जब आपस में ही लड़ गए यतीमख़ाना के ‘‘हितैषी’’

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट पटना

पटना के सौ साल साल पुराने और ऐतिहासिक यतीमख़ाना अंजुमन ख़ादिमुल इस्लाम के अच्छे दिन कब आएंगे, इसकी कोई गारंटनी नहीं। पिछले दो साल से बुरे दिन देख रहे कश्मीरी कोठी स्थित इस यतीमख़ाना को पटरी पर लाने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन सब बेनतीजा रहीं। रविवार को यतीमख़ाना कौंसिल की हुई मीटिंग भी कोई ठोस फ़ैसला किए बिना स्थित हो गई। कौंसिल के कुल पचास सदस्य हैं जिनमें से 33 ही हाज़िर हुए। जो हाज़िर हुए भी उनमें से कई आपस में ही लड़ गए।
मीटिंग हुई थी 11 सदस्यीय कार्यकारिणी सभा के गठन के लिए लेकिन कौंसिल के मौजूदा सदस्यों को निकालने और नये सदस्यों को शामिल करने के मुद्दे पर ही सारा वक़्त ज़ाया हो गया। अब 4 अप्रील को एक बार फिर कौंसिल की मीटिंग होगी, जिसमें निर्धारित 50 सदस्यों की संख्या को पूरा किया जाएगा। इस बारे में मौजूदा कौंसिल सदस्य अली इमाम भारती ने बिहार लोक संवाद डाॅट नेट से कहा कि अब जल्द ही सक कुछ ठीक-ठाक हो जाएगा।
मीटिंग के दौरान ही अंजुमन द्वारा संचालित इंटर काॅलेज और स्कूल की बदहाली की चर्चा हुई। टीचरों ने कहा कि प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए सही से क्लासरूम नहीं है, जबकि हाई स्कूल के बच्चों के क्लासरूम में पंखा नहीं है। उर्दू टीचर नाज़िया और हिन्दी टीचर शमा ने बताया कि पिछले दो साल के दौरान कई टीचरों को निकाल दिया गया है जबकि जो पांच-छह टीचर बचे हैं, उन्हें चार-महीने से तंख़्वाह नहीं मिली है।
यतीमख़ाना अंजुमन ख़ादिमुल इस्लाम को चलाने के लिए दो साल के दौरान तीन कमिटियां बन चुकी हैं और सभी अपने-आप को अंजुमन का हितैषी मानती हैं। लेकिन हालात हैं कि दिन पर दिन ख़राब ही होते जा रहे हैं। अब देखना है, 4 अप्रील के बाद क्या होता है।
कैमरापर्सन शीश अहमद के साथ सैयद जावेद हसन बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना।

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