छ्पी-अनछपी: टिकट बंटवारे पर दोनों तरफ घमासान, ट्रंप के खिलाफ 70 लाख लोग सड़क पर
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। सीट बंटवारे में बढ़त लेने का दावा करने वाले एनडीए में भी टिकट बंटवारे को लेकर घमासान मचा है और उसकी स्थिति भी महागठबंधन की तरह हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ जो नो किंग्स आंदोलन से अमेरिका हिल गया है। आधार कार्ड में पता बदलवाने के लिए आवासीय प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को खत्म किया जाएगा।
और, जानिएगा कि दीपावली पर ऑनलाइन खरीदारी में छोटे शहरों ने महानगरों को कैसे पिछड़।
पहली ख़बर
भास्कर ने लिखा है कि वोटिंग के लिए कुछ ही दिन बचे हैं लेकिन शायद ही कोई दल बचा हो, जिस पर टिकट बेचने का आरोप न लगा हो। इस आरोप से कांग्रेस, राजद और जदयू सबसे ज्यादा चोटिल हैं। भाजपा थोड़ी कम। भाजपा बगावत रोकने में काफी हद तक सफल रही है, पर पूरी तरह नहीं। टिकट कटने या नहीं मिलने का बहुत गुस्सा भाजपा और जदयू दोनों में है। कई क्षेत्रों में ‘विद्रोह’ है। भाजपा तो अपना घर संभालने में कामयाब रही है। मगर जदयू लगातार छितरा रहा है। भाजपा में केंद्रीय मंत्री अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान, विनोद तावड़े, नित्यानंद राय अपनों को समझा रहे हैं। किंतु जदयू में ऐसी कोई पहल नहीं है। जदयू के नेता धड़ाधड़ पार्टी छोड़ रहे हैं। इनमें कई मंत्री, विधायक, सांसद रहे नेता हैं। पार्टी के बड़े पदधारक भी हैं। कई तो ऐसे हैं, जो शुरू से नीतीश कुमार के साथ रहे। पार्टी छोड़ने वालों की तादाद अभी और बढ़ेगी। पूर्व विधायक शर्फुद्दीन बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर लड़ेंगे और राणा रणधीर सिंह चौहान भी बसपा का टिकट ले चुके हैं। औरंगाबाद जिला अध्यक्ष अशोक सिंह ने पार्टी छोड़ विद्रोह कर दिया है। विधायक गोपाल मंडल और सुदर्शन कुमार भी इसी मोड में है। मंत्री रहे जयकुमार सिंह और पूर्व एमएलसी संजीव श्याम सिंह व सत्यदेव सिंह ने पार्टी छोड़ दी है। शैलेश कुमार अलग हुए हैं। सांसद अजय मंडल ने स्थिति की पेशकश की थी।
चार बार के विधायक बोले- भाजपा अटल वाली नहीं
मुजफ्फरपुर की पारू सीट से भाजपा को चार बार जीत दिला चुके अशोक सिंह इस बार बागी बन निर्दलीय मैदान में है। वर्ष 2005 से 2020 तक पारू से विधायक रहे अशोक की राजनीतिक सक्रियता और जनता में गहरी पैठ ने इस सीट पर राजद और कांग्रेस को कभी जीत नहीं दिलाई। भाजपा के सबसे प्रबल दावेदार माने जाने वाले अशोक इस बार एनडीए गठबंधन में सीट कटने और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के खाते में जाने के कारण बागी बन गए हैं। नामांकन के समय उन्होंने कहा, अब अटल-आडवाणी वाली भाजपा नहीं है।
महागठबंधन में बातचीत नहीं, भ्रम की स्थिति
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार में बदलाव का दावा करने वाले विपक्षी महागठबंधन के घटक दलों में तल्खी बढ़ गई है। सीटों के बंटवारे पर फंसी पेच सुलझ नहीं पा रही है। अब तो इस मसले पर बातचीत भी बंद है। गठबंधन के घटक दलों में पूरी तरह संवादहीनता की स्थिति है।अब भी 10 सीटें ऐसी हैं जहां इस गठबंधन के दो-दो दल ताल ठोक रहे हैं। आमने-सामने की लड़ाई पर आमदा हैं। ऐसे में कटुता भी बढ़ रही है। गौर हो कि पहले चरण का नामांकन समाप्त हो चुका है। आज दूसरे चरण का भी नामांकन समाप्त हो रहा है। लेकिन, महागठबंधन अबतक यह भी घोषित नहीं कर सका है कि किस दल को कितनी और कौन-कौन सी सीटें दी गई हैं। हाल यह है कि छह सीटों पर राजद- कांग्रेस, तीन पर भाकपा-कांग्रेस, एक सीट पर राजद-वीआईपी आमने-सामने है।
चुनाव बुलेटिन:
- जेडीयू ने अमौर से दूसरी बार बदला अपना उम्मीदवार, साबिर अली की जगह सबा ज़फ़र ही लड़ेंगे चुनाव
- एआईएमआईएम की पहली लिस्ट में 25 उम्मीदवार, अख्तरुल ईमान अमौर से ही लड़ेंगे
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार का चुनावी दौरा 24 अक्टूबर से शुरू करेंगे, 15 दिन में 6 बार प्रचार के लिए आएंगे
- बछवाड़ा, बिहार शरीफ, राजापाकर और करहगर में महागठबंधन के दो दल कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में फ्रेंडली फाइट
- पहले चरण में 61 सीटों पर ज्यादा उम्मीदवार रहने की वजह से दो बैलेट यूनिट लगेंगी
- पूर्णिया जिले की कस्बा सीट से कांग्रेस के विधायक आफाक आलम ने टिकट कटने के बाद कांग्रेस नेतृत्व पर लगाए गंभीर आरोप
राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ 70 लाख लोग सड़क पर
हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिका में शनिवार को 2,700 शहरों और कस्बों में 70 लाख लोग राष्ट्रव्यापी ‘नो किंग्स’ विरोध प्रदर्शनों में सड़कों पर उतर आए। यह अमेरिकी इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा एकदिवसीय विरोध प्रदर्शन था। न्यूयॉर्क शहर में एक लाख से ज्यादा प्रदर्शनकारी टाइम्स स्क्वायर पर जमा हुए थे, जिनके हाथों में ‘नफरत अमेरिका को महान नहीं बनाएगी’, ‘अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन को न्यूयॉर्क शहर से बाहर करो’, ‘हमारे संविधान की रक्षा करो’, ‘लोकतंत्र, राजतंत्र नहीं’ और ‘संविधान वैकल्पिक नहीं है’ जैसे पोस्टर थे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ट्रंप एक लोकतंत्र में राजा की तरह व्यवहार कर रहे हैं, जो असंवैधानिक है। कहा कि प्रवासी देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं।
दीपावली पर ऑनलाइन खरीदारी में छोटे शहर आगे
प्रभात खबर के अनुसार दीपावली पर इस साल गैर-मेट्रो शहरों ने सबसे अधिक ऑनलाइन खरीददारी की। यह कुल इ-कॉमर्स कारोबार का लगभग तीन-चौथायी हिस्सा रहा। अकेले टियर-3 शहरों का योगदान पचास फीसदी से अधिक रहा। लॉजिस्टिक्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म क्लिकपोस्ट ने 4.25 करोड़ शिपमेंट के आंकड़ों का विश्लेषण किया। रिपोर्ट में बताया गया कि त्योहारों के इस सीजन में इ-कॉमर्स में भारत के गैर-मेट्रो शहरों की रफ्तार हैरान करने वाली है। अकेले टियर-3 शहरों से 50.7 फीसदी ऑर्डर आये। टियर-2 शहरों से 24.8 फीसदी ऑर्डर मिले। यानी भारत के छोटे शहरों से कुल मिलाकर 74.7 फीसदी ऑर्डर आये। जहां दुर्गा पूजा के दौरान फैशन की मांग 14.3% तक बढ़ी, वहीं करवा चौथ के मौके पर कॉस्मेटिक उत्पादों की खरीदारी ने फैशन को पीछे छोड़ दिया। सीओडी बना टियर-3 शहरों का सबसे पसंदीदा तरीका : टियर-3 शहरों में अब भी सीओडी (कैश ऑन डिलिवरी) सबसे पसंदीदा तरीका बना हुआ है। यहां 52 फीसदी ऑर्डर सीओडी से किये गये। ऑर्डर का औसत मूल्य भी 32.5 फीसदी बढ़ा है।
