छ्पी-अनछपी: एनसीईआरटी की किताब से मुगल बाहर, मोदी बोले- हर भारतीय का खून खौल रहा

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। दुनिया भर के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले मुगलों को एनसीईआरटी की नई किताब से बाहर कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद हर भारतीय का खून खौल रहा है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट पेपर लीक के मास्टरमाइंड संजीव मुखिया का दावा- कई अफसरों के बच्चों को मेडिकल में एडमिशन दिलाया। कनाडा में तेज रफ्तार कार ने भीड़ को रौंदा जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई।

और, जानिएगा कि व्यापार प्रतिबंध के बावजूद हर साल कितने अरब डॉलर का भारतीय सामान पहुंचता है पाकिस्तान।

पहली खबर

हिन्दुस्तान के अनुसार एनसीईआरटी ने सातवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में बड़ा बदलाव किया है। अब छात्रों को मुगल और दिल्ली सल्तनत का इतिहास नहीं पढ़ाया जाएगा। इसकी जगह महाकुम्भ, मेक इन इंडिया सहित कई अन्य नए अध्याय शामिल किए गए हैं। इस सप्ताह जारी नई पाठ्यपुस्तकें नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के अनुरूप तैयार की गई हैं। सामाजिक विज्ञान की नई किताब ‘समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे’ में प्राचीन भारतीय राजवंशों जैसे मगध, मौर्य, शुंग और सात वाहन पर नए अध्याय होंगे, जिनका ध्यान भारतीय लोकाचार पर है। इसके अलावा भूगोल, मेक इन इंडिया और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी सरकारी पहल पर केंद्रित नए अध्याय शामिल किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह पाठ्यपुस्तक का पहला भाग है, दूसरा भाग आगामी महीनों में आने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर कोई टिप्पणी नहीं की कि हटाए गए हिस्से किताब के दूसरे भाग में बरकरार रखे जाएंगे या नहीं। एनसीईआरटी ने पहले मुगलों और दिल्ली सल्तनत से जुड़े पाठों को छोटा कर दिया था।

हर भारतीय का खून खौल रहा: मोदी

जागरण की सबसे बड़ी खबर के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों और उनके सरपरस्तों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात दोहराई है। उन्होंने नरसंहार के पीड़ित परिवारों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिलकर रहेगा। हमले के दोषियों और साजिश रचने वालों को कठोरतम जवाब दिया जाएगा। आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में पूरी दुनिया उनके साथ खड़ी है। घटना की तस्वीरों को देखकर हर भारतीय का खून खौल रहा है। पीएम मोदी ने देशवासियों व पीड़ित परिवारों को यह भरोसा 22 अप्रैल को हुई घटना के बाद दूसरी बार दिलाया है। रविवार को मन की बात कार्यक्रम में आतंकी हमले को लेकर प्रधानमंत्री ने यह बातें कहीं।

अफसरों के बच्चों को मेडिकल में एडमिशन दिलाया: संजीव मुखिया

प्रभात खबर के अनुसार नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार संजीव मुखिया ने पूछताछ में कई सनसनीखेज जानकारी दी है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू), झारखंड पुलिस और सीबीआई की टीम की संयुक्त पूछताछ में मुखिया ने दावा किया कि उसकी ऊंची राजनीतिक पहुंच है और कई सफेदपोश व्यक्तियों से सीधा संपर्क है। उसने यह भी बताया कि कई वरिष्ठ अधिकारियों के बच्चों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने में उसने भूमिका निभाई है। फरारी के दौरान उसने कई थानों को भी अपने प्रभाव में लिया और गतिविधियां चलाता रहा। सूत्रों के मुताबिक संजीव ने बताया कि उसका मकसद पत्नी को राजनीतिक गलियारों में ऊंचा मुकाम दिलवाना था।

कनाडा में कार चालक ने रौंदा, 9 की मौत

हिन्दुस्तान के अनुसार कनाडा में शनिवार देर रात (भारतीय समयानुसार रविवार) लापु-लापु फिलिपिनो फेस्टिवल के दौरान एक तेज रफ्तार कार ने भीड़ को रौंद दिया। मौके पर ही नौ लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हैं। मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि उत्सव के दौरान जब भारी भीड़ जमा थी तो उसी वक्त एक काले रंग की एसयूवी तेज रफ्तार से भीड़ में जा घुसी और लोगों को रौंदती हुई आगे बढ़ गई। घटना के बाद मौके पर चीख पुकार मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। वह 30 वर्षीय एक स्थानीय नागरिक है। पुलिस ने आतंकी घटना होने से इनकार किया।

