छ्पी-अनछपी: वक़्फ़ कानून के विरोध के दौरान बंगाल में हिंसा-तीन मरे, अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पश्चिम बंगाल में वक़्फ़ कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई। ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर बातचीत हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी राज्य सरकार द्वारा बिल को मंजूरी देने के लिए राष्ट्रपति के लिए भी समय तय कर दिया है। उत्तर प्रदेश के शहर आगरा में राणा सांगा के नाम पर प्रदर्शन के दौरान भारी आतंक मचाया गया है।
और, जानिएगा कि बिहार में अब कितने मतदाताओं पर एक बूथ बनेगा ताकि भीड़ कम हो सके।
हिन्दुस्तान के अनुसार वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के खिलाफ पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में शनिवार को भी हिंसा भड़क उठी। इस दौरान तीन लोगों की मौत हो गई। इस बीच, कलकत्ता हाईकोर्ट ने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए शनिवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की तैनाती का आदेश दिया। साथ ही कहा, ऐसे हालात में कोर्ट अपनी आखें बंद नहीं रख सकता। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से हालात पर रिपोर्ट भी मांगी। एक पुलिस अधिकारी ने शनिवार को बताया कि शमशेरगंज इलाके के जाफराबाद में उपद्रवियों ने पिता-पुत्र हरगोबिंदो दास और चंदन की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई। परिजनों का आरोप है कि बदमाशों ने घर में लूटपाट की और भागने से पहले दोनों को चाकू घोंप दिया। वहीं, तीसरे मृतक की पहचान 21 वर्षीय एजाज के रूप में हुई है। उसे शुक्रवार को हुई झड़प के दौरान गोली लगी थी। शनिवार शाम इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। एक अन्घ घटना में शमशेरगंज के धुलियान में एक बीड़ी कारखाने के दो श्रमिकों को घर जाते समय गोली लग गई। अतिरिक्त महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) जावेद शमीम ने कहा कि शुक्रवार को मुर्शिदाबाद जिले में झड़पों के दौरान 18 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चार राउंड फायरिंग की।
परमाणु कार्यक्रम पर ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता
जागरण के अनुसार पश्चिम एशिया में व्याप्त तनाव के माहौल में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को ओमान की राजधानी मस्कट में हुई वार्ता सकारात्मक रही है। दोनों देशों ने वार्ता को जारी रखने पर सहमति जताई है और अगली वार्ता 19 अप्रैल को होगी। अगले सप्ताह होने वाली वार्ता का स्थान बदल सकता है लेकिन दोनों देशों के बीच ओमान की मध्यस्थता कायम रहेगी। इसकी जानकारी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने दी है। दोनों देशों के दलों के बीच सीधी वार्ता नहीं हुई बल्कि दोनों दल अलग-अलग कमरों में बैठे और वह ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी के जरिए वार्ता कर रहे थे। बैठक में कैदियों की अदला बदली और मुख्य मुद्दे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निगरानी में लाने और बदले में ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने पर भी वार्ता हुई।
राष्ट्रपति को राज्य के बिलों पर 3 महीने के अंदर लेना होगा फैसला: कोर्ट
प्रभात खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने देश के राष्ट्रपति के लिए भी समय सीमा तय कर दी है। ‘तमिलनाडु सरकार बनाम तमिलनाडु राज्यपाल’ मामले में अपनी तरह के पहले और एक ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल की तरफ से भेजे गए बिल पर राष्ट्रपति को 3 महीने के भीतर फैसला लेना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल और राष्ट्रपति दोनों को राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर एक निश्चित समय सीमा के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य है। अदालत में स्पष्ट किया कि संविधान में किसी भी असीमित वीटो की शक्ति नहीं दी गई है और अगर राष्ट्रपति या राज्यपाल जानबूझकर विधेयकों पर निर्णय नहीं लेते हैं तो उनकी निष्क्रियता को न्यायिक जांच के दायरे में लाया जा सकता है।
तमिलनाडु में राज्यपाल के रोके गए 10 बिल बन गए कानून
हिन्दुस्तान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद वे 10 विधेयक, जो तमिलनाडु के राज्यपाल ने वर्ष 2020 से रोक रखे थे, अब कानून बन गए हैं। ये कानून राज्यपाल या राष्ट्रपति की बिना मंजूरी के लागू हुए हैं, क्योंकि कोर्ट ने राज्यपाल के रवैये को असंवैधानिक बताया है। तमिलनाडु विधानसभा द्वारा दो बार पारित विधेयकों को राज्यपाल आर.एन. रवि ने राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए रोका था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि तमिलनाडु के विधेयक राज्यपाल के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किए जाने की तिथि से ही कानून माने जाएंगे। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने 415 पेज के फैसले में कहा कि राज्यपाल पहली बार मंजूरी देने से इनकार करने और विधानसभा द्वारा फिर से विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित नहीं कर सकते।
आगरा में सांगा के नाम पर आतंक
