छपी-अनछपी: अति पिछड़ों का सर्वे शुरू, भारत मे हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा?

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। क्या भारत में 85% आबादी वाले हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा मिल सकता है? आजकल की बहस सुप्रीम कोर्ट में चल रही है जिसकी खबर जागरण ने प्रमुखता से छापी है। बिहार में नगर निकाय चुनाव के मद्देनजर राजनैतिक रूप से कमजोर वर्ग के निर्धारण के लिए सर्वे का काम शुरू हो गया है। इसकी खबर सभी अखबारों में प्रमुखता से छपी है। इसके अलावा डिजिटल करंसी की शुरुआत की खबर को भी काफी अहमियत मिली है।

अल्पसंख्यक विरोधी मुकदमों के लिए बदनाम भाजपा नेता अश्विनी कुमार की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा है कि अल्पसंख्यकों की पहचान का मामला गंभीर व दूरगामी परिणाम वाला है। इस याचिका में राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक पहचान की मांग की गई है। केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया है कि इस मामले में 14 राज्यों ने मत दिया है जबकि 19 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की अंतिम राय अभी नहीं आई है। हालांकि केंद्र ने यह नहीं बताया है कि जिनकी राय मिली है वह क्या है।

जागरण ने लिखा है कि यह मामला इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि कई राज्यों में कम आबादी होने के बावजूद हिंदुओं को अल्पसंख्यक दर्जा नहीं दिया गया है। राज्य स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान होने से यह स्थिति बदल जाएगी। यही नहीं जिला स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए भी दिशा निर्देश की मांग की गई है।

प्रभात खबर की सबसे बड़ी सुर्खी है अति पिछड़ों के आरक्षण को लेकर सर्वे शुरू, एक माह में पूरा होगा काम। नगर निकाय चुनाव के मद्देनजर नमूने के तौर पर वार्डों का आकलन किया जाएगा। कुल मिलाकर 51,000 परिवारों में जाकर 22,000 से अधिक बीएलओ अति पिछड़ी जातियों की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति की जानकारी जुटाएंगे। हिन्दुस्तान में यह दूसरी सबसे बड़ी खबर है जिसकी हेडलाइन है: ईबीसी का अध्ययन करेगा एएन सिन्हा संस्थान। एएन इंस्टिट्यूट इस काम में मॉनिटर की भूमिका निभा रहा है। इंस्टिट्यूट के समाज विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर बीएन प्रसाद इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर बनाए गए हैं। जागरण ने लिखा है: अति पिछड़ा वर्ग आयोग पूर्व पार्षदों से लेगा फीडबैक। 

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर है: नया युग देश में ई रुपया का आगाज। इस खबर में जानकारी दो गयी है कि देश में मंगलवार को डिजिटल करेंसी ई-रुपया की शुरुआत के साथ नए युग का आगाज हुआ। बजट में की गई घोषणा के अनुसार रिजर्व बैंक ने इस योजना का पायलट परीक्षण किया। पहले दिन कारोबारियों के लिए थोक खंड में 24 लेनदेन किए गए। डिजिटल करंसी का इस्तेमाल सरकारी बॉन्ड खरीदने में किया गया। इन सौदों की कीमत 2.75 अरब रुपये रही। रिजर्व बैंक के मुताबिक, केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) यानी ई-रुपया में पहले दिन हुए लेनदेन में सभी नौ बैंक जुड़े रहे। इस दौरान डिजिटल करेंसी तुरंत जारी करने के साथ-साथ उसी समय सौदा निपटान की प्रक्रिया जांची गई। सीबीडीसी में नकद देते ही इंटरबैंक सेटलमेंट की जरूरत नहीं रह जाएगी। इससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम की तुलना में लेनदेन रियल टाइम और कम लागत में होगा। 

जागरण की लीड है: नेता व अधिकारी न करें जांच में हस्तक्षेप। यह खबर गुजरात के मोरबी में पुल हादसे के बाद वहां पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर आधारित है। हिन्दुस्तान में यह खबर देश विदेश के पेज पर है जिसकी सुर्खी है: मोरबी हादसे की बारीकी से जांच हो: मोदी। इसके साथ ही नईम शेख और तौफीक नाम के दो लोगों की बहादुरी की भी चर्चा की गई है। नईम शेख ने दोस्तों के साथ मिलकर करीब 50 लोगों की जान बचाई हालांकि इस दौरान उनके एक दोस्त की मौत भी हो गई। इस हादसे में कुल 135 लोगों की मौत हुई है।

भास्कर की पहली खबर है: पानी का धंधा बिहार में 87% वाटर प्लांट बिना लाइसेंस के, अब होगी जांच। इसमें जानकारी दी गई है कि बिहार में 2800 प्लांट रोज़ 1.6 लाख लीटर पानी निकालते हैं। इनमें 96% वाटर प्लांट के पास लैब नहीं है और इनकी जांच भी नहीं होती। प्लांट स्थापित करने के लिए 1500 वर्गफीट जमीन होनी चाहिए। पानी का प्लांट लगाने के लिए 200 फिट तक बोरिंग जरूरी है, लेकिन अधिकांश जगहों पर बस 20 फिट चौड़ा 32 फिट लंबा कमरा में प्लांट स्थापित है।बोरिंग 100 फिट गहरा है।

हिन्दुस्तान ने पहले पेज पर जानकारी दी है कि बिहार में स्वास्थ्य विभाग के तहत संविदा पर बहाल आयुष (आयुर्वेद, होमियोपैथ व युनानी चिकित्सा) के डॉक्टरों का मासिक मानदेय 44 हजार रुपये से बढ़कर 66 हजार रुपये हो गया है। 

भास्कर की दूसरी सबसे बड़ी खबर है: बॉर्डर से सटे इलाकों में हर नागरिक का सर्वे होगा, शुरुआत राजस्थान। इसमें कहा गया है कि जनसंख्या असंतुलन बढ़ना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। अखबार लिखता है कि अगले साल राजस्थान में चुनाव हैं और वहाँ सांप्रदायिक घटनाएं बढ़ सकती हैं। साथ ही इसने दावा किया है कि 2011 की तुलना में नेपाल और बांग्लादेश सीमा से सटे क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी 32% तक बढ़ी।

अनछपी: सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और इसकी विचारधारा पर चलने वाले अखबार मुसलमानों की आबादी को लेकर तरह तरह का भ्रम फैलाने में लगे रहते हैं। भास्कर की आज की रिपोर्ट उसी का एक उदाहरण है। बॉर्डर पर सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामले को मुसलमानों की जनसंख्या से जोड़कर वास्तव में बेहद गलत संदेश दिया जा रहा है। बात करने 2011 के बाद से यानी लगभग 10-11 साल में मुसलमानों की उन इलाकों में 32% जनसंख्या वृद्धि की बात लिखी है लेकिन उसने यह नहीं बताया है कि यह आंकड़ा उसे कहां से मिला और इस दैरान हिंदुओं की आबादी कितनी बढ़ी है। अखबार यह संदेश देना चाहता है कि मुसलमानों की आबादी बढ़ने का मतलब देश की सुरक्षा को खतरा है। यह खतरनाक रवैया है जिसका विरोध जरूरी है। अखबार ने जिस तरह राजस्थान के चुनाव से जोड़कर इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की है वह भी कम चिंतनीय नहीं है।

 

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