छ्पी-अनछपी: बिहार में आंधी-ठनका ने ली पांच दर्जन की जान, तहव्वुर राना को भारत लाया गया
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में लगातार दूसरे दिन भरी आंधी बारिश से गुरुवार को पांच दर्जन लोगों की जान चली गई। मुंबई हमले के मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर राना को भारत लाया गया। टैरिफ पर चीन और अमेरिका में तकरार बढ़ गई है। आईजीआईएमएस के छात्र बेड ना मिलने और उसकी मौत के बाद हंगामा हुआ है।
और, जानिए गया कि इंसान के दांत को अदालत खतरनाक हथियार मानती है या नहीं।
प्रभात खबर के अनुसार बिहार में गुरुवार को दोपहर के बाद आए आंधी पानी में टांका दीवार और पेड़ गिरने की अलग-अलग घटनाओं में 61 लोगों की मौत हो गई। वहीं, करोड़ों रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा नालंदा जिले में 22 लोगों की जान चली गई। इनमें एक ही घटना में मानपुर थाना के नगमा गांव में मंदिर पर पेड़ गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई। सभी लोग आंधी पानी से बचने के लिए मंदिर में छिपे थे तभी पीपल का विशाल पेड़ उसी के ऊपर गिर गया। कोसी- सीमांचल और पूर्व बिहार में ठनका से नौ लोगों की मौत हो गई। पटना और गया में भी चार-चार लोगों की जान चली गई। उत्तर बिहार के पूर्वी और पश्चिम चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, शिवहर और मुजफ्फरपुर जिले में आंधी पानी से गेहूं और मक्का और लीची की फसल को भारी नुकसान हुआ है।
तहव्वुर राना को भारत लाया गया
जागरण के अनुसार मुंबई में 26/11 आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड तहव्वुर हुसैन राना को प्रत्यर्पित कर भारत ले आया गया है। इसी के लिए काम करने वाले और लश्कर तैयबा व हरकतुल जिहादी इस्लामी (हूजी) जैसे आतंकी संगठनों से करीब से जुड़े रहे राना को लेकर विशेष विमान इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गुरुवार शाम करीब पौने सात बजे उतरा जहां एनआईए की टीम ने सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। बाद में उसे विशेष एनआईए जज चंद्रजीत सिंह के समक्ष पेश किया गया। 26 नवंबर 2008 को 10 पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई में कई जगह हमले किए थे। इनमें मारे गए 160 लोगों में अमेरिकी, ब्रिटिश और इसराइली नागरिक शामिल थे। पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक 64 वर्षीय तहव्वुर राना से एनआईए के टीम पूछताछ करेगी।
टैरिफ पर चीन और अमेरिका में तकरार बढ़ी
हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन पर 125 फ़ीसद टैरिफ गुरुवार से लागू हो गया। इसमें कई चीनी सामान पर कुल टैरिफ बढ़कर 145 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके साथ ही दोनों देशों में तकरार बढ़ गई। बुधवार को अमेरिकी बाजार में तेजी के बाद गुरुवार को बाजार में 4% की गिरावट देखी गई। ट्रंप ने बुधवार को चीन पर अतिरिक्त शुल्क थोपा था। इसमें वर्ष की शुरुआत में लागू किए गए 20% अतिरिक्त शुल्क को जोड़ा गया जिससे यह 145 प्रतिशत तक पहुंच गया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हम लड़ाई नहीं चाहते मगर अमेरिका टैरिफ की धमकी जारी रखता है तो हम डरेंगे नहीं।
आईजीआईएमएस: साथी की मौत पर हंगामा
सड़क दुर्घटना में घायल आईजीआईएमएस के एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र 20 वर्षीय अभिनव पांडे की बुधवार को देर रात 2:00 बजे मौत हो गई। छात्र मोतिहारी का निवासी था। इसकी सूचना के बाद साथी मेडिकल छात्र-छात्राओं ने हंगामा कर दिया। इसके चलते इमरजेंसी भी कर घंटे से ज्यादा बाधित रहे। गुरुवार शाम 3:00 बजे बारिश होने तक करीब 12 घंटे वे संस्थान के निदेशक प्रोफेसर बिंदे कुमार के आवास परिसर में धरना प्रदर्शन करते रहे। छात्रों का आरोप है कि सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल छात्र को अपने ही अस्पताल में बेड नहीं मिला। इसके बाद वह उसे पारस एचएमआरआई ले गए। छात्रों के जमावड़े की सूचना पर निदेशक आवास के बाहर दंगा नियंत्रण वहां वाटर कैनन समेत शास्त्री नगर व एयरपोर्ट थाना पुलिस भारी संख्या में देती रही। निदेशक के आवास से बाहर नहीं निकल आने से उग्र छात्रों ने कई खिड़कियों के शीशे भी तोड़ दिए।
इंसान का दांत खतरनाक हथियार नहीं: कोर्ट
