छपी-अनछपीः महराष्ट्र में शिव सेना या शिंदे सेना, उच्च शिक्षा को लेकर भाजपा-जदयू में भिड़ंत

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना। महाराष्ट्र में तीन दलों- शिव सेना, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस की सरकार गिराने का महाखेल जारी है। शिव सेना के बागी एकनाथ शिंदे के साथ कितने शिव सेना विधायक हैं, इसके बारे में अलग-अलग राय है। टाइम्स आॅफ इंडिया में इसे 42 तो प्रभात खबर में 49 बताया गया है। सारा खेल इस बात पर टिका हुआ है कि शिव सेना महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार से अलग होती है या नहीं।
शिव सेना के नेता संजय राउत तो कह रह हैं कि महाराष्ट्र विकास अघाड़ी से पार्टी अलग हो जाएगी मगर पहले जो विधायक गुजरात से होते हुए असम में बने हुए हैं, वे मुंबई तो लौटें। एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवान का कहना है कि बहुमत का फैसला विधानसभा में होना है, असम में नहीं। कांग्रेस के महारष्ट्र अध्यक्ष नाना पातोले अब भी कह रहे हैं कि उन्हें उम्मीद है कि मामला सुलझा लिया जाएगा।
’हिन्दुस्तान’ की सुर्खी हैः शिंदे सेना और मजबूत, ठाकरे का प्रस्ताव नकारा। जागरण ने लिखा हैः बगावत थामने में जुटी शिव सेना। भास्कर ने खबर दी है कि बागी गुट के नेता को डिप्टी सीएम, 12 मंत्री पद व केन्द्रीय मंत्री की कुसी भी संभव। यानी अब लगभग माना लिया गया है कि महाराष्ट्र में भाजपा सरकार बनाएगी और बदले में शिंदे को डिप्टी सीएम बनाया जाएगा। लेकिन अभी विधानसभा में बहुमत साबित होने तक उठापटक जारी रहने की संभावना है।
भास्कर की सबसे अहम खबर हैः आशियाना-दीघा रोड के पश्चिम 20 एकड़ जमीन पर बने 70 पक्के मकान तोड़े जाएंगे।
इसी अखबार ने खगड़िया की एक खबर प्रमुखता से छापी है जिसमें बताया गया है कि वहां गैंगरेप की शिकार महिला से 75 हजार रुपये में पंचायती कराने की कोशिश की गयी मगर महिला नहीं मानी और उसने थाने में इंसाफ की गुहार लगायी है। इस पंचायती में एक आरोपी पर 50 हजार और दूसरे पर 25 हजार का जुर्माना लगाया गया था।
अनछपीः बिहार में विश्वविद्यालयों की शिक्षा की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि सरकार में शामिल दोनों प्रमुख दल भाजपा और जदयू इस मामले में एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। वैसे भी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बिहार सरकार से नाराज चल रहे हैं। गुरुवार को बेतिया में उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग जदयू के पास है इसलिए उसे यह ध्यान देना चाहिए कि उच्च शिक्षा में सत्र विलंब न हो। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रेजुएशन की पढ़ाई तीन साल में पूरी हो, इसके लिए काम करना चाहिए। इस हमले के जवाब में जदयू के प्रवक्त नीरज कुमार ने सवाल खड़ा किया कि वे यानी भाजपा अध्यक्ष कुलाधिपति पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्र ठीक करने का पूरा अधिकार कुलाधिपति के पास है, जो पदेन राज्यपाल होते हैंै। इस बहस से भी अगर बिहार में सत्र नियमित हो तो छात्रों का कुछ भला होगा वर्ना राजनैतिक बयानबाजी से आगे कुछ नहीं होगा। विपक्ष भी इस मामले में चुप्पी साधे है जबकि उसके पास इस मुद्दे पर काम करने का बढ़िया मौका है।

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