छपी-अनछपी: पीके के लिए आरजेडी ने नहीं छोड़ी ज़मीन, हाई कोर्ट जानना चाहता है- ताजमहल या शिव मंदिर?

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा देने के बाद प्रशांत किशोर ने अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की लेकिन राजद ने उनके लिए कोई जगह नहीं छोड़ी और अपना उम्मीदवार भी घोषित कर दिया। दुनिया जानती है कि ताजमहल का निर्माण शाहजहां ने नए सिरे से कराया था लेकिन अब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह जानने के लिए नोटिस जारी किया है कि क्या वह शिव मंदिर था।

और, छत्तीसगढ़ का अजीब फैसला- गैर मुस्लिम से निकाह के लिए लेनी होगी वक़्फ़ बोर्ड की पूर्व अनुमति।

बांकीपुर सीट से रेखा कुमारी बनीं राजद उम्मीदवार

हिन्दुस्तान के अनुसार राजद ने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में रेखा कुमारी (गुप्ता) को प्रत्याशी बनाया है। राजद मुख्यालय में सोमवार को आयोजित प्रेसवार्ता में प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने यह घोषणा की। मंगनी लाल ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में बांकीपुर से महागठबंधन की प्रत्याशी रेखा कुमारी ही थीं। इसीलिए महागठबंधन के दलों की असहमति का सवाल कहां है। मौके पर राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी, विधान पार्षद सुनील कुमार सिंह और मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव थे। घोषणा के बाद पार्टी दफ्तर पहुंची रेखा कुमारी ने दावा किया कि बांकीपुर की जनता बदलाव चाहती है।

ताजमहल पर शिव मंदिर का सवाल

ताजमहल परिसर में तेजो महालय मंदिर होने के दावे पर सर्वे के लिए एडवोकेट कमीशन नियुक्त करने की मांग वाली याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और एएसआई से जवाब मांगा है। विपक्षी पंकज कुमार वर्मा को भी नोटिस जारी किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने लॉर्ड श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर और हरि शंकर जैन व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अगली सुनवाई तक हलफनामा दाखिल करना होगा। याचिका में यूनियन ऑफ इंडिया, केंद्र सरकार, एएसआई और पंकज कुमार वर्मा को विपक्षी के तौर पर पक्षकार बनाया गया है। मांगः आगरा की दीवानी अदालत में वर्ष 2015 से एक घोषणात्मक वाद लंबित है। इस मुकदमे में यह घोषणा करने की मांग की गई है कि ताजमहल परिसर में लॉर्ड श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर है। इस मुख्य मुकदमे के लंबित रहने के दौरान याचियों ने इस परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने और वहां की फोटोग्राफी कराने के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की अर्जी दी थी।

खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल हुए एक करोड़ लोग

भास्कर के अनुसार ईरान की राजधानी तेहरान में सोमवार को पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा शुरू हुई। मेट्रो प्रशासन के अनुसार, शनिवार से रविवार सुबह के बीच रिकॉर्ड 71 लाख से अधिक यात्रियों ने सफर किया। भीड़ के कारण मेट्रो सेवाएं मुफ्त और चौबीसों घंटे चलाई गईं। जबकि, स्थानीय मीडिया का दावा है कि करीब एक करोड़ लोग जनाजे में पहुंचे। मुख्य जुलूस तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर से सुबह छह बजे शुरू हुआ। राष्ट्रीय ध्वज में लिपटे खामेनेई और उनके परिवार के चार सदस्यों के ताबूत विशेष सैन्य ट्रक पर रखे गए थे। हालांकि, सुप्रीम सुप्रीम लीडर लीडर मुज्तबा खामेनेई यहां भी जनाजे में शामिल नहीं हुए। जनाजा दमावंद, स्ट्रीट, इमाम हुसैन स्क्वायर, इंकलाब स्क्वायर और आजादी स्क्वायर से होते हुए मेहरबाद हवाई अड्डे तक गया। यहां से ताबूतों को मंगलवार को विमान से 120 किमी दूर कोम शहर ले जाया जाएगा। बुधवार को जनाजा इराक के पवित्र शहरों नजफ और कर्बला पहुंचेगा। अंत में, शव को वापस ईरान लाकर 9 जुलाई को उनके जन्मस्थान मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

मणिपुर में असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला, दो जवान की जान गई

मणिपुर के नगा बहुल उखरुल जिले में सोमवार दोपहर उग्रवादियों ने असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला किया। इसमें 40वीं असम राइफल्स के दो जवान शहीद हो गए, जबकि कई अन्य के घायल होने की आशंका है। पुलिस के मुताबिक हमला दोपहर करीब 1:30 बजे नुंगशांग खोंग इलाके में हुआ। काफिला सांगशक स्थित बटालियन मुख्यालय लौट रहा था। वारंट अफसर बलवंत सिंह और हवलदार चंद्रमोहन सिंह की मौके पर मौत हो गई। जिला मुख्यालय से करीब 16-17 किमी दूर हुए हमले में फायरिंग के साथ विस्फोटकों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। इसके बाद केंद्रीय बलों और उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ भी हुई। हमले के बाद इलाके की घेराबंदी कर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए।

