छ्पी-अनछपी: लखीसराय के युवक ने चार बेटों के साथ ट्रेन से कट जान दी, नौ जिलों में खुलेंगे मेगा स्किल सेंटर
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। लखीसराय के एक युवक ने अपने चार बेटों के साथ फरीदाबाद में ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। बिहार के 9 जिलों में मेगा स्किल सेंटर खुलेगा। बिहार में सरकारी महिला कर्मचारियों को दफ्तर के पास ही आवास मिलेगा। दुनिया में सबसे तेज बढ़ने वाली आबादी मुसलमानों की है।
और, जानिएगा कि बिहार में सेना की जमीन के दाखिल खारिज पर 7 जिलों में क्या पेच है।
पहली खबर
हिन्दुस्तान के अनुसार पारिवारिक कलह और गुस्से पर काबू न रख पाने की कमजोरी ने एक परिवार को ऐसा दर्द दिया जिसकी टीस जीवन भर परिजनों की आंखें नम करती रहेगी। हरियाणा के फरीदाबाद स्थित बल्लभगढ़ में रहने वाले लखीसराय के बड़हिया स्थित नप वार्ड-एक तारतर का रहनेवाला मनोज महतो (40) मंगलवार को अपने चार बेटों के साथ गोल्डन टेंपल एक्सप्रेस ट्रेन के सामने कूद गया। ट्रेन से कटकर पांचों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक बेटों में गोलू कुमार (10), कारू कुमार (9), छोटू कुमार (5) और छोटका (3) शामिल हैं। मूल रूप से जमुई स्थित मंझवे गांव का रहने वाला मनोज कुछ वर्षों से लखीसराय के बड़हिया नगर परिषद के वार्ड संख्या दो तारतर स्थित ससुराल में रहता था। मनोज महतो की पत्नी प्रीति कुमारी ने बताया कि मंगलवार को मनोज ने पहले उनसे सभी बच्चों को साथ लेकर पार्क घुमाने ले चलने की बात कही। गर्मी-धूप अधिक होने के कारण प्रीति ने मना किया और बच्चों को भी न ले जाने की सलाह दी। बावजूद इसके मनोज चारों बच्चों के साथ घर से निकल गया। कुछ ही समय बाद रेलवे पुलिस से प्रीति को सूचना मिली कि मनोज ने चार बच्चों के साथ ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली है। जीआरपी थाना के प्रभारी राजपाल ने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि मृतक मनोज महतो को पत्नी के चरित्र पर शक था। ऐसे में आशंका है कि उसने बेटों समेत आत्महत्या की है। थाना प्रभारी के अनुसार मामले में अभी किसी ने किसी के खिलाफ शिकायत नहीं दी है।
9 जिलों में खुलेंगे मेगा स्किल सेंटर
जागरण के अनुसार बिहार में युवाओं और जन सामान्य के बेहतर भविष्य के लिए सरकार ने प्रदेश में नौ प्रमंडलीय जिलों में मेगा स्किल सेंटर खोलने का निर्णय लिया है। इन सेंटरों का संचालन प्रदेश सरकार और विभिन्न सरकारी गैर सरकारी और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा किया जाएगा। मेगा स्किल सेंटर में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर दिए जाएंगे। 9 मेगा स्किल सेंटर के निर्माण के लिए सरकार ने 280.87 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इन मेगा स्किल सेंटरों पर अगले 5 वर्षों में 21600 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
4 लाख महिला कर्मी ऑफिस के पास रहेंगी
भास्कर के अनुसार बिहार सरकार ने महिला सरकारी कर्मियों को बड़ी राहत देते हुए कार्यालय के पास आवास की सुविधा देने की नीति को मंजूरी दे दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में इस नीति पर मुहर लगाई गई। इसका लाभ राज्य में लगभग चार लाख महिला शिक्षकों, पुलिसकर्मियों और अन्य महिला सरकारी कर्मियों को मिलेगा। इसके लिए हर जिले में डीएम की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी निजी मकानों को चिन्हित करेगी। उनके साथ लीज एग्रीमेंट करेगी। महिला कर्मियों को किसी प्रकार की दिक्कत होगी तो उसका निराकरण संबंधित अनुमंडल के एसडीओ करेंगे।
सबसे तेज़ बढ़ रही मुसलमानों की आबादी
हिन्दुस्तान के अनुसार बीते एक दशक में दुनिया में सबसे अधिक मुस्लिमों की आबादी बढ़ी है जबकि भारत सहित कई देशों में हिंदुओं की आबादी कम हुई है। प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट से यह पता चला है। रिपोर्ट के अनुसार 2010 से 2020 के बीच मुस्लिमों की आबादी 34.7 करोड़ का इजाफा हुआ है। यह किसी भी अन्य धर्म की आबादी में बढ़ोत्तरी से अधिक है। भारत में मुस्लिमों की आबादी 3.56 करोड़ की वृद्धि हुई है। प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार आबादी की गणना के लिए 2700 से अधिक जनगणना और सर्वेक्षणों के विश्लेषण किया है। दुनिया के हर धार्मिक समूह में आबादी बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में मुसलमानों की आबादी करीब 2 अरब हो गई है। दुनिया की आबादी में उनकी हिस्सेदारी 1.8 अंक बढ़कर 25.6% हो गई। वहीं किसी भी धर्म को न माननेवाले लोगों की संख्या दुनिया की आबादी का 24.2% हो गई। बौद्ध एकमात्र ऐसा धार्मिक समूह है, जिसकी जनसंख्या 2020 में एक दशक पहले की तुलना में कम हो गई।
