छ्पी-अनछपी: बिहार में रेकॉर्डतोड़ वोटिंग, एग्जिट पोल में एनडीए सरकार
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में भी रिकॉर्ड तोड़ मतदान हुआ और एग्जिट पोल में एक बार फिर एनडीए सरकार बनने के असर दिखाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि दिल्ली धमाके के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। पाकिस्तान में अदालत के बाहर धमाके में 12 लोगों की मौत हो गई। और, जनिएगा कि सुप्रीम कोर्ट को यह क्यों कहना पड़ा की हिंदी बोलने को मजबूर करना और लुंगी पहनने का मजाक उड़ाना बर्दाश्त नहीं।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार देश की आजादी के बाद बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मतदाताओं ने इतिहास रच दिया। पहली बार दोनों चरणा मिलाकर रिकार्ड 67 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने मतदान किया।। पहले चरण में छह नवंबर को 65.08 प्रतिशत मतदान हुआ था। वहीं, मंगलवार को दूसरे चरण में 69 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। इसके साथ ही सभी 243 विधानसभा क्षेत्र में छिटपुट घटनाओं के बीच शांतिपूर्ण मतदान संपत्न हो गया। बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) विनोद सिंह गुंजियाल ने प्रेसवार्ता में देर शाम यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दूसरे चरण के करीब दो हजार बूथों से अभी आंकड़े लिया जाना शेष है। देर शाम तक मिले आंकड़ों के अनुसार दूसरे चरण वाले 20 जिले की 122 सीटों पर सर्वाधिक कटिहार में 78.63 प्रतिशत, किशनगंज में 78.06 एवं पूर्णिया में 76.04 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। वहीं, दूसरे चरण में सबसे कम 57.85 प्रतिशत मतदान नवादा में हुआ। 2020 के विधानसभा चुनाव से इस बार 9.6 प्रतिशत अधिक मतदान हुआ है। अब 14 नवंबर को आठ बजे मतगणना की जाएगी।
एग्जिट पोल में एनडीए सरकार
भास्कर के अनुसार बिहार विधानसभा चुनाव के बाद आए एग्जिट पोल में एनडीए की सत्ता में वापसी दिख रही है। एग्जिट पोल के अनुसार, एनडीए को 130 से 167 सीटें मिल सकती हैं। 7 एजेंसियों के पोल ऑफ पोल्स के अनुसार, नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार फिर बनेगी।। पोल में 243 सीटों में एनडीए को 154 सीटें मिलने का दावा किया जा रहा है। महागठबंधन को 82 सीटों पर सिमटता बताया जा रहा है। भाजपा को सबसे ज्यादा 74 सीटें मिलने का दावा है। जनसुराज को ज्यादातर एग्जिट पोल ने सीट दी है।
सीमांचल में सबसे ज़्यादा 15% वोट बढ़े
बिहार विस के 2025 के चुनाव में राज्य के सभी जिलों में मतदाताओं ने रिकॉर्ड तोड़ मतदान किया है। वहीं, सीमांचल की जनता ने सर्वाधिक हौसला दिखाते हुए आगे बढ़कर लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लिया है। यहां सर्वाधिक 15 प्रतिशत से अधिक मत बढ़े।
दिल्ली धमाके के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा: मोदी
हिन्दुस्तान के अनुसारप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली धमाके के षड्यंत्रकारी बख्शे नहीं जाएंगे। जांच एजेंसियां मामले की पूरी तह तक जाएंगी। उधर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उच्चस्तरीय बैठक की, जिसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को जांच सौंप दी गई। भूटान दौरे पर गए प्रधानमंत्री ने कहा कि दिल्ली में हुई भयावह घटना ने सभी को बहुत दुखी किया है। पूरा देश उनके साथ खड़ा है। मैं घटना की जांच कर रही सभी एजेंसियों के संपर्क में हूं। सभी जिम्मेदार लोगों को न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने देर रात अमित शाह से जांच की प्रगति के बारे में बात भी की।
पाकिस्तान में अदालत के बाहर विस्फोट, 12 की मौत
पाकिस्तान की राजधानी मंगलवार को बम धमाके से दहल उठी। राजधानी के जी-11 इलाके में स्थित जिला अदालत के बाहर दोपहर करीब 12.39 बजे पुलिस के वाहन पर हुए फिदायीन हमले में 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि 36 लोग जख्मी हो गए। वहीं धमाके में हमलावर के भी चीथडे उड़ गए और उसका सिर अलग से सड़क पर पाया गया। धमाका इतना जोरदार था कि इसकी गूंज छह किलोमीटर के दायरे में सुनी गई और चारों तरफ धुआं फैल गया। घटना के बाद गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने कहा कि हमलावर कोर्ट परिसर के अंदर जाना चाहता था, लेकिन ऐसा न कर पाने की वजह से उसने कोर्ट के बाहर ही खुद को उड़ा लिया। सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि अंदर जाने के लिए हमलावर ने 10-15 मिनट इंतजार भी किया। न्यूयार्क टाइम्स ने डिजिटल प्लेटफार्म ‘द खोरासान डायरी की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि ‘पाकिस्तानी तालिबान’ से जुड़े एक संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
