छ्पी-अनछपी: तेजस्वी का दावा- 20 साल में बिहार में 60 हजार हत्याएं, नागपुर में तनाव-हिंसा

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि पिछले 20 सालों में बिहार में 60 हजार हत्याएं हुई हैं। नागपुर में औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग कर रहे दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों के प्रदर्शन के दौरान कुरान की आयत जलाने की अफवाह के बाद हिंसा हुई है। वक़्फ़ संशोधन बिल के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर जबर्दस्त प्रदर्शन किया गया। बिहार में कब्रिस्तानों की घेराबंदी के मुद्दे पर विपक्ष ने वॉकआउट किया।

और जानिएगा कि देश के 4902 विधायकों में 45% पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

भास्कर के अनुसार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को विधानसभा परिसर में सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए के 20 वर्षों के राज में सूबे में 60000 से अधिक हत्याएं और 25000 से अधिक दुष्कर्म की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए के राज में सबसे अधिक पुलिस वालों की हत्या हुई है। सरकार इस मुद्दे पर सदन में चर्चा नहीं कर रही है क्योंकि उसके पास कोई जवाब नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में अररिया, भोजपुर और मुंगेर में हत्या की घटनाएं हुई हैं। भागलपुर, नवादा, पटना, मधुबनी और समस्तीपुर में पुलिस टीम पर जानलेवा हमला किया गया।

अपराधी बख्शे नहीं जाएंगे: नीतीश

बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दो टूक कहा है कि अपराधी कोई भी हो उसे बख्शा नहीं जाएगा। प्रभात खबर की सबसे बड़ी खबर के अनुसार उन्होंने पुलिस के वरीय अधिकारियों से कहा कि अपराध नियंत्रण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सोमवार को उन्होंने मुख्य सचिव अमृतलाल मीणा और डीजीपी विनय कुमार के साथ विधि व्यवस्था की उच्च स्तरीय समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वरीय पुलिस अधिकारियों से कहा कि अपराध के कारणों की पूरी तहकीकात कर दोषियों की पहचान करें और बिना किसी भेदभाव के उन पर सख्त कार्रवाई करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि आपराधिक घटनाओं के पीछे कोई साजिश है तो उसकी भी जांच की जाए।

नागपुर में हिंसा, तनाव

हिन्दुस्तान के अनुसार औरंगजेब की कब्र को हटाने के लिए सोमवार दोपहर दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा किए गए आंदोलन के दौरान धार्मिक ग्रंथ को जलाने की अफवाह के बाद नागपुर में तनाव फैल गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में चार लोग घायल हो गए। पुलिस ने चिटनिस पार्क और महल इलाकों में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागने के साथ ही लाठीचार्ज किया। बजरंग दल के सदस्यों द्वारा महल इलाके में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के पास प्रदर्शन के तुरंत बाद यह उपद्रव शुरू हुआ। हालांकि, बजरंग दल ने कहा कि उसने औरंगजेब का पुतला जलाया।

औरंगजेब के मकबरे की रक्षा होगी: फडणवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि सरकार औरंगजेब के मकबरे की रक्षा करने के लिए बाध्य है, क्योंकि वह एक संरक्षित स्थल है। वहीं कहा कि सरकार किसी को औरंगजेब की विरासत का महिमामंडन करने के प्रयासों की अनुमति नहीं देगी।

वक़्फ़ संशोधन बिल के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन

वक़्फ़ संशोधन बिल के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोमवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया। इसमें विपक्षी दलों के सांसद भी जुटे। इस दौरान एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जेडीयू, टीडीपी और लोजपा को चेतावनी दी कि अगर यह दल बिल का समर्थन करते हैं तो मुसलमान उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।

कब्रिस्तान की घेराबंदी के मुद्दे पर विपक्ष का वॉकआउट

जागरण के अनुसार बिहार में कब्रिस्तान की घेराबंदी के आए सवालों पर सरकार के जवाब से खफा विपक्ष के विधायकों ने विधानसभा में खूब हंगामा किया। बोधगया के विधायक कुमार कुमार सर्वजीत ने गया जिले के फतेहपुर प्रखंड स्थित बगई गांव में कब्रिस्तान की घेराबंदी का विषय उठाया था। उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान की चहारदिवारी नहीं होने के कारण यह कब्रिस्तान अतिक्रमण और आवारा पशुओं की चरागाह बनते जा रहा है। इस पर सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि जिलाधिकारी और एसपी की कमेटी यह तय करती है कि कौन से कब्रिस्तान की घेराबंदी होगी। सिकटा के विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने भी कब्रिस्तान की घेराबंदी का विषय उठाया। अवध बिहारी चौधरी ने भी कब्रिस्तान की घेराबंदी का मामला उठाया। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने विधानसभा से वॉकआउट किया।

