छ्पी-जनादेश: मोदी की शपथ कल शाम, शेयर घोटाले का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

बिहार लोक संवाद डॉट कॉम, पटना। एनडीए संसदीय दल का नेता चुने जाने और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सरकार बनाने का न्यौता मिलने के बाद रविवार को शाम सवा सात बजे नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद की तीसरी बार शपथ लेंगे। लोकसभा चुनाव के रिजल्ट के दिन शेयर बाजार में भारी गिरावट के मामले की जांच करने की एक अर्जी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है।

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर है: ताजपोशी की तैयारी पूरी। जागरण की पहली सुर्खी है: ना हम हारे थे, ना हम हारे हैं: मोदी। प्रभात खबर की पहली खबर है: मोदी कल तीसरी बार लेंगे पीएम पद की शपथ, कहा- ना हारे हैं, ना हारेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को एनडीए संसदीय दल के नेता नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री नियुक्त किया और उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। मोदी तीसरी बार पीएम बन रहे हैं। नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह नौ जून को राष्ट्रपति भवन में शाम 7:15 बजे होगा। इससे पहले एनडीए संसदीय दल की बैठक में सभी ने एक स्वर में मोदी को समर्थन का ऐलान किया। भाजपा को पूर्ण बहुमत न मिलने के बाद भी एनडीए पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने जा रहा है। मोदी के नेता चुने जाने के बाद भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में एनडीए दलों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति मुर्मु से मिला और उन्हें मोदी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के लिए समर्थन पत्र सौंपा। बाद में मोदी ने भी राष्ट्रपति से भेंट की।

नीतीश क्या बोले

हमारी पार्टी जदयू नरेंद्र मोदी को भारत के प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देती है। ये बहुत की खुशी की बात है कि दस साल से ये प्रधानमंत्री हैं और फिर प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। इन्होंने पूरे देश की सेवा की। मुझे पूरा भरोसा है कि जो भी कुछ काम बचा है, अगली बार ये सब पूरा कर देंगे। हमलोग पूरे तौर पर सबदिन इनके साथ रहेंगे। इनके नेतृत्व में सभी लोग काम करेंगे।” नीतीश ने विरोधियों पर भी जमकर निशाना साधा। बोले, “बिना किसी का नाम लिये कहा कि इस बार हम देखे हैं कि कुछ इधर-उधर जीत गया है। पर अगली बार ये सब हारेगा। हमको पूरा भरोसा है।”

शेयर घोटाले का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद शेयर मार्केट में गिरावट और इससे निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूबने की जांच कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। अर्जी में केंद्र और सेबी को पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश देने की मांग की गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी गुरुवार को शेयर बाजार में गिरावट से निवेशकों को हुए नुकसान की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग की थी।

लैंड फॉर जॉब केस: लालू तेजस्वी समेत 78 पर फाइनल चार्जशीट

भास्कर के अनुसार दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट में बहुचर्चित लैंड फॉर जॉब कैसे में शुक्रवार को सीबीआई ने फाइनल चार्जशीट दाखिल कर दी। इसमें लालू प्रसाद समेत 78 लोगों को आरोपी बनाया गया है। कुछ अधिकारी भी शामिल हैं। सीबीआई ने कहा है कि इस मामले में सक्षम प्राधिकार की मंजूरी का इंतजार है और 6 जुलाई तक मंजूरी मिल जाने की उम्मीद है। चार्जशीट पर 6 जुलाई को कोर्ट सुनवाई करेगा। लालू प्रसाद और तेजस्वी के अलावा राबड़ी देवी और मीसा भारती भी इस मामले में आरोपित हैं।

‘नीट’ का मामला हाई कोर्ट पहुंचा

जागरण के अनुसार मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2024 में अनियमिताओं का मामला दिल्ली और कोलकाता हाई कोर्ट पहुंच गया है। दोनों हाईकोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से जवाब मांगा है। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि उत्तर पुस्तिका में एक प्रश्न के दो उत्तर सहित थे। ऐसे में उन उम्मीदवारों को भी समान अंक दिए जाने चाहिए जिन्होंने प्रश्न का उत्तर नहीं दिया जैसा कि दो सही उत्तरों में से किसी एक का प्रयास करने वालों के लिए किया गया है। उधर, अब कांग्रेस व छात्र संगठनों ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पेपर लीक, धांधली और भ्रष्टाचार नीट सहित कई परीक्षाओं का अभिन्न अंग बन गया है।

दरभंगा कोर्ट में मैथिली में बहस

जागरण की विशेष खबर है कि दरभंगा व्यवहार न्यायालय में गुरुवार को पहली बार मैथिली भाषा में अधिवक्ताओं ने बहस की। बताया गया कि एक फौजदारी मामले के तीन अधिवक्ताओं ने अपने-अपने पक्षकारों की बात न्यायाधीश के समक्ष मैथिली में प्रस्तुत की। बहस की अनुमति न्यायिक दण्डाधिकारी राघव ने दी। इसके बाद तीनों अधिवक्ताओं ने मुकदमे से जुड़े तथ्यों को मैथिली भाषा में पेश किया।