कुछ और सुर्खियां:
- एक हफ्ते से जारी हमले के बाद अफगानिस्तान और पाकिस्तान तुरंत संघर्ष विराम पर सहमत हुए
- जेईई मेन की पहले सेशन की परीक्षा 21 जनवरी से होगी
- ग़ज़ा में टूटा युद्ध विराम, इसराइली हमले में 18 लोग मारे गए
- फ्रांस के ऐतिहासिक म्यूजियम से बेशकीमती जेवरात चोरी
- अयोध्या में 26 लाख 17215 दिए जलाकर बनाया गया विश्व रिकॉर्ड
- वर्षा से प्रभावित पहले वनडे क्रिकेट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हराया, विराट कोहली ने जीरो और रोहित शर्मा ने 8 रन बनाए
अनछपी: भारत एक क्रिकेट प्रेमी देश माना जाता है और बिहार में पॉलिटिक्स को सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बताया जाता है। तो क्या क्रिकेट की तरह ही बिहार की राजनीति भी अनिश्चितताओं से भर गई है और यह कहा जा सकता है कि जब तक आखिरी चरण का चुनाव ना हो जाए तब तक कुछ बताना मुमकिन नहीं है जैसे कि क्रिकेट के बारे में कहा जाता है कि मैच आखिरी गेंद तक चलता है। फर्क यह है क्रिकेट में दर्शक सिर्फ उत्साह बढ़ा सकते हैं, मैदान में नहीं उतर सकते लेकिन चुनाव में नेता नहीं बल्कि वोटर फैसला करते हैं इसलिए अब उन्हें ही सोच समझकर फैसला करना होगा। क्रिकेट के उतार-चढ़ाव के तरह ही अब से एक महीने पहले तक की लग रहा था कि बिहार में महागठबंधन ने एनडीए पर बढ़त हासिल कर ली है लेकिन सीटों के बंटवारे पर घटक दलों में जिस तरह की खींचातानी हुई उससे यह लगने लगा कि अब एनडीए को बढ़त हासिल हो गयी है। अब पिछले एक-दो दिनों से जिस तरह से जेडीयू और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों को लेकर रस्साकशी जारी है उसे यह लगता है कि क्या आखिरी समय में महागठबंधन अपनी वापसी कर सकता है? आपने यह तो सुना होगा कि किसी पार्टी ने किसी एक उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर टिकट काट दिया लेकिन यह पहली बार हुआ है कि एक उम्मीदवार का नाम काटने के बाद दूसरे उम्मीदवार का ऐलान किया गया और फिर उस उम्मीदवार का नाम काटकर सबसे पहले वाले उम्मीदवार को पार्टी का उम्मीदवार बताया गया? जी हां, जदयू के साथ ऐसा ही हुआ है जिसने सीट से सबा सफर का नाम काटने के बाद साबिर अली को अपना उम्मीदवार बताया और फिर साबिर अली का नाम भी कट गया और एक बार फिर सबा जफर उम्मीदवार बनाए गए। इसके अलावा जदयू के कई पदाधिकारी ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। उधर भारतीय जनता पार्टी के चार बार के विधायक अशोक सिंह कह रहे हैं कि अब अटल आडवाणी वाली नहीं रही भारतीय जनता पार्टी। यह बात तो आप जान ही चुके हैं कि भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने मजबूर होकर कई बाकियों को फोन किया तब जाकर कुछ स्थिति संभली है। उधर चिराग पासवान की लोजपा के एक दो उम्मीदवारों का नामांकन रद्द होने की खबर भी आई है। यानी मैदान में उतरते ही खिलाड़ी आउट हो गया। बहरहाल अब यह महागठबंधन के नेताओं पर निर्भर है कि वह अपनी बढ़त कमाने के बाद इसे दोबारा हासिल करने के लिए क्या कोशिश करते हैं।
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