बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। जायजा लेने बिहार आए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने माना कि बिहार को बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है। मक्का की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को सऊदी अरब एयर फोर्स ने इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।
और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के नाम पर 100 करोड़ फूंकने का आरोप लगाया।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के बाद केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बिहार को हरसंभव मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ से राज्य को भारी क्षति हुई है। फसलों, मकानों और पशुओं के नुकसान के साथ ही करीब 50 लाख लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। बिहार से जो प्रस्ताव आएगा, उसपर तत्काल पूरी मदद दी जाएगी। क्षति के आकलन को एक और केंद्रीय दल बिहार आयेगा। केंद्रीय मंत्री चौहान और सीएम सम्राट चौधरी ने बुधवार को पटुना, सारण, वैशाली, मुंगेर और भागलपुर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई एवं स्थल निरीक्षण किया। इसके बाद पटना में हुई समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और अन्य अधिकारियों ने करीब 10 हजार करोड़ की क्षति का प्रारंभिक ब्योरा तथा राहत कार्यों की जानकारी उन्हें दी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को नुकसान एवं जरूरतों की जानकारी दी जाएगी।
मक्का की तरफ जा रहे ड्रोन को गिराया गया, हूती बोले- हमने नहीं दागा
प्रभात खबर के अनुसार मक्का की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को सऊदी अरब की वायु रक्षा ने प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया. सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने ड्रोन को हूतियों द्वारा लॉन्च किया गया बताते हुए कहा कि यह मक्का को निशाना बनाने की कोशिश थी. गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मालिकी ने मक्का और दोनों पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा को ‘रेड’ लाइन’ बताया. हालांकि, हूती पक्ष ने मक्का या किसी पवित्र स्थल को निशाना बनाने से साफ इनकार किया है. घटना के बाद मक्का, जद्दा और ताइफ में हवाई हमले की चेतावनियां जारी की गयीं, जिन्हें बाद में हटा लिया गया. यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब यमन और सऊदी अरब के बीच हवाई तथा ड्रोन हमले जारी हैं. संघर्ष का असर लाल सागर और बाब अल-मंदब क्षेत्र पर भी दिख रहा है. क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मिस्त्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से मुलाकात की है. भारत ने घटना की निंदा की है.
अरब सागर में भारतीय जहाज से पाकिस्तान पोत की टक्कर
अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के युद्धपोतों के बीच टक्कर हुई है. इसके बाद दोनों देशों के बीच समुद्री तनाव बढ़ गया है. घटना 15 सितंबर की शाम उत्तरी अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई. भारतीय युद्धपोत नियमित निगरानी मिशन पर था. इसी दौरान एक पाकिस्तानी नौसैनिक पोत तेज गति से भारतीय जहाज के करीब आया और कथित तौर पर असुरक्षित तरीके से दिशा बदलता रहा. इसी दौरान दोनों जहाजों के बीच संपर्क हुआ. विदेश मंत्रालय के अनुसार, घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ. बुधवार को भारत ने नयी दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायोग के प्रभारी साद अहमद वड़ैच को विदेश मंत्रालय में तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया. मंत्रालय ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के व्यवहार को अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर बताया.
ओमान तेल टैंकर हमले में लापता वैशाली के सुमित के पुतला का दाह संस्कार
हिन्दुस्तान के अनुसार ओमान तट पर 12 सितंबर को तेल टैंकर पर मिसाइल हमले के बाद से लापता वैशाली के सुमित कुमार सिंह का चार दिन बाद भी पता नहीं चल पाया है। हालांकि अब तक मिली सूचना के अनुसार सुमित के जिंदा रहने की संभावना न के बराबर है। साथ काम करने वालों के अनुसार उसकी मौत हो चुकी है। उधर कीरतपुर राजाराम गांव में बुधवार को सुमित का पुतला बनाकर पूरे विधि के साथ अर्थी निकली गई। सुमित के चार वर्षीय पुत्र ने जब अर्थी को कंधा लगाया तो मौके पर उपस्थित सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। सुमित की पत्नी कोमल प्रिया समेत पूरा परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। पुतले का अंतिम संस्कार कौनहारा घाट पर किया गया। उल्लेखनीय है कि 12 सितंबर की देर रात को विदेशी कमर्शियल तेल टैंकर जहाज एमटीईआई जीएआईए परं हुए मिसाइल हमले के बाद वैशाली के भगवानपुर थाना अंतर्गत कीरतपुर राजाराम गांव निवासी मर्चेंट नेवी के नाविक सुमित सिंह लापता थे।
आज से 25000 तक वेतन वाले ईपीएफओ के दायरे में
भास्कर के अनुसार केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सदस्यों के लिए वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रु. मासिक करने को मंजूरी दी। फैसला गुरुवार को विश्वकर्मा जयंती से लागू होगा। अब 25 हजार रु. तक वेतन वाले करीब साढ़े आठ करोड़ कर्मचारियों के लिए ईपीएफओ में योगदान अनिवार्य होगा। इससे अधिक वेतन वालों के लिए यह स्वैच्छिक रहेगा। ईपीएफओ के लिए वेतन सीमा 12 साल बाद बदली है। पहले सितंबर 2014 में यह साढ़े छह हजार से 15 हजार रु. की गई थी। अभी संगठित क्षेत्र के करीब 7.98 करोड़ कर्मचारी ईपीएफओ से जुड़े हैं। अनुमान है कि इस बदलाव के बाद 50 लाख से एक करोड़ तक नए कर्मचारी और जुड़ेंगे। इन्हें कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएस) और कर्मचारी जमा लिंक्ड (ईपीएफ), कर्मचारी पेंशन योजना मिलेगा। हालांकि, विशेषज्ञों को चिंता है कि नियोक्ता बढ़े हुए अंशदान को मौजूदा कॉस्ट-टू-कंपनी (सीटीसी) में समायोजित कर सकते हैं, जिससे कर्मचारियों की टेक होम सैलरी घट सकती है।
बिहार सरकार द्वारा दीया जलाने पर 100 करोड़ फूंकना निंदनीय: तेजस्वी
हिन्दुस्तान के अनुसार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी ने पीएम के जन्मदिवस पर दीया जलाने के कार्यक्रम पर प्रहार किया है। बुधवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में जनता बाढ़, महंगाई, बेरोजगारी से त्रस्त है। प्रदेश सरकार आशीर्वाद का दीया नामक सरकारी कार्यक्रम कर बिहार जैसे गरीब राज्य में सौ करोड़ का दीया बाती जलाकर बाढ़ प्रभावितों का जिया जलाएगी। आरोप लगाया कि बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने की बजाए डबल इंजन सरकार पीएम के जन्मदिन पर प्रचार में 100 करोड़ फूंकने को तैयार है। यह शर्मनाक और निंदनीय हैं। लोग महंगाई से त्रस्त हैं और जनता पर टैक्स का बोझ लादा जा रहा है।
कुछ और सुर्खियां:
- 1991 बैच की आईपीएस अधिकारी प्रीत वर्मा बिहार की पहली महिला डीजीपी बनीं
- हिंदी और कन्नड़ सिनेमा में शानदार अभिनय के लिए अनंत नाग को 2024 का दादा साहब फाल्के अवार्ड
- छत्तीसगढ़ के बक्सर जिले की विशेष एनआईए अदालत ने जीराम घाटी माओवादी हमले के मामले में सभी 10 दोषियों को सजा-ए-मौत सुनाई
- बिहार में इंटर और मैट्रिक परीक्षा फॉर्म भरने की तारीफ 30 सितंबर तक बढ़ी
- सोनपुर के मशहूर हरिहर क्षेत्र मेले का उद्घाटन 22 नवंबर को
अनछपी: आपने महाराष्ट्र के ठाणे जिले में इस समय रह रहे असगर अली बोहरा का नाम शायद सुना होगा। इनका नाम पिछले दिनों इसलिए चर्चा में आया था क्योंकि इनकी एक तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जारी हुई थी और उसमें बताया गया था कि दोनों ने गुजरात के वडनगर में एक साथ पढ़ाई की थी। लेकिन असली बात यह है कि असगर अली बोहरा को प्रधानमंत्री से मिलने की जरूरत इसलिए पड़ी थी क्योंकि उनकी जमीन पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक की कंपनी ने कब्जा कर रखा था और एफआईआर दर्ज कराने के 11 साल बाद भी उन्हें इंसाफ नहीं मिला था। सोचने की बात यह है कि ऐसे शख्श को अपनी जमीन पर से कब्जा हटवाने के लिए प्रधानमंत्री से दोस्ती का सहारा लेना पड़ता है तो आम नागरिकों को इंसाफ लेने में क्या दिक्कतें आती होंगी। तो किस्सा यह है कि उन्होंने आठ सितंबर को प्रधानमंत्री से मुलाकात कर पालघर जिले की जमीन से जुड़े विवाद की सीबीआई जांच की मांग की थी। उन्होंने 1989 में भयंदर पूर्व के नवघर में 2,810 वर्गमीटर का प्लॉट खरीदा था। उनका आरोप था कि 2011 में दो कंपनियों स्वयम बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस ने इस पर कब्जा कर लिया। दोनों को भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़ा बताया था। अब बताया जा रहा कि सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस ने मीरा भयंदर नगर निगम के सहायक नगर नियोजन निदेशक को पत्र देकर भूखंड की निर्माण अनुमति सरेंडर कर दी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि असगर अली बोहरा को इंसाफ मिलेगा लेकिन इस बात में क्या शक है कि भारत में इंसाफ पाने के लिए प्रधानमंत्री तक से मदद की जरूरत पड़ती है और उससे पहले यह मामला बरसों तक लटका रहता है। इस बात पर जरूर गौर किया जाना चाहिए कि अगर असगर अली बोहरा की दोस्ती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नहीं रही होती और वह उनसे मिलकर इंसाफ नहीं मांगते तो पता नहीं उन्हें इंसाफ मिलता भी या नहीं, या इंसाफ मिलता तो कब मिलता।
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