छपी-अनछपी: नीतीश के हाथ में नहीं रहा ‘होम’, $ के मुकाबले ₹ में सबसे बड़ी गिरावट

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास पहली बार होम डिपार्टमेंट नहीं होगा और उसे भारतीय जनता पार्टी के सम्राट चौधरी संभालेंगे। डॉलर के मुकाबले में रुपए में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। महागठबंधन ने आरोप लगाया है कि उसके कई उम्मीदवारों को पोस्टल बैलेट में धांधली कर हराया गया है। दुबई के एयर शो में भारत का लड़ाकू विमान तेजस दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें पायलट की मौत हो गई।

पहली ख़बर

प्रभात ख़बर के अनुसार बिहार में नयी सरकार गठन के अगले दिन शुक्रवार को सभी मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया. इस बार भी उप मुख्यमंत्री का पद भाजपा के खाते में गया है. सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सरकार में दो उप मुख्यमंत्री होंगे. पहली बार भाजपा की झोली में गृह विभाग आया है. उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को गृह विभाग की एकल जिम्मेवारी दी गयी है. उनके पास पिछली सरकार में रहे वित्त और वाणिज्यकर विभाग की जवाबदेही जदयू को मिल गयी है. जदयू के वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव को वित्त और वाणिज्य मंत्री बनाया गया है. जदयू को सामान्य प्रशासन, कैबिनेट, निगरानी व इलेक्शन समेत वित्त व वाणिज्यकर, भवन निर्माण, जल संसाधन, उर्जा, शिक्षा, ग्रामीण विकास और ग्रामीण कार्य विभाग की जिम्मेवारी मिली है. भाजपा को गृह, पथ निर्माण, नगर विकास, स्वास्थ्य व विधि, कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेवारी मिली है. हम को लघु जल संसाधन, लोजपा आर को पीएचइडी और गन्ना उद्योग तथा रालोमो के दीपक प्रकाश को पंचायती राज विभाग की जिम्मेवारी दी गयी है।

महाराष्ट्र का मॉडल अपनाया गया

भास्कर ने लिखा है कि गृह विभाग भाजपा को इसलिए गया क्योंकि इस बार जदयू और भाजपा समान स्थिति में थे। दोनों ने 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ा। 20 वर्षों में पहली बार दोनों ‘जुड़वा भाई’ की भूमिका में थे। इसी मॉडल को लागू करते हुए महाराष्ट्र की पुरानी शिवसेना-भाजपा सरकार वाला प्रमोद महाजन मॉडल अपनाया गया, जिसमें मुख्यमंत्री शिवसेना का और गृह विभाग भाजपा के डिप्टी सीएम के पास रहता था।

डॉलर के मुकाबले रुपए में सबसे बड़ी गिरावट

जागरण के अनुसार भारतीय रुपये में शुक्रवार को लगभग 45 महीने की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह पहली बार 89 प्रति डालर के स्तर को पार कर गया। व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं की वजह से घरेलू और ग्लोबल इक्विटी मार्केट से मिले नकारात्मक संकेतों के बीच भारतीय मुद्र डालर के मुकाबले 98 पैसे गिरकर 89.66 के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर जाकर बंद हुई। भारतीय मुद्रा में भारी गिरावट की वजह प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर संशय के बादल और वैश्विक आइटी स्टाक की भारी बिकवाली को माना जा रहा है। इससे पहले भारतीय रुपये में डालर के मुकाबले 24 फरवरी 2022 को 99 पैसे की गिरावट हुई थी।

पोस्टल बैलट में धांधली कर महागठबंधन को हराने का आरोप

राजद ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर बिना नाम लिये भारत निर्वाचन आयोग पर शुक्रवार को भी निशाना साधा है. राजद के पोस्ट के अनुसार, महागठबंधन के कई प्रत्याशी की हारने की वजह डाक मत पत्रों का खारिज होना रहा है. एक्स हैंडल पर विवरण देते हुए कहा गया है कि जबरन हरायी गयी सीटों के आंकड़ें चौंकाने वाले हैं. इसके अलावा कुछ और भी उदाहरण देकर राजद ने आयोग पर निशाना साधा है. नबीनगर विधानसभा सीट 112 वोटों से राजद हारी और वहां 132 पोस्टल वोट रिजेक्ट हुए. नबीनगर विधानसभा सीट 112 वोटो से आरजेडी हार और वहां 132 पोस्टल वोट  रिजेक्ट हुए। अगिआंव विधानसभा सीट 95 वोटों से सीपीआइएमएल हारी और 175 पोस्टल वोट रिजेक्ट हुए. संदेश विधानसभा सीट 27 वोटों से राजद हारा और 360 पोस्टल वोट रिजेक्ट हुए. इधर, निर्वाचन आयोग के आंकड़ों से पता चला है कि विधानसभा चुनाव में मतगणना के दौरान 2 लाख से अधिक डाक मतों में से लगभग 24000 को अमन ने कर दिया गया।

तेजस लड़ाकू विमान एयर शो में हादसे का शिकार, पायलट की मौत

जागरण के अनुसार दुबई एयर शो में शुक्रवार को भारतीय वायुसेना का तेजस लड़ाकू विमान हवाई प्रदर्शन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें पायलट विंग कमांडर नमांश स्याल की मृत्यु हो गई। हिमाचल प्रदेश के रहने वाले स्वाल एयर शो में डेमो फ्लाइट के लिए उड़ान भर रहे थे। स्थानीय समयानुसार दोपहर 2.10 बजे (भारतीय समय 3.40 बजे) यह हादसा हुआ। वीडियो में तेजस विमान को अल मक्तूम एयरपोर्ट से टेक-आफ के बाद अचानक ऊंचाई खोते हुए और जमीन से टकराते ही आग के गोले में बदलते देखा गया। वायुसेना ने बयान में कहा कि वह बहादुर पायलट के बलिदान से दुखी है और शोकग्रस्त परिवार के साथ खड़ी है। कोर्ट आफ इंक्वायरी के आदेश दिए गए हैं।

कुछ और सुर्खियां:

  • दिल्ली धमाके की जांच कर रही एजेंसियों ने अलफलाह यूनिवर्सिटी के दो और डॉक्टर को हिरासत में लिया
  • प्रशांत किशोर का ऐलान- अपनी आमदनी का 90% अपनी पार्टी जन सुराज को दान करेंगे
  • मेक्सिको की फातिमा बॉश बनीं मिस यूनिवर्स
  • बांग्लादेश में राजधानी ढाका समेत कई इलाकों में भूकंप, 6 की मौत
  • अयोध्या से सिमरिया घाट जा रही बस मोकामा में 20 फीट गड्ढे में गिरी, एक की मौत
  • पूर्वी चंपारण के छौड़ादानो में वीआईपी प्रखंड अध्यक्ष की गोली मारकर हत्या
  • मुजफ्फरपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज एसकेएमसीएच में पैरामेडिकल छात्रों के साथ रैगिंग, सात छात्रों को 15 दिन के लिए निकाला गया
  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बयान: बिहार की जनता ने घुसपैठियों के खिलाफ जनादेश दिया
  • झारखंड और बंगाल में 42 ठिकानों पर ईडी के छापे में 10 करोड़ रुपए जब्त

अनछपी: जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर काफी अरसे से यह दबाव बन रहा था कि वह होम डिपार्मेंट भारतीय जनता पार्टी को सौंप दें लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा था। 21 नवंबर 2025 को ऐसा हो गया और कुछ लोग कहते हैं कि 50 साल के बाद ऐसा मौका आया है जब मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग नहीं है। तो आखिर नीतीश कुमार होम डिपार्टमेंट अपने पास क्यों रखना चाहते थे और भारतीय जनता पार्टी इसे अपने पास क्यों लेना चाह रही थी? नीतीश कुमार के कट्टर प्रशंसक अभी यह कह रहे हैं कि होम डिपार्मेंट नीतीश कुमार के पास रही रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मुख्यमंत्री तो वही हैं। इससे मुगल काल की वह बात याद आती है जब ईस्ट इंडिया कंपनी अपना दबदबा बढ़ा रही थी और इसकी खबर देने पर बादशाह की जुबान से निकलता था दिल्ली हनोज दूर अस्त। फिर एक दिन ऐसा आया जब दिल्ली पर ईस्ट इंडिया कंपनी का कब्जा हुआ और बादशाह को कैद कर लिया गया। यह बात समझने की है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते हुए गृह विभाग का भाजपा के पास जाने का मतलब क्या है। मोटे तौर पर यह समझ जा सकता है कि गृह विभाग के जरिए पुलिस की सारी कार्रवाई नियंत्रित की जाती है और डीजीपी भी गृह विभाग के तहत ही काम करते हैं। कहने को कहा जा सकता है कि इन पर तो मुख्यमंत्री का ही पहला नियंत्रण रहता है लेकिन असली सवाल यही है कि नीतीश कुमार का अब बतौर मुख्यमंत्री कितना नियंत्रण बाकी रह गया है? ऐसे में 2013 के उस नीतीश कुमार की याद आती है जो भविष्य के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के सामने खड़ा हो गया था और बिहार के सम्मान के लिए भारतीय जनता पार्टी से फिर गया था। अब इस नीतीश कुमार को हम देखते हैं कि कैसे वह चरण स्पर्श करते हैं। नीतीश कुमार के तेवर में इतनी गिरावट की क्या वजह हो सकती है, शायद यह हमें कभी पता ना चले। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी धीमे-धीमे ही सही लेकिन नीतीश कुमार को सत्ता के नियंत्रण से बाहर करने में कामयाब होती दिख रही है। वह नीतीश कुमार का चेहरा आगे रखकर वोट लेने में कामयाब हो गई है और अब उन्हीं का चेहरा आगे रखकर सत्ता की बागडोर भी संभाल रही है। हम देख सकते हैं कि भारतीय जनता पार्टी नीतीश कुमार को बच्चों की तरह दुलार पुचकार कर सारी बात मनवा ले रही है। या फिर एक कठपुतली की तरह जिसकी डोर नचाने वाले के पास होती है।

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