छ्पी-अनछपी: मार्च निकालकर सुप्रीम कोर्ट में गुहार, मानवाधिकार उल्लंघन में यूपी टॉप

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला हालांकि पुलिस ने उन्हें बीच में रोक दिया तो नेताओं ने दूसरे रास्ते से सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर अर्ज़ी दाखिल की। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुसार देश में सबसे ज्यादा मानवाधिकार उल्लंघन उत्तर प्रदेश में हुआ और बिहार इस मामले में तीसरे नंबर पर रहा। 

और, महंगाई ने 23 महीने का रिकॉर्ड तोड़ा। 

पहली ख़बर

जागरण के अनुसार वोट चोरी-एसआईआर लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सोमवार को एकजुट विपक्ष फिर से सड़क पर उतरा और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया। चुनावों में भारी गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए सर्वोच्च अदालत में एक संयुक्त याचिका दाखिल कर ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में राजधानी दिल्ली के बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक ‘लोकतंत्र के लिए मार्च’ में मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव से लेकर सौगत राय जैसे शीर्ष विपक्षी नेता हजारों लोगों के साथ शामिल हुए। विपक्षी नेताओं ने अपनी संयुक्त याचिका में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ के जरिये बड़ी संख्या में वोटरों के नाम काटे जाने की शिकायत करते हुए एसआइआरं रोकने की मांग की है। इस संयुक्त याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सपा के अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी यादव, माकपा के एमए बेबी, तृणमूल-एम के सौगत राय, राकांपा-एसपी की सुप्रिया सुले, शिवसेना यूबीटी के संजय राउत, आइयूएमएल के टी बशीर आदि बाचिकाकर्ता हैं। याचिका दायर करने वालों में पहला नाम राहुल गांधी का है।

केरलम कांग्रेस ने चीफ जस्टिस का इस्तीफा मांगा, फिर कांग्रेस ने वापस ली मांग

जागरण के अनुसार राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए के नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध याचिका दाखिला करने के बीच केरलम कांग्रेस ने एक पोस्ट कर प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के इस्तीफे की मांग कर दी। हालांकि पोस्ट पर विवाद के बाद पार्टी ने उससे किनारा करने के साथ ही एक्स पोस्ट भी हटा दी। पार्टी ने कहा कि उसे देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और पार्टी सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करती है। विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के विषय में पूछे जाने पर जस्टिस सूर्यकांत ने इस कानून व्यवस्था का मामला बताया था और कहा था कि कोर्ट की परिधि में नहीं आता। इसी बात से बिफरी केरलम कांग्रेस ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, “प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून व्यवस्था आपकी परिधि में नहीं आती है तो इस्तीफा दे दो। हम आपका विकल्प ढूंढ लेंगे।” हालांकि बाद में उसने यह पोस्ट हटा ली। 

मानवाधिकार उल्लंघन में यूपी टॉप

भास्कर के अनुसार मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में बिहार देश में तीसरे नंबर पर है। टॉप पर यूपी और दूसरे नंबर पर दिल्ली है। वर्ष 1993 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन हुआ था। तब से अबतक बिहार से 122954 शिकायतें निबंधित हुईं। यूपी से 11.88 लाख और दिल्ली से 1.69 लाख शिकायतें आयोग तक पहुंचीं। बिहार से रजिस्टर्ड 1,22,954 शिकायतों में से 1,20,551 का निपटारा हो गया। केवल 2403 मामलों का निपटारा नहीं हो सका है। यूपी में 11.77 लाख और दिल्ली में 1.66 लाख केस का निपटारा कर लिया गया। बिहार में टॉप पर पटना जिला है। पटना में अबतक 12792 शिकायतें निबंधित हुई हैं। इनमें 12490 शिकायतों का निपटारा कर दिया गया है। पटना के ज्ञान भवन में 7 और 8 अक्टूबर को विशेष सुनवाई में 70 में से 65 केसों को निपटाने के साथ ही आयोग ने पीड़ितों को 1.50 करोड़ का मुआवजा पीड़ितों के आश्रितों को देने का आदेश दिया।

दो साल में सरकारी कोचिंग योजना के तहत 1043 अल्पसंख्यक उम्मीदवार कामयाब

बिहार में अल्पसंख्यक वर्ग के युवाओं के लिए संचालित राज्य कोचिंग योजना के तहत दो साल में 1043 अभ्यर्थियों को सफलता मिली है। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान इस योजना के तहत कुल 3,610 छात्र-छात्राओं के लिए कोचिंग कार्यक्रम संचालित किए गए, जिनमें 1,043 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की। वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 693 छात्र-छात्राओं के लिए कोचिंग कार्यक्रमों को स्वीकृति दी जा चुकी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1,230 छात्र-छात्राओं को कोचिंग का अवसर मिला था। इनमें 545 अभ्यर्थी सफल हुए। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोचिंग कार्यक्रम का दायरा बढ़कर 2,380 छात्र-छात्राओं तक पहुंच गया। इस तरह एक वर्ष में लाभान्वित होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या में 1,150 की वृद्धि दर्ज की गई और योजना का दायरा लगभग 1.9 गुना हो गया। हालांकि, इस दौरान सफल अभ्यर्थियों की संख्या 498 रही। वित्तीय वर्ष 2026-27 में स्वीकृत 693 अभ्यर्थियों के कोचिंग कार्यक्रमों में बीपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी शामिल है।

