छपी-अनछपी: ट्रंप के बोल- ‘मोदी जानते हैं मुझे खुश रखना ज़रूरी’, उमर-शरजील को बेल नहीं

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। वेनेजुएला पर हमला करने और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद रविवार देर शाम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बयान दिया है कि वह जानते हैं कि ट्रंप खुश नहीं और “वह मुझे खुश रखना चाहते हैं।” लंबे समय से बिना ट्रायल जेल में कैद खालिद उम्र और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया हालांकि पांच दूसरे एक्टिविस्ट्स को ज़मानत मिली है। पटना में दिन दहाड़े लूटकांड के अभियुक्त की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

और, जानिएगा कि विदेश से व्हाट्सऐसाप कॉल का अब रोमिंग पैकेज लेना होगा जरूरी।

पहली ख़बर:

वेनेजुएला पर हमला करने और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद रविवार देर शाम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का तेवर कुछ अलग ही स्तर पर था। वह पूरी तरह आत्ममुग्ध थे। एक तरफ उन्होंने क्यूबा, ईरान, मेक्सिको, कोलंबिया, ग्रीनलैंड को धमकियां दी, तो दूसरी तरफ रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर भी नए टैरिफ लगाने की चेतावनी दी। भारत को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने जिस भाषा का इस्तेमाल किया, वह दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में असहजता को भी बता रहा है। यह भी संकेत मिलता है कि भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी समझौते को लेकर चल रही वार्ता किसी खास नतीजे की तरफ नहीं बढ़ रही है। ट्रंप ने एक तरफ दावा किया है कि अमेरