छ्पी-अनछ्पी: नीतीश को मिला पीएम बनने का ऑफर? मोदी 3.0 की शुरुआत आज से

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। क्या बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘इंडिया’ गठबंधन की ओर से प्रधानमंत्री पद का ऑफर मिला था? जदयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने ऐसा ही दावा किया है, जो सभी अखबारों में छपा है। नरेंद्र मोदी आज तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। मेडिकल दाखिला इम्तिहान ‘नीट’ में जिन परीक्षार्थियों को ग्रेस मार्क्स मिला था उसकी जांच के लिए कमेटी बनाई गई है।

भास्कर की सबसे बड़ी खबर है: जदयू का दावा- नीतीश को पीएम पद का ऑफर दिया, कांग्रेस बोली… ऐसा कुछ नहीं। एनडीए सरकार की शपथ के ठीक पहले जनता दल (यूनाइटेड) ने बड़ा राजनीतिक दावा किया। पार्टी के राजनीतिक सलाहकार केसी त्यागी ने कहा कि लोकसभा चुनाव के नतीजे के बाद इंडिया गठबंधन की तरफ से नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद का ऑफर मिला लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया। त्यागी शनिवार को दिल्ली में मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, “ऑफर देने वाले वही थे जिन्होंने नीतीश कुमार को इंडिया का संयोजक बनाने से इनकार किया था।” त्यागी ने ऑफर देने वाले नेताओं का नाम नहीं बताया। उधर कांग्रेस ने जदयू के इस दावे को खारिज किया। कहा कि यह बेकार बात है, बकवास है। कांग्रेस के वरीय नेता केसी वेणुगोपाल व जयराम रमेश ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है, हमें ऐसी कोई जानकारी नहीं है। जदयू के राज्यसभा सांसद संजय झा ने भी कहा कि उन्हें ऐसे किसी ऑफर की जानकारी नहीं है।

मोदी मंत्रिमंडल में बिहार को मिल सकते हैं कई मंत्री

हिन्दुस्तान के अनुसार रविवार को नरेन्द्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके साथ मंत्रियों का भी शपथग्रहण होगा। इसमें बिहार से भी कुछ सांसदों को मंत्री बनाया जा सकता है। इस बार भाजपा के अलावा एनडीए के घटक दल जदयू, लोजपा-आर और हम से भी मंत्री बनाए जाएंगे। राजनीतिक गलियारे में चल रही खबरों के अनुसार चूंकि बिहार में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए इस बार बिहार को अधिक तवज्जो मिलना तय है। बिहार से आधा दर्जन से अधिक मंत्री बनाए जा सकते हैं।

‘नीट’ के रिज़ल्ट में ग्रेस मार्क्स का मामला

जागरण की दूसरी सबसे बड़ी खबर है: नीट में गड़बड़ी के आरोपों को थामने उतरी सरकार। मेडिकल में दाखिले से जुड़ी परीक्षा नीट में गड़बड़ी के लग रहे आरोपों के तूल पकड़ने और उसे लेकर तेज हुई सियासत को थामने के लिए सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है। शिक्षा मंत्रालय और सूचना मंत्रालय के सचिवों के साथ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक ने शनिवार को पूरे मामले पर नए सिरे से स्थिति स्पष्ट की और कहा कि परीक्षा में कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई। उनके अनुसार विवाद सिर्फ 6 केन्द्रों के करीब 1600 परीक्षार्थियों को ग्रेस मार्क्स देने का है, जिन्हें वह ग्रेस मार्क्स परीक्षा में कम समय दिए जाने के एवज में दिए गए थे। ऐसे मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई गई है जो एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट देगी।

सोनिया बनीं कांग्रेस संसदीय दल की नेता

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को शनिवार को सर्वसम्मति से एक बार फिर से पार्टी संसदीय दल (सीपीसी) का अध्यक्ष चुना गया। संविधान सदन (पुरानी संसद) के केंद्रीय कक्ष में हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोनिया गांधी को सीपीसी प्रमुख नियुक्त करने का प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव का गौरव गोगोई, के सुधाकरन और तारिक अनवर ने समर्थन किया। 77 वर्षीय सोनिया फरवरी में राज्यसभा के लिए चुनी गई थीं।

टी 20 वर्ल्ड कप: आज भारत-पाक मुकाबला

प्रभात खबर के अनुसार टी 20 वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान की टीम जब रविवार को आमने-सामने होगी तब सभी की निगाहें न्यूयॉर्क के नसाउ काउंटी इंटरनेशनल स्टेडियम की ड्रॉप इन पिच पर होगी। 34 हज़ार दर्शक क्षमता वाले इस स्टेडियम की पिच लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है और रविवार को यहां भारत और पाकिस्तान की अग्निपरीक्षा होगी। अब तक इस स्टेडियम पर हुए तीन मैच खेले जा चुके हैं और सिर्फ एक बार ही कोई टीम 100 रन बना सकी है। टी 20 वर्ल्ड कप के सात मैचों में भारत अब तक छह मैच जीत चुका है।