भारत से हर वर्ष 10 अरब डॉलर का सामान पहुंचता है पाकिस्तान

जागरण के अनुसार आर्थिक थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव ‘जीटीआरआई’ ने अपने ताजा अनुमान में कहा है कि हर वर्ष 10 अरब डॉलर से ज्यादा के भारतीय उत्पाद पाकिस्तान पहुंचते हैं। यह उत्पाद व्यापार प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए दुबई, सिंगापुर और कोलंबो पोर्ट के जरिए पाकिस्तान पहुंचते हैं। ‘जीटीआरआई’ का कहना है कि भारतीय कंपनियां इन बंदरगाहों पर माल भेजती हैं जहां एक स्वतंत्र कंपनी माल उतारती है और उत्पादों को गोदाम में रखती है। इन गोदाम में शुक्ल का भुगतान किये बिना माल का भंडारण किया जा सकता है। ‘जीटीआरआई’ के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि वेयरहाउस में लेबल और दस्तावेजों को बदलकर अलग देश का मूल दर्शाया जाता है, भारत में बने सामान पर ‘मेड इन यूएई’ का लेवल लगाया जा सकता है।

कुछ और सुर्खियां:

  • भभुआ में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने एनएच 219 पर परसियां पेट्रोल पंप के पास चार दोस्तों को रौंद डाला, सभी की मौत
  • पटना जिले के बाढ़ में गंगा घाट पर तैराकी सिखाने के दौरान डूबने से पिता और दो बच्चों की मौत
  • मध्य प्रदेश के मंदसौर में तेज रफ्तार वैन कुएं में गिरी, 11 लोगों की मौत
  • 3 दिन में 537 पाक नागरिकों ने अटारी सीमा के रास्ते भारत छोड़ा
  • भारत ने इस्लामाबाद में होने वाले मध्य एशिया वॉलीबॉल प्रतियोगिता से अपनी टीम वापस बुलाई
  • जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ में सेना की वर्दी की बिक्री और सप्लाई पर रोक

अनछपी: जिस सरकार का पूरा रुख ही धर्म आधारित नफरत पर हो उसमें सामाजिक रिश्तों के साथ-साथ  शिक्षा व्यवस्था पर कितना बुरा असर पड़ता है इसका अंदाजा लगातार हो रहा है। एक जमाने में एनसीईआरटी की किताबों की दुनिया भर में चर्चा उसकी गुणवत्ता के लिए होती थी लेकिन अब उनकी चर्चा हास्यास्पद और घोर सांप्रदायिक पाठ्य सामग्री की वजह से हो रही है। अभी हालत यह है कि कई क्लासों के लिए एनसीईआरटी की किताबें बाजार में नहीं आई हैं जबकि इस साल की एक महीने की पढ़ाई पूरी होने वाली है। इस देरी की वजह तो एनसीईआरटी के मैनेजमेंट की गड़बड़ी भी हो सकती है लेकिन किताबों में छेड़छाड़ भी इसका अहम कारण है। अब ताजा जानकारी यह आई है की एनसीईआरटी की नई किताबों से मुगलों को हटाया जाएगा। यही नहीं दिल्ली सल्तनत के सुल्तानों का जिक्र भी नहीं रहेगा। भारतीय इतिहास के इतने लंबे और महत्वपूर्ण समय को किताबों से गायब कर भारत अपने छात्रों को क्यों अंजान रखना चाहता है यह समझना मुश्किल नहीं है। इसमें कोई शक नहीं कि यह एक सांप्रदायिक सोच है, और सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी और उसके पैतृक संगठन आरएसएस समाज और इतिहास से मुसलमानों का नामोनिशान मिटाना चाहता है। लेकिन सवाल यह है कि इतिहास के इतने अहम अध्याय को किताबों से हटकर क्या उसे अंतरराष्ट्रीय इतिहास से भी बाहर किया जा सकता है? एक तरफ मुगलों और दिल्ली सल्तनत की बातें किताबों से बाहर की जा रही हैं तो दूसरी ओर ‘भारतीय लोकाचार’ के नाम पर केवल हिंदू धर्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। भूगोल भी अब ‘पवित्र भूगोल’ हो गया है और उसमें 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम यात्रा और शक्तिपीठ जैसे स्थानों का विवरण दिया गया है। इसमें नदी संगम, पहाड़ और जंगल जैसे स्थानों का विवरण तो है लेकिन उन्हें ‘पूजनीय’ बताने पर ज्यादा जोर है। यह सरकार किताबों के साथ छेड़छाड़ बहुत ही शातिराना तरीके से कर रही है। एनसीईआरटी ने पहले मुगलों और दिल्ली सल्तनत से जुड़े पाठकों को छोटा कर दिया था और अब उसे पूरी तरह हटा दिया है।

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