भास्कर के अनुसार बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि मानव दांत को खतरनाक हथियार नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने एक महिला की शिकायत पर उसके ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। महिला ने आरोप लगाया था कि उसकी ननद ने उसे दांत से काटा। जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और संजय देशमुख की औरंगाबाद पीठ ने पिछले हफ्ते दिए अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता के मेडिकल सर्टिफिकेट में केवल साधारण चोट के निशान हैं। अप्रैल 2020 में दर्ज एफआईआर के अनुसार झगड़े के दौरान महिला की ननद ने उसे काटा जिससे उसे खतरनाक हथियार से चोट पहुंची। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता के संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
कुछ और सुर्खियां:
- 2028 में लॉस एंजेलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों में क्रिकेट भी शामिल होगा
- प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की गांधी मैदान में बिहार बदलाव रैली आज
- तृणमूल कांग्रेस की संसद महुआ मोइत्रा ने नए वक़्फ़ कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की
- भाजपा नेता अश्विनी चौबे का बयान- नीतीश को बनाया जाए उप प्रधानमंत्री तो बिहार का होगा भला
- नीट पेपर लीक मामले में फरार संजीव मुखिया पर पुलिस ने घोषित किया ₹300000 का इनाम
अनछपी: पटना के दो बड़े सरकारी अस्पतालों आईजीआईएमएस और एम्स में इमरजेंसी की हालत में भी बेड नहीं मिलने की शिकायत आम है। अब आईजीआईएमएस के अपने ही एमबीबीएस स्टूडेंट का सामने आया है जो अब इस दुनिया में नहीं रहा। इस छात्र के साथियों का आरोप है कि सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद उसे वहां क्रिटिकल केयर यूनिट के इमरजेंसी वार्ड में जगह नहीं मिली जिसकी वजह से उसे पारस ले जाना पड़ा। जब उस छात्र को वहां भी नहीं बचाया जा सका तो उनका गुस्सा होना लाजिमी था। छात्रों का आरोप है कि डायरेक्टर ने ना तो उनसे समय पर मुलाकात की और और ना ही मिलने के बाद सही से व्यवहार किया। इस मामले में डायरेक्टर का जो भी कहना हो लेकिन यह बात अफसोस की लगती है कि उनके ही कॉलेज के एक लड़के को घायल होने के बाद बेड नहीं मिला और उसकी मौत हो गई, इसके बावजूद उन्होंने हमदर्दी जताने के बदले घर पर रहना पसंद किया। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने अपनी सफाई दी है और इससे भी इनकार किया है कि घायल छात्र को बेड नहीं मिला लेकिन यह बात भी सच्चाई है कि अगर बेड मिला होता तो वह दूसरे अस्पताल में क्यों भर्ती कराया जाता। इसे समझा जा सकता है कि जब मेडिकल कॉलेज के छात्र को ही बेड नहीं मिल रहा तो आम लोगों की हालत क्या होती होगी। इस बात की चर्चा इसलिए जरूरी है क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वास्थ्य मंत्री, मंगल पांडे और पूरा स्वास्थ्य विभाग इस बात का खूब प्रचार करता है कि बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है और बड़े-बड़े अस्पताल बन रहे हैं। यह भी सोचने की बात है कि पीएमसीएच, एनएमसीएच और एम्स जैसे अस्पताल के रहते हुए भी छात्रों को अपने साथी को एक प्राइवेट अस्पताल में क्यों भर्ती कराना पड़ा। सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च कर पीएमसीएच की बिल्डिंग तो बन रही है लेकिन हकीकत यह है कि बहुत मजबूरी ना हो तो गंभीर मरीजों का वहां इलाज कराना कोई पसंद नहीं करता क्योंकि वहां सही इलाज मिल ही नहीं पाता है। एनएमसीएच का भी यही हाल है और एम्स में इमरजेंसी का बेड मिलना भी बेहद मुश्किल है। आज ही छपी एक और खबर में बताया गया है कि पटना के मशहूर नई गार्डिनर सरकारी अस्पताल में पिछले 6 महीने से अल्ट्रासाउंड बंद है। इस अस्पताल के नाम में भी सुपर स्पेशलिटी लगा हुआ है लेकिन सुविधाएं नहीं हैं। एक खबर जमुई से आई है जहां एक प्राइवेट अस्पताल में मरीज की मौत हो गई। इसके बाद मालूम हुआ कि यह अस्पताल दरअसल फर्जी है। इस अस्पताल के संचालकों पर पीड़ित परिवार से मारपीट का भी आरोप है। कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर बिल्डिंग बना देने से राज्य में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं बढ़ेंगी, इसके लिए हर स्तर पर जरूरी काम करना होगा। एक तरफ सरकारी अस्पतालों की हालत ठीक करनी होगी तो दूसरी तरफ प्राइवेट अस्पतालों की भी जांच पड़ताल में कड़ाई जरूरी है।
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