रैयतों की मौत के बाद सरकार ज़मीन का रिकॉर्ड खुद अपडेट करेगी

जागरण के अनुसार करेगी राज्य सरकार बिहार सरकार अब मृत रैयतों की जमाबंदी स्वयं अपडेट करेगी। ऐसे रैयतों के उत्तराधिकारियों को अपने नाम से दाखिल-खारिज कराने के लिए अंचल का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने इससे संबंधित दिशा निर्देश प्रमंडलीय आयुक्तों एवं जिलाधिकारियों को भेज दिया है। विभागीय मंत्री डा. दिलीप कुमार जायसवाल ने सोमवार को कहा कि सरकार की मंशा है कि किसी भी परिवार को केवल जानकारी के अभाव या प्रशासनिक विलंब के कारण वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं रहना पड़े। अब सरकार स्वयं पहल कर ऐसे मामलों का निबटारा कराएगी। यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक संबंधित मौजा के ऐसे सभी मामलों का निबटारा न हो जाए। राजस्व कर्मचारी जन्म मृत्यु निबंधन अभिलेख, चौकीदारी रिपोर्ट, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर मृत जमाबंदी धारकों की पहचान करेंगे। आवश्यक जांच के बाद उत्तराधिकारियों से संपर्क कर दस्तावेज प्राप्त किए जाएंगे। अपर समाहर्ता एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता हर माह के प्रथम सप्ताह में अंचलवार समीक्षा करेंगे।

गैर मुस्लिम से निकाह के लिए लेनी होगी वक्त बोर्ड की पूर्व अनुमति

जागरण के अनुसार छत्तीसगढ़ में अंतर-धार्मिक निकाह की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है। प्रस्तावित नियम अगस्त 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी होंगे। इसके तहत यदि कोई मुस्लिम युवती या युवक किसी गैर-मुस्लिम से निकाह करना चाहता है, तो पहले वक्फ बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। अनुमति के लिए दोनों पक्षों की सहमति, पहचान संबंधी दस्तावेज, आवश्यक होने पर मतांतरण से जुड़े दस्तावेज और अन्य कानूनी औपचारिकताओं की जांच की जाएगी। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही निकाह की अनुमति दी जाएगी। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने प्रदेश के सभी निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं का पंजीयन भी अनिवार्य करने का निर्णय लिया है।

कुछ और सुर्खियां:

  • एनआईए ने पहलगाम आतंकी हमले में लश्करे तैयबा प्रमुख हाफिज सईद को सप्लीमेंट्री चार्जशीट में शामिल किया
  • पटना के धनरूआ सर्किल ऑफिस का क्लर्क ₹50000 घूस लेते गिरफ्तार, जमीन के कागजात ऑनलाइन करने के लिए मांगी थी रिश्वत
  • पुणे में मिट्टी खिसकने और बाढ़ से चार लोगों की जान गई
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे

अनछपी: छत्तीसगढ़ सरकार उस कहावत को गलत साबित करने की कोशिश कर रही है जिसमें कहा जाता है कि मियां बीवी राजी तो क्या करेगा काजी। छत्तीसगढ़ से खबर यह आई है कि वहां अगर कोई मुसलमान गैर मुस्लिम से शादी करना चाहता है तो उसे वक़्फ़ बोर्ड की इजाजत लेनी पड़ेगी। सबसे पहला सवाल तो यह है कि वक़्फ़ बोर्ड किसी मुसलमान की गैर मुसलमान से शादी करने में दिलचस्पी क्यों ले रहा है? उसका काम तो वक्त की संपत्ति को संभालना है। क्या यह आदेश उस फैसले के नतीजे में सामने आया है जिसके तहत छत्तीसगढ़ वक़्फ़ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्य बनाए गए हैं? दूसरा सवाल यह है कि मुसलमान तो गैर मुसलमान से शादी करने के लिए वक़्फ़ बोर्ड से इजाजत लेगा/लेगी लेकिन गैर मुसलमान को किसकी इजाजत लेनी पड़ेगी ताकि वह मुसलमान से शादी कर सके? यानी ऐसी शादियों के लिए इजाजत जरूरी की जा रही है तो हर धर्म पर यह नियम लागू होना चाहिए। वक़्फ़ बोर्ड से इजाजत के मामले में यह बात कही जा रही है कि दोनों पक्षों की सहमति, पहचान संबंधी दस्तावेज, जरूरत पड़ने पर धर्म बदलने से जुड़े दस्तावेज और दूसरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही इजाजत दी जाएगी। यानी होने वाले दूल्हा दुल्हन अगर पहले से निकाह के लिए तैयार हैं तब भी उन्हें वक़्फ़ बोर्ड की इजाजत लेनी पड़ेगी। इस आदेश का मकसद शायद धर्म परिवर्तन कर मुसलमान बनने वाले शख्स से पहले से मुस्लिम रहे शख्श की शादी के मामले में सख्ती की जाए और इसके लिए वक़्फ़ बोर्ड की इजाज़त को ज़रूरी करार दिया जाए। यह सबको पता है कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार किसी हिंदू का धर्म परिवर्तन कर मुसलमान बनने को रोकना चाहती है, इसलिए वह इस तरह का आदेश जारी कर रही है। चूंकि वक़्फ़ बोर्ड में सरकार के ही प्रतिनिधि होते हैं इसलिए वह ऐसी इजाजत देने में आनाकानी करे तो किसी को हैरत नहीं होनी चाहिए। सवाल यह है कि अगर कोई ग़ैर मुस्लिम बिना धर्म परिवर्तन किए किसी मुसलमान से शादी करना चाहे तो क्या इसके लिए भी बोर्ड की अनुमति लेनी होगी? एक सवाल यह भी है कि अगर कोई मुसलमान धर्म परिवर्तन कर हिंदू धर्म में शादी करना चाहे तो उस मामले में किसकी इजाजत लेनी होगी? अब तक तो शादी के लिए ऐसी किसी इजाजत की पाबंदी भारतीय संविधान ने नहीं लगाई थी। क्या यह पाबंदी संविधान के अनुरूप है?

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