बक्सर में महिला ने तीन बच्चों को जहर मिला खुद भी खाया, तीन की मौत
हिन्दुस्तान के अनुसार नया भोजपुर थाना क्षेत्र के नया भोजपुर गांव में मंगलवार की रात एक महिला ने खुद जहर खाने के बाद अपने तीन बच्चों को भी खिला दिया। इस घटना में महिला और उसके दो बच्चों की मौत हो गई। जबकि एक की हालत गंभीर है। गांव वाले कहते है कि किसी बात को लेकर पति के साथ पत्नी सविता देवी से विवाद हुआ था। उसी विवाद के कारण उसने ऐसा फैसला लिया कि पूरा गांव हैरान रह गया है। सविता ने अपने तीन बच्चे 5 वर्षीय बेटी ज्योति, तीन वर्षीय पुत्र आकाश कुमार और एक वर्षीय विकास के साथ खुद जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने सभी को आनन फानन में सदर अस्पताल पहुंचाया। परिजनों ने बताया कि जहरीला पदार्थ खाने से ज्योति, आकाश और सविता देवी की मौत हो गई।
हिंदी बोलने को मजबूर करना और लुंगी पहनने का मजाक उड़ाना बर्दाश्त नहीं: कोर्ट
भास्कर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में केरल के दो छात्रों से मारपीट की घटना पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा, ‘हम एक देश हैं।’ कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली में एक व्यक्ति के साथ हुई उस घटना का उल्लेख किया, जिसमें छात्रों को हिंदी बोलने के लिए मजबूर किया गया। पारंपरिक पोशाक ‘लुंगी’ पहनने पर उनका मजाक उड़ाया गया। यह घटना लाल किले के पास हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को ऐसे सांस्कृतिक और नस्लीय भेदभाव के मामलों को लेकर गंभीर होना चाहिए। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा, देश में सांस्कृतिक और नस्लीय भेदभाव से लोगों को निशाना बनाना दुखद है। दोनों छात्र दिल्ली यूनिवर्सिटी के जाकिर हुसैन कॉलेज के प्रथम वर्ष के छात्र हैं।
कुछ और सुर्खियां:
- पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉक्टर शकील अहमद ने कांग्रेस से त्यागपत्र दिया
- मशहूर फिल्म एक्टर 89 साल के धर्मेंद्र की हालत स्थिर, सेहत में आ रहा सुधार
- पूर्वी चंपारण और शिवहर में फर्जी वोटिंग करते 27 गिरफ्तार
- रामदेव की पतंजलि कंपनी द्वारा दूसरी कंपनियों के च्यवनप्राश को धोखा कहने वाले विज्ञापन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई रोक
- झारखंड की घाटशिला सीट के साथ सात राज्यों की 8 सीटों पर भी बंपर मतदान
अनछपी: वोट देने के दिन को लोकतंत्र का महापर्व बताया जाता है लेकिन सच्चाई यह है कि आज का लोकतंत्र नेताओं का है महापर्व है। वोट देने के लिए किसी भी वोटर ने चाहे जिस पार्टी को चुना हो, क्या वह अपने दिल से यह बात कह सकता है कि उसकी जो अपनी असली समस्याएं हैं उनकी तरफ सरकार ने कोई ध्यान दिया हो? यह माना जा सकता है कि पिछले 20 सालों में बिहार में बिजली और सड़क के मामले में काफी सुधार हुआ है लेकिन क्या कोई इस बात से इनकार कर सकता है कि इसी दौरान करप्शन काफी बढ़ा है और घूसखोरी से आम आदमी परेशान हाल है। क्या कोई इस बात से इनकार कर सकता है कि स्कूल और उसके बाद कॉलेज की पढ़ाई के लिए आम आदमी को सरकार की व्यवस्था पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। क्या कोई से इनकार कर सकता है कि अस्पतालों की बिल्डिंग बनने के बावजूद अगर किसी को इमरजेंसी में कहीं दिखाना हो तो पैसे और पैरवी के अलावा कोई चारा नहीं है? लगभग पूरा बिहार बरसात में नाला बना रहता है और कादो कीचड़ से हर आदमी परेशान नजर आता है। किसानों से बात कीजिए तो उसे खाद खरीदने में कालाबाजारी का सामना करना पड़ता है। नौकरी के वादे और दावे चाहे जितने किए जाएं और जिस पार्टी की तरफ से किया जाए, हकीकत यह है कि लाखों लोगों को अब भी बिहार से बाहर जाकर अपनी रोजी-रोटी कमानी पड़ती है। इन सब बातों का यहां जिक्र इसलिए किया जा रहा है ताकि हम पॉलिटिक्स से ऊपर भी अपनी जिंदगी के बारे में सोचें। इस व्यवस्था के तहत सरकार से जो सहूलतें मिल रही हैं, उनका इस्तेमाल किया जाए। जो सहूलतें नहीं मिल रही हैं उनके लिए कोशिश की जाए। बिहार के लोगों के बारे में कहा जाता है कि उनकी पॉलिटिक्स में बहुत दिलचस्पी है लेकिन हकीकत यह है कि केवल पॉलिटिक्स से उनका जीवन स्तर नहीं सुधर पायेगा। लोकतंत्र अब भी नेताओं का तंत्र है और जनता को अपनी व्यवस्था खुद करनी पड़ती है।
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