मीडिया हस्ती रामोजी राव नहीं रहे

मीडिया जगत की जानी मानी हस्ती और रामोजी समूह के अध्यक्ष रामोजी राव का शनिवार सुबह निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया। राव ने हैदराबाद के एक अस्पताल में सुबह पांच बजे अंतिम सांस ली। उन्हें सांस लेने में दिक्कत के चलते ही पांच जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

कुछ और सुर्खियां

  • मोदी के शपथ ग्रहण में श्रीलंका, मालदीव, बांग्लादेश, मॉरीशस, नेपाल और भूटान के प्रधान या प्रतिनिधि शामिल होंगे
  • मोदी के शपथ ग्रहण में शामिल होने पर न्योता मिलने पर विचार करेगी कांग्रेस, ममता बनर्जी नहीं होंगी शामिल
  • तेजस्वी के चेहरे पर विधानसभा चुनाव लड़ेगा इंडिया गठबंधन: कांग्रेस
  • मकई की खरीद शुरू, किसानों को मिलेंगे एक क्विंटल के लिए ₹2090
  • बिहार में 2578 शिक्षा सेवकों की भर्ती होगी
  • पूर्णिया, मुंगेर, नालंदा ओपन और बिहार एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी में होगी नए वीसी की बहाली, 28 तक आवेदन
  • मणिपुर में उग्रवादियों ने दो पुलिस चौकी और 70 से अधिक मकान जला डाले
  • बिहार में सबसे अधिक तापमान 45.23 डिग्री बक्सर में दर्ज किया गया, पटना में 43 डिग्री

अनछपी: प्राइवेट स्कूलों के बारे में अक्सर यह आलोचना होती है कि वह बहुत अधिक फीस लेते हैं और भी कई तरह के ऐसे शुल्क लेते हैं जिससे पढ़ाई का खर्च बहुत बढ़ जाता है। प्राइवेट स्कूलों के बारे में एक सरकारी नियम यह है कि इनमें 25 फ़ीसद वैसे बच्चों का एडमिशन लिया जाएगा जो कमजोर वर्ग के हैं। इन कमजोर वर्ग के बच्चों की फीस सरकार अदा करेगी। लेकिन इस बात की चर्चा नहीं होती कि सरकार ने लंबे समय से यह फीस प्राइवेट स्कूलों को नहीं दी है। क्योंकि पटना में बड़ी संख्या में प्राइवेट स्कूल है इसलिए यहां से ऐसी शिकायत सामने आई है। बिहार पब्लिक स्कूल एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि सरकार की नीति ठीक नहीं है। संगठन ने इसके लिए विभाग के अधिकारियों से मिलकर पत्र दिया लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पटना जिले में वर्ष 2013 से अनुदान नहीं मिला है। अनुदान की यह राशि लगभग 20 लाख रुपए है जो प्राइवेट स्कूलों के लिए तो जरूरी है लेकिन सरकार के लिए बहुत बड़ी रकम नहीं मानी जा सकती। पटना में 856 प्राइवेट स्कूल रजिस्टर्ड हैं। पटना के डीईओ का कहना है कि उन्हें लगभग 11000 रुपए प्रति बच्चों के हिसाब से सालाना अनुदान दिया जाएगा। लेकिन उनका यह कहना है कि जब निजी स्कूलों से ऐसे बच्चों का आंकड़ा मांगा जाता है तो वह सही-सही आंकड़ा नहीं देते हैं। जाहिर है यह सिर्फ पटना जिले की समस्या नहीं बल्कि पूरे बिहार में लगभग यही हाल है। ऐसे में प्राइवेट स्कूल अगर इन 25% सीटों पर एडमिशन नहीं लेते हैं या आनाकानी करते हैं तो इसका कारण समझ में आने वाला है। प्रशासन की ओर से कई बार यह बात कही जाती है कि प्राइवेट स्कूल एडमिशन लेने में अनियमितता करते हैं लेकिन उसके पास इस बात का कोई जवाब नहीं होता कि आखिर उसने इतने लंबे समय से अनुदान क्यों नहीं दिया है। इस आनाकानी का सबसे बड़ा नुकसान तो उन कमजोर वर्ग के छात्रों को ही होता है जो इन प्राइवेट स्कूलों में नाम लिखाकर अच्छे से पढ़ सकते थे। सरकार को प्राइवेट स्कूलों की यह बात ध्यान से सुननी चाहिए और प्राइवेट स्कूलों को भी अपना आंकड़ा सही तरीके से भेजना चाहिए। प्राइवेट स्कूलों को अगर अनुदान नहीं मिलता तो फिर वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

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