वॉयस ऑफ अमेरिका बंद करने का आदेश

हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सरकारी वित्तपोषित समाचार एजेंसी ‘वॉयस ऑफ अमेरिका’ को बंद करने का आदेश दिया है। मीडिया रिपोर्ट में ट्रंप के हवाले से बताया गया, यह एजेंसी पक्षपातपूर्ण मीडिया रिपोर्ट को बढ़ावा दे रही है। वॉयस ऑफ अमेरिका कई वर्षों से अमेरिका के साथ तालमेल बिठाने में विफल रहा है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने फॉक्स न्यूज डिजिटल को बताया।

लगभग आधे विधायकों पर क्रिमिनल केस

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के विश्लेषण के अनुसार, देश भर में 4,092 विधायकों में से कम से कम 45 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। एडीआर ने 28 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के 4,123 विधायकों में से 4,092 के हलफनामों का विश्लेषण किया। 24 विधायकों के हलफनामों का विश्लेषण नहीं किया जा सका क्योंकि वे खराब तरीके से स्कैन किए गए थे या पढ़ने योग्य नहीं थे। विधानसभा में सात सीटें खाली हैं। एडीआर के अनुसार अन्य राज्य जहां के विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, उनमें बिहार (66 प्रतिशत), महाराष्ट्र (65 प्रतिशत) और तमिलनाडु (59 प्रतिशत) शामिल हैं। आंध्र प्रदेश 98 (56 प्रतिशत) के साथ, गंभीर आपराधिक मामले घोषित करने वाले विधायकों की सूची में भी शीर्ष पर है।

कुछ और सुर्खियां:

  • जमशेदपुर के पास जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के गितिलिपि गांव में पुआल में आग लगने से चार बच्चे जिंदा जले
  • बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी नैयर हसनैन खान केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से जल्द लौटेंगे
  • बिहार में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर विधानमंडल के अंदर और बाहर विपक्ष का प्रदर्शन
  • सिपाही भर्ती के 19838 पदों के लिए आज से शुरू हो रहा है आवेदन
  • मौसम का मिजाज बदला, गोपालगंज में गिरे ओले-बारिश हुई, मधुबनी, गया और औरंगाबाद में भी बूंदाबांदी
  • पटना और रांची समेत देश के 25 और हवाई अड्डों को पट्टे पर दिया जाएगा

अनछपी: बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार में पिछले 20 सालों में 60 हजार हत्याओं का दावा किया और दिल्ली के जंतर मंतर पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने वक़्फ़ संशोधन बिल के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन किया लेकिन इन दोनों खबरों को पटना से छपे आज के हिंदी अखबारों में ढूंढना मुश्किल है। दो अखबारों ने तो तेजस्वी के बयान से 60 हजार हत्या वाली बात को गायब कर दिया है और बाकी जिन दो अखबारों ने यह संख्या दी है वहां भी सुर्खियां नहीं बन सकी है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कानून व्यवस्था की समीक्षा के लिए जो बैठक बुलाई उसमें दिए गए निर्देश को सभी अखबारों ने पहले पन्ने पर बड़ी सुर्खियों के साथ छापा है। ऐसे में यह सवाल है कि क्या निष्पक्ष मीडिया को तेजस्वी यादव के बयान को भी सही तरीके से नहीं छापना चाहिए था? तेजस्वी ने अपने बयान में हत्या और रेप की जितनी घटनाओं के बारे में दावा किया था, उसके लिए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का हवाला दिया था। यह सवाल गौर करने का है कि आखिर हत्या और रेप की संख्या को तेजस्वी के बयान से क्यों और किसके कहने पर गायब किया गया? आज के अखबारों की दूसरी हैरत में डालने वाली बात यह रही कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के दिल्ली के जंतर मंतर पर वक़्फ़ संशोधन बिल के खिलाफ दिए गए धरने की खबर को पूरी तरह अंडरप्ले किया गया। अखबारों ने या तो इस खबर को पूरी तरह गायब कर दिया या ऐसी जगह छापा जहां नजर कम जाए। हैरत इस बात पर भी है कि इस खबर पर पूरे देश की नजर थी और एजेंसी के अलावा अखबारों का अपना दफ्तर भी दिल्ली में ही है। क्या केंद्र की मोदी सरकार यह नहीं चाहती थी कि इस धरने की खबर को पूरा देश जाने? तो क्या अखबारों के संपादकों ने मोदी सरकार की इच्छा के अनुसार ही इस खबर को दबा दिया या उनकी समझ इतनी कमजोर है कि इतनी बड़ी खबर को भी सही जगह नहीं दी? मीडिया के बारे में ऐसे सवाल बराबर उठाए जाने चाहिए।

 635 total views

Share Now