मंदी से निपटने के मॉडल पर मिला इकोनॉमिक्स का नोबेल प्राइज

प्रभात खबर के अनुसार अमेरिकी अर्थशास्त्रियों रॉबर्ट ई हॉल और माइकल वुडफोर्ड को 2026 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है. उन्हें व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिए नीतियां बनाने के सूक्ष्म आर्थिक आधारों पर किए गये शोध के लिए यह सम्मान मिलेगा. रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने सोमवार को विजेताओं की घोषणा की. 

महंगाई ने 23 महीने का रिकॉर्ड तोड़ा

हिन्दुस्तान के अनुसार खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी से सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 फीसदी पर पहुंच गई। यह पिछले 23 महीनों का उच्चतम स्तर है। पिछली बार इससे अधिक महंगाई अक्तूबर 2024 में 6.21% थी। वहीं, इस साल जनवरी में लागू नई सूचकांक श्रृंखला के आधार पर सितंबर की महंगाई दर अब तक के सर्वोच्च स्तर पर रही। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में खुदरा महंगाई दर 4.83 फीसदी थी। इस तरह एक महीने में इसमें 0.71 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई। खाद्य महंगाई दर भी अगस्त के 5.97 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 7.74 फीसदी हो गई। प्याज, लहसुन, अदरक और नींबू की कीमतों में तेजी इसका प्रमुख कारण रही।

कुछ और सुर्खियां:

  • बीपीएससी ने सिविल सेवा 72वीं की प्रारंभिक परीक्षा- पीटी स्थगित, अगली तारीख का बाद में ऐलान होगा
  • आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी के वीसी शरद कुमार को 10 दिनों तक विश्वविद्यालय मुख्यालय से ग़ैर हाज़िर रहने के मामले में चांसलर ऑफिस से नोटिस
  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा की मांग को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन का गवर्नर हाउस तक मार्च आज
  • पटना के अगमकुआं थाना क्षेत्र से ट्रांसपोर्ट नगर में 70 लाख का प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद

अनछपी: आपने पश्चिम चंपारण के दिलशाद अंसारी का नाम नहीं सुना होगा। वह अब इस दुनिया में नहीं। उसकी बेवा है और गमों का पहाड़। 25 साल के दिलशाद पर 14 महीने पुराना गांजा बरामदगी का केस था और उसे एनडीपीएस ऐक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। दिलशाद के घरवालों का कहना है कि पुलिस ने पहले उसके पैर में चोट लगने की खबर दी थी और बाद में उसकी मौत की जानकारी मिली। दिलशाद की बीवी नगमा खातून ने पुलिस पर मारपीट कर हत्या करने का आरोप लगाया है। दूसरी और पुलिस का कहना है कि दिलशाद को जब बानूछापर स्थित उसके घर से गिरफ्तार करने के बाद थाना ले जाया जा रहा था तो शिकारपुर और साठी थाना क्षेत्र के बीच वह चलती गाड़ी से कूद गया। पुलिस के मुताबिक जख्मी दिलशाद को नरकटियागंज के अनुमंडल अस्पताल से गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज बेतिया रेफर किया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दिलशाद के पिता अकबर अंसारी का कहना है कि सोमवार देर रात करीब 2:00 बजे पुलिस घर पहुंची थी और यह कहकर उनके बेटे को ले गई थी कि उससे पूछताछ करनी है। एक ऐसे समय में जब पुलिस ने खुद को यमराज समझ रखा है और “एनकाउंटर” सरकारों की ऑफिशियल पॉलिसी बन गई है, कितने लोगों को इस बात पर भरोसा होगा कि दिलशाद पुलिस की गाड़ी से कूदा और फिर उसकी मौत हो गई। पश्चिम चंपारण के एसपी ने संबंधित थाना के इंचार्ज और दूसरे पांच पुलिसवालों को सस्पेंड तो कर दिया है लेकिन क्या इस तरह के मामले में कुछ पुलिसवालों को सस्पेंड करना इंसाफ का तकाजा पूरा करता है? सबसे पहले तो यह तय करना चाहिए कि क्या पुलिस ने जानबूझकर ऐसी कोई हरकत की है या उसे कहीं से शह मिली हुई है? फिर दिलशाद के गुनहगारों को सख्त सजा दिलाना ज़रूरी है। 

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