चुनाव में खूब सक्रिय रहा आरएसएस

जागरण के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस ने अपने पंच प्रण में से एक नागरिक कर्तव्य के तहत लोकसभा चुनाव में मतदाता जागरण के तहत कोई कसर नहीं छोड़ी। चुनाव की घोषणा के पहले से लेकर अंतिम चरण की समाप्ति तक संघ के स्वयंसेवक और सभी समविचारी संगठनों के हजारों कार्यकर्ता वोट प्रतिशत बढ़ने से लेकर राष्ट्रवाद के नाम पर वह डालने के लिए लोगों को प्रेरित करते रहे। देश के अलग-अलग प्रति सहित झारखंड और बिहार में से लेकर हजारों छोटी वह बड़ी बैठकर शहर से लेकर गांव तक हुई। मतदाताओं को घरों से निकाल कर बूथ तक भी भेजा। झारखंड में तो पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में वोट प्रतिशत भी काम नहीं रहा।

कुछ और सुर्खियां

  • पंचायती राज में 15610 पदों पर होगी बहाली
  • मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन 1 जुलाई से
  • एक ही स्थान पर 5 वर्ष से जमीन राजस्व कर्मी बदले जाएंगे
  • नीतीश कुमार जनता दल यूनाइटेड के सभी तरह के फैसले के लिए अधिकृत
  • चिराग पासवान लोजपा संसदीय दल के नेता बने
  • झारखंड के मंत्री आलमगीर आलम के सभी विभाग छीने, दे सकते हैं इस्तीफा

अनछ्पी: बाइस साल पहले गुजरात के दंगों से चर्चा में आए वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी तीसरी बार भले ही तीसरी बार प्रधानमंत्री नियुक्त हो चुके हैं लेकिन कई लोगों का मानना है कि उन्हें जनादेश (मैनडेट) नहीं मिला है। ऐसे में यह बात समझने की है कि जनादेश और बहुमत (मैजोरिटी) में फर्क होता है। फिर भी नरेंद्र मोदी का यह कहना कि ‘ना हम हारे थे, ना हम हारे हैं’ किसी नैतिक अधिकार के तहत नहीं है। सच्चाई यह है कि भारतीय जनता पार्टी पिछली बार की जीती 303 सीटों में से 92 पर हारी है और यह बात नरेंद्र मोदी को स्वीकार करनी चाहिए। इसी वजह से बहुमत के लिए 272 सीटों से 32 सीटें पीछे रह गए नरेंद्र मोदी। नरेंद्र मोदी ने जनता का आदेश किस बात के लिए मांगा था? उन्होंने जनादेश देने के लिए कई बातें की थीं लेकिन एक बेहद चर्चित बात यह रही कि उन्होंने इस चुनाव में इस बात के लिए वोट मांगा कि मुसलमान को आरक्षण नहीं मिले। उन्होंने एससी- एसटी और ओबीसी का आरक्षण छीन कर मुसलमानों को देने का आरोप भी लगाया। उन्होंने 400 पार का नारा दिया और भारतीय जनता पार्टी के लिए अकेले 370 सीटें मांगीं। 370 सीट वास्तव में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की और ध्यान दिलाने का एक प्रतीक है। उन्होंने यह कहते हुए वोट मांगा कि उन्हें कुछ बड़े फैसले करने हैं। उन बड़े फ़ैसलों की कई बड़ी बातें तो हमें नहीं मालूम लेकिन एक बात यह जरूर थी कि वह यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना चाहते हैं। यूनिफॉर्म सिविल कोड भारतीय जनता पार्टी का एजेंडा रहा है और उसके मैनिफेस्टो में भी यह बात शामिल रहती है। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री होते हुए मुसलमान के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने की भरपूर कोशिश की। उन्होंने उन पार्टियों के खिलाफ भी मोर्चा खोला जिसे मुसलमानों की भलाई की बात के बारे में थोड़ी सी भी चर्चा की हो जिसमें उनके खास निशाने पर रही कांग्रेस। मगर इन सब के बावजूद हुआ क्या? उनकी सीटें घट गईं और इतनी घट गईं कि वह बहुमत से दूर रह गईं। अब सहयोगियों के साथ मिलकर वह सरकार जरूर बना लेंगे लेकिन मोदी ने जिन मुद्दों पर जनादेश मांगा था वह तो उन्हें नहीं मिल सका। यह बात योगेंद्र यादव जैसे कई लोग समझाने की कोशिश कर रहे हैं और आम आदमी के बीच भी इस पर चर्चा होनी चाहिए कि जनादेश नहीं मिलने के बावजूद बहुमत प्राप्त कर लेना अलग बात है, इकबाल और नैतिक अधिकार के साथ सरकार चलाना दूसरी बात है।

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