छपी-अनछपी: क्या फिर टलेगा नगर निकाय चुनाव? गुजरात चुनाव में रावण के बाद राम की चर्चा

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना।  बिहार में नगर निकाय चुनाव की तारीख दोबारा घोषित कर तो दी गई है लेकिन यह मामला अदालतों में ऐसा उलझा है कि अब यह सवाल हो रहा है कि क्या नगर निकाय चुनाव फिर टलेगा। इसका अंदाजा प्रभात खबर की सूचना से होता है कि इस मामले की सुनवाई अब 6 दिसंबर को होगी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ईबीसी के फुल फॉर्म को लेकर सुधार किया है। पहले ईबीसी का मतलब इकोनॉमिकली बैकवर्ड क्लास कमीशन लिखा गया था लेकिन अब इसे एक्सट्रीमली बैकवर्ड क्लास कमीशन किया गया है। गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान हो चुका है और यहां भाषणों में रावण के बाद राम की चर्चा भी शुरू हो गई है। आज के अखबारों में अलग-अलग खबरों को सबसे बड़ी सुर्खी दी गई है।
प्रभात खबर की पहली खबर है: सरकार ने कोर्ट को दी चुनाव कार्यक्रम की जानकारी, अब छह को होगी सुनवाई। अखबार लिखता है कि राज्य के 224 नगर निकायों का चुनाव दो चरणों में कराए जाने के लिए आदेश जारी किए जाने के बावजूद अभी कई पेच दूर होना बाकी है। पटना हाईकोर्ट में 6 दिसंबर को इससे संबंधित महत्वपूर्ण याचिकाओं पर सुनवाई होगी। उसी दिन सरकार की ओर से ईबीसी आयोग की रिपोर्ट की जानकारी दी जा सकती है।
भास्कर की सुर्खी है: सुप्रीम कोर्ट ने टाइपिंग एरर सुधारा, कहा- एक्सट्रीमली बैकवर्ड क्लास कमीशन को समर्पित आयोग के रूप में अधिसूचित न करें।

जल स्रोतों से कब्जा हटाएं: हाईकोर्ट
अदालत की ही एक और आदेश हिन्दुस्तान की पहली खबर है: 14 जिलों के जल स्रोतों से कब्जा हटाएं: हाईकोर्ट।
गुरुवार को उच्च न्यायालय के निर्देश पर पटना, मगध और सारण प्रमंडल के 212 सीओ कोर्ट में उपस्थित हुए। कोर्ट ने तीनों प्रमंडलों के 14 जिलों के सीओ को निर्देश दिया कि चार सप्ताह में जलाशयों से अतिक्रमण हटा दें। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल तथा न्यायमूर्ति पार्थसारथी की खंडपीठ ने सुनवाई की। इससे पहले सभी 14 जिलों के सीओ ने बारी-बारी से अपने क्षेत्र में पड़ने वाले जलाशय तथा उस पर किए गए अतिक्रमण के बारे में पूरी जानकारी दी।

भारत का जी- 20 एजेंडा 
जागरण की पहली सुर्खी है: भारत का जी- 20 एजेंडा समावेशी, महत्वकांक्षी और निर्णायक: मोदी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बात भारत द्वारा जी 20 समूह की कमान संभालने के बाद कही है। इधर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत में बेहद महत्वपूर्ण समय में इस संगठन की अध्यक्षता संभाली है।

फिल्म निर्माण को सिंगल विंडो सिस्टम
भास्कर की पहली खबर है: फिल्म निर्माण को सिंगल विंडो सिस्टम, सब्सिडी भी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कही है। उन्होंने कहा है कि बिहार में फिल्म निर्माण के लिए सरल प्रक्रिया बने और बेहतर सुविधा मिले ताकि निर्माता यहां आएं। उन्होंने बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति में लोक कलाकारों को प्राथमिकता देने की बात कही और राजगीर में फिल्म सिटी के निर्माण को जल्द पूरा करने को कहा।
हिन्दुस्तान ने लिखा है: मुख्यमंत्री ने गुरुवार को एक अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ में कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के अंतर्गत बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के कार्यों एवं बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति का प्रस्तुतीकरण देखा और कई दिशा-निर्देश पदाधिकारियों को दिये।

गुजरात चुनाव में राम-रावण
हिन्दुस्तान की दूसरी सबसे बड़ी खबर है: राम को न मानने वाले रावण ले आए। अखबार के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ‘रावण’ वाली टिप्पणी पर गुरुवार को पलटवार किया। गुजरात के कलोल में चुनाव प्रचार के दौरान मोदी ने कहा कि जिन्होंने भगवान राम के अस्तित्व पर कभी यकीन नहीं किया वे सिर्फ मुझे अपशब्द कहने के लिए रामायण के ‘रावण’ को लेकर आए हैं। जागरण ने श्री मोदी के इस बयान को सुर्खी दी है: कांग्रेस नेताओं में मुझे गाली देने की होड़। इस बीच गुजरात विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में 60 फ़ीसदी मतदान होने की सूचना दी गई है।

अब चेहरा ही होगा बोर्डिंग पास
हवाई यात्रा से जुड़ी एक खबर सभी अखबारों में है। हिन्दुस्तान में हेडिंग है: हवाई अड्डे पर अब चेहरा ही होगा बोर्डिंग पास। जागरण ने लिखा है: डिजियात्रा में चेहरा होगा बोर्डिंग पास, कागजात से छुटकारा। भास्कर की हेडिंग है: डिजियात्रा आईडी से एयरपोर्ट पर आपका आधा वक्त बचेगा, कैमरे से पहचान यात्रियों की जानकारी 24 घंटे में डिलीट कर दी जाएगी। प्रभात खबर ने लिखा है: नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को डिजियात्रा सुविधा की शुरुआत की। इसके तहत अब आप बोर्डिंग पास के बिना भी एयरपोर्ट से यात्रा कर सकेंगे। इसके लिए डिजियात्रा एप को गूगल प्ले स्टोर या एप्पल एप स्टोर से डाउनलोड कर रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

शिक्षक नियोजन नियमावली में बड़े बदलाव
प्रभात खबर की दूसरी सबसे बड़ी खबर है: आवेदन मांगा जाएगा ऑनलाइन, पंचायतों की भूमिका होगी सीमित। इसमें बताया गया है कि बिहार में शिक्षक नियोजन नियमावली में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है जिसके लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव भेजा जाएगा। सातवें चरण की शिक्षक बहाली में नई नियमावली लागू होगी।

39 साल बाद दो बुजुर्गों को आजीवन कारावास
जागरण में औरंगाबाद से यह खबर है: 39 साल बाद 88 और 75 साल के दो बुजुर्गों को आजीवन कारावास। इसमें बताया गया है कि औरंगाबाद सिविल कोर्ट के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश 12 धनंजय कुमार मिश्र की अदालत ने गुरुवार को 39 वर्ष पहले मदनपुर थाना क्षेत्र के सरैया गांव निवासी जयराम सिंह की हत्या के मामले में दो बुजुर्गों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर लोक अभियोजक बबन प्रसाद ने बताया कि 7 अभियुक्त बनाए गए थे जिनमें 5 की मौत हो चुकी है। बचे हुए दोनों को 23 नवंबर को दोषी करार दिया गया था। इस हत्या की एफआईआर सरैया गांव निवासी सुदर्शन सिंह ने 6 दिसंबर 1982 को कराई थी।

शराब की बोतलों से महिलाओं ने बनायीं चूड़ियां
प्रभात खबर ने शराबबंदी से उपजी यह अच्छी खबर दी है: दो टन शराब की बोतलों से महिलाओं ने बनायीं 70 हज़ार चूड़ियां। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के सबलपुर गांव में जीविका चूड़ी निर्माण केंद्र का 26 नवंबर को उद्घाटन किया था जहां चूड़ी बनाने का काम सितंबर में ही शुरू हो गया था। इसकी स्थापना मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से की गई है। इस कारखाने में प्रतिदिन लगभग 80 हज़ार चूड़ियों के निर्माण की क्षमता है। इससे 150 जीविका दीदियों को रोजगार मिला है।
अनछपी: अदालतें इंसाफ देने के लिए होती हैं लेकिन वहां मिलने वाली तारीख पे तारीख से जो स्थिति पैदा होती है वह सभी के लिए तकलीफ देने वाली है। औरंगाबाद में हत्या के एक मामले का फैसला 39 साल बाद होना ऐसे ही एक मिसाल है। ऐसे इंसाफ का क्या किया जाए जिसमें 7 अभियुक्तों में से 5 की मौत फैसला आने से पहले हो जाती है और जिन दो लोगों को सजा सुनाई जाती है! उनकी उम्र भी ऐसी है जब उन्हें जेल भेजना भी नाइंसाफी लग सकती है। 88 और 75 साल के बुजुर्ग को जेल भेजना कई लोगों को सही नहीं लगेगा। वैसे भी उनके पास अभी ऊपरी अदालतों में जाने का मौका बाकी है हालांकि इस दौरान उन्हें जेल की जिंदगी गुजारनी होगी। एक तरफ अदालतों से मुकदमों का भार कम करने की बात की जाती है तो दूसरी तरफ मुकदमों के फैसले आने में इतनी देरी होती है। ऐसे में हमें सोचना पड़ता है कि हमें सही वक्त पर इंसाफ दिलाने के लिए और क्या करना चाहिए।

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