए थी। 

यह मामला लालू प्रसाद के वर्ष 2004-2009 के रेल मंत्री के कार्यकाल का है। आरोप है कि बगैर किसी विज्ञापन के कई लोगों को रेलवे में चतुर्थवर्गीय पद पर नौकरी दी गई और इसके बदले उनके या परिवार के सदस्यों से जमीन लिखवाई गई। कथित तौर पर ये जमीन राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव और दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी के नाम पर ली गई। रेलवे की तत्कालीन महाप्रबंधक सौव्मया राघवन और तत्कालीन सीपीओ कमल दीप मैनरॉय के नाम भी चार्जशीट में शामिल हैं। सीबीआई ने दिल्ली की साउथ एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी है। लालू प्रसाद की बेटी हेमा यादव भी इस मामले में नामजद हैं। हालांकि फिलहाल उनके खिलाफ चार्जशीट दायर नहीं की गई है। इस सम्बंध में एफआईआर 18 मई 2022 को दर्ज हुई थी  

दैनिक जागरण की सुर्खी है: जमीन के बदले नौकरी घोटाले में लालू राबड़ी के विरुद्ध आरोप पत्र। प्रभात खबर ने लिखा है: लालू-राबड़ी समेत 16 पर चार्जशीट। 

सभी अखबारों की एक प्रमुख खबर में बताया गया है कि नीतीश कुमार ने जयप्रकाश नारायण के गांव सिताब दियारा के बारे में यूपी सरकार को एक पत्र लिखकर कहा है कि वह अपने हिस्से का कार्य जल्द पूरा करे। भास्कर में यही सबसे बड़ी खबर है: नीतीश ने योगी से कहा- जेपी का गांव बचाने को यूपी भी काम करे। जागरण में इस खबर की सुर्खी है: जेपी को कभी भूलेगा नहीं समाज, उन्होंने जो दिया उसे बताएं: मुख्यमंत्री।

दूध के बारे में हिन्दुस्तान की खबर है: सुधा दूध के दाम ₹2 से ₹3 प्रति लीटर बढ़ा। बढ़ी हुई डर 11 अक्टूबर से लागू होगी। यह खबर बाकी अखबारों में भी प्रमुखता से छपी है।

पश्चिम चंपारण में एक बाघ का आतंक बढ़ने के कारण उसे गोली मारने का आदेश दिया गया है। हिन्दुस्तान ने बताया है कि इस बाघ ने जब 5वां शिकार किया तो उसे गोली मारने का आदेश दिया गया है। प्रभात खबर ने अब तक इस बाघ द्वारा सात लोगों को मारे जाने की सूचना दी है। वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व के बारे में इस खबर की भास्कर में हेडिंग है: आदमखोर बाघ ने एक और युवक को मार डाला, उग्र लोगों ने रेस्क्यू टीम पर किया हमला…चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने दीया मारने का आदेश। 

शांति का नोबेल प्राइज पाने वाले संभावित लोगों में फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर और उनके साथी प्रतीक का नाम शामिल था लेकिन यह पुरस्कार ले गए बेलारूस के एलेस बियालियात्स्की और अन्य। जागरण के अनुसार रूस यूक्रेन युद्ध के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन व सहयोगी देश बेलारूस का विरोध करने वाले यूक्रेन, बेलारूस और उसके मानव अधिकार कार्यकर्ताओं को इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। इनमें 2021 में सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन करने के बाद बिना ट्रायल जेल में बंद बेलारूस के एलेस बियालियात्स्की, रूसी मानव अधिकार समूह मेमोरियल व यूक्रेन संगठन सेंटर फॉर लिबर्टीज़ शामिल हैं। 

प्रभात खबर ने सूचना दी है: 6000 शारीरिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया अगले माह से।

जागरण की दूसरी सबसे बड़ी खबर की हेडलाइन है: मतांतरित दलितों को एससी दर्जा देने पर अध्ययन करेगा आयोग। प्रभात खबर में भी यह खबर पहले पेज पर है जिसकी सुर्खी है: धर्म बदल चुके एससी वर्ग के लोगों को उसी वर्ग में दर्जा देने पर विचार को बना आयोग। 

अनछपी: धर्म बदलने पर शेड्यूल्ड कास्ट का दर्जा छीन ले जाने का मामला बहुत पुराना और गंभीर है। पूर्व चीफ जस्टिस केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता में गठित यह आयोग उन लोगों को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने पर विचार करेगा, जिनका ऐतिहासिक रूप से अनुसूचित जाति से ताल्लुक है लेकिन उन्होंने दूसरा धर्म अपना लिया है। संविधान में कहा गया है कि हिंदू या सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, तीन सदस्यीय आयोग में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. रविंदर कुमार जैन और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सदस्य प्रोफेसर सुषमा यादव भी शामिल हैं।

उम्मीद की जानी चाहिए कि आयोग इस बात पर सहानुभूति पूर्वक विचार करेगा कि धर्म बदलने से एससी का दर्जा नहीं छीना जाना चाहिए। 

 

 

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