सेना की ज़मीन के दाखिल खारिज में भी पेच
प्रभात खबर के अनुसार पटना सहित बिहार के 7 जिलों में सेना की जमीन के दाखिल खारिज और दूसरे राजस्व मामले को लेकर पेच फंसा हुआ है। इस कारण जमीन पर निर्माण कार्य भी रुका हुआ है। इसकी जानकारी रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि की तरफ से राजस्व और भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों की बैठक के दौरान दी गई। इसके बाद संबंधित अंचल अधिकारियों सहित अन्य अधिकारियों को त्वरित समाधान का निर्देश दिया गया है। इसमें बड़ा मामला बिहटा एयरपोर्ट स्टेशन को लेकर है। बिहटा एयरपोर्ट स्टेशन के लिए 142 एकड़ जमीन अर्जित करने के बाद इसका दाखिल खारिज भारत सरकार के नाम पर करने के लिए 26 दिसंबर 2024 को बिहटा अंचल कार्यालय में याचिका दी गई थी। इस मामले में अंचल अधिकारी द्वारा बताया गया कि बिहटा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 142 एकड़ जमीन की जमाबंदी रैयत के नाम पर ऑनलाइन नहीं दिख रही है। इस वजह से रैयत के खाते का खारिज और रक्षा मंत्रालय के नाम से दाखिल नहीं हो पा रहा है। रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि की तरफ से पटना सहित 7 जिलों में दाखिल खारिज सहित अन्य समस्याओं की जानकारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को दी गई है। पटना के अलावा दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गया, गोपालगंज, रोहतास और कैमूर जिले में यह मामले हैं।
कुछ और सुर्खियां:
- बिहार में जन्म और मृत्यु का प्रमाण पत्र डिजिटल रूप में मिलेगा, डिजिलॉकर में भी रख सकेंगे
- पटना रेलवे जंक्शन परिसर में भीषण आग से 14 बंडल केबलवायर जलकर खाक
- छपरा नगर निगम का क्लर्क 60000 रुपए घूस लेते गिरफ्तार, प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी का भुगतान करने के बदले मांग रहा था घूस
- भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य का ऐलान, 45 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे
- मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय में नामांकन के लिए 15 जुलाई तक आवेदन
- बिहार में भीषण गर्मी से बिजली की खपत 8303 मेगावाट हुई
अनछपी: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के बारे में यह बात आसानी से कही जा सकती है कि खबरों को छिपाना और सही खबर बताने वालों को सताना इसकी आधिकारिक नीति लगती है। आज इस बात को कहने की जरूरत इसलिए पड़ी कि बीबीसी की हिंदी सेवा ने कल यानी मंगलवार को एक रिपोर्ट छापी जिसमें यह बताया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने कुंभ की भगदड़ के दौरान केवल 37 लोगों की मौत की बात मानी थी जबकि इसकी पड़ताल में कम से कम 82 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार से पहले केंद्र की मोदी सरकार ने बीबीसी की उस डॉक्यूमेंट्री पर रोक लगा दी थी जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए वहां मुस्लिम विरोधी दंगों के लिए उनकी भूमिका पर सवाल उठाया गया था। यह बात भी याद रखने की है कि बीबीसी के खिलाफ इनकम टैक्स का छापा भी पड़ा था, उसके बावजूद बीबीसी ने कुंभ भगदड़ में मौत के बारे में पड़ताल की और मौतों की बड़ी संख्या की खबर छापी है। बीबीसी एक विदेशी समाचार संस्था है, उसके बावजूद उसने कुंभ भगदड़ के बारे में इतनी पुख्ता रिपोर्ट पेश की है लेकिन भारत के किसी अखबार और टेलीविजन या ऑनलाइन न्यूज़ चैनल ने इस पर काम नहीं किया। ऐसा नहीं है कि बीबीसी से बाहर इस पर काम करने वाले पत्रकार मौजूद नहीं हैं बल्कि इसकी वजह सबको मालूम है कि सरकार के दबाव के आगे उनके मालिक अपने पत्रकारों को ऐसे रिपोर्ट लाने से रोकते हैं, उन्हें इसके लिए प्रेरित करना तो बहुत दूर की बात है। डर का आलम यह है कि बीबीसी की छपी रिपोर्ट के आधार पर भी अधिकतर मीडिया संस्थान कुंभ भगदड़ के बारे में कोई खबर नहीं दे पाया। देखना यह है कि योगी आदित्यनाथ की सरकार इस विषय पर कुछ ठोस कदम उठाती है या बीबीसी पर ही सवाल खड़े कर देती है। बेहतर तो यह होगा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार को बीबीसी की पड़ताल के आधार पर मृतकों की कम से कम संख्या मान लेनी चाहिए और अगर इसमें और सुधार की जरूरत है तो उसकी भी कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा संबंधित परिवारों को जो सरकारी मुआवजा मिलना चाहिए उसकी व्यवस्था भी योगी आदित्यनाथ सरकार की जिम्मेदारी है। हमारे लिए याद रखने की बात यह है कि कुंभ भगदड़ में मरने वालों की संख्या को सरकार ने छिपाया और इसे एक विदेशी समाचार संस्थान ने उजागर किया। इससे हमें भारत में मीडिया की स्थिति समझने में मदद मिलती है।
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