राणा सांगा पर विवादित टिप्पणी से उपजे विवाद के बीच आगरा में शनिवार को देशभर से आए क्षत्रिय संगठनों के कार्यकर्ताओं ने आगरा में हाथों में तलवारें, बंदूक लेकर शक्ति प्रदर्शन किया। मौका था राणा सांगा की जयंती पर आयोजित रक्त स्वाभिमान सम्मेलन का। हजारों युवाओं ने तलवारें, बंदूकें और लाठियां लहराईं तो पर्यटन नगरी के कई इलाकों एवं राजमार्गों को अघोषित कर्फ्यू के हालात से गुजरना पड़ा। भय के चलते लोग घरों में कैद रहे। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, संयुक्त सनातनी संगठन संघ आदि के आह्वान पर यूपी, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व मध्यप्रदेश से युवाओं की टोलियां सुबह से ही गढ़ी रामी पहुंचने लगी थीं।
बिहार में एक बूथ पर मतदाताओं की संख्या होगी 1200
भास्कर के अनुसार बिहार विधानसभा चुनाव में 1200 मतदाताओं पर एक बूथ होगा। इससे बूथों पर भीड़ कम होगी। भारत निर्वाचन आयोग ने दिल्ली में पिछले दिनों हुई बैठक में 800 से 1200 मतदाताओं पर एक बूथ बनाने के निर्णय को मंजूरी दी थी। बूथ मतदाताओं के घर से 2 किलोमीटर के अंदर होने चाहिए। आयोग के फैसले के बाद देश में पहला चुनाव बिहार में हो रहा है। इसे बिहार विधानसभा चुनाव से लागू करने की तैयारी है। निर्वाचन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान 1500 मतदाताओं पर एक बूथ बनाया गया था।
कुछ और सुर्खियां:
- बिहार में 5.20 लाख ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलेंगे पैसे
- इमारत-ए-शरिया का ऐलान- नए वक़्फ़ कानून के खिलाफ आंदोलन होगा
- बिहार के 24 जिलों में आज बिजली गिरने और आंधी आने का अलर्ट
- ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी ग्राहकों को राहत देने के लिए स्मार्टफोन व लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान को जवाबी टैरिफ से बाहर रखा
- दिल्ली में धूल भरी आंधी से 450 फ्लाइट उड़ानों में हुई देरी
- राजगीर में 1 जून से महिला कबड्डी विश्व कप का आयोजन होगा
- देशभर में यूपीआई सेवा बाधित रही
अनछपी: इस बात से शायद ही किसी को इनकार होगा कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार का बौद्धिक मार्गदर्शन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस करता है। वैसे तो पूरी केंद्र सरकार ही आरएसएस के मार्गदर्शन और उसकी नीतियों पर चलती है लेकिन अक्सर आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत कई विवादास्पद बयान देते हैं और सरकार भी उसी के अनुरूप काम करती है। भारत के लोगों को पूर्वज-वंशज के नाम पर बांटने का आरोप आरएसएस प्रमुख पर अक्सर लगता है। धर्म परिवर्तन के बारे में भी उनकी राय विवादास्पद मानी जाती है और इस पर चर्चा जरूरी है। भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकारों ने धर्मांतरण के नाम पर जो कानून बनाया है वह दरअसल हिन्दू धर्म छोड़ने को सख्ती से रोकने वाला है और दूसरे धर्म से हिन्दू धर्म अपनाने वालों को प्रोत्साहित करने वाला है। यह संविधान में दिए गए धर्म की स्वतंत्रता पर खुला हमला है क्योंकि यह धर्म को चुनने की आजादी कुचलता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत का ताजा बयान गुजरात के वलसाड जिले से आया है जिसमें उन्होंने कहा कि लोगों को लालच या भय के प्रभाव में आकर मतांतरण नहीं करना चाहिए। बिल्कुल सही बात है, लेकिन इसी तरह के लोग दूसरे धर्म से हिन्दू धर्म स्वीकार करने को घर वापसी का नाम देते हैं और तब उन्हें इस डर और लालच की बात याद नहीं रहती। दरअसल मोहन भागवत और हिंदूत्ववादी दूसरे लोग नहीं चाहते कि कोई हिन्दू अपना धर्म परिवर्तन करे जबकि यह भारत के संविधान में दिया हुआ अधिकार है। इस बात को सीधे ना कह कर मोहन भागवत असल में यह जताना चाहते हैं कि देश में हिन्दू धर्म से जो धर्मांतरण हो रहा है उसकी वजह लोगों का डर और लालच है। यह बात बिल्कुल सही है कि डर और लालच से धर्म परिवर्तन नहीं करना चाहिए लेकिन इसमें हिंदू और बाकी धर्म में अंतर क्यों? सभी धर्म परिवर्तन की वजह को डर या लालच बताना भी सही नहीं है। भारत में धर्म परिवर्तन की एक बड़ी वजह सूफियों की सादगी, जीवन शैली और उनसे जुड़ी चमत्कार की बातें हैं। यही वजह है कि भारत में जो सूफियों से जुड़ी अनगिनत जगहें हैं वहां बड़े पैमाने पर आज भी गैर मुस्लिम जाते हैं। दरअसल ऐसे लोगों को रोकने के लिए सीधे ना बोलकर बात घुमा कर की जाती है और बार-बार यह बताने की कोशिश की जाती है कि लोग डर या लालच से धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। एक तरफ आरएसएस इस तरह का बयान देता है और दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी की सरकार उसे सच मानकर कानून बना देती है। इसका नतीजा यह है कि बहुत से स्वाभाविक ढंग से धर्म परिवर्तन करने वाले लोग जेल में भी डाले गए हैं। श्री भागवत यह कह सकते थे कि धर्म परिवर्तन के बारे में कलेक्टर को फैसला नहीं करना चाहिए बल्कि यह इंसान की व्यक्तिगत आजादी की बात होनी चाहिए। ध्यान रहे कि धर्मांतरण के बारे में भारतीय जनता पार्टी की सरकारों में जो कानून बना है उसमें धर्म परिवर्तन करने वाले आदमी के लिए यह जरूरी है कि वह कलेक्टर के यहां आवेदन दे और कलेक्टर के फैसले के बाद ही वह धर्म परिवर्तन कर सकता है। मोहन भागवत का बयान लोगों को एक विशेष धर्म से धर्म परिवर्तन करने से रोकने के लिए डराने और रोकने का तरीका भी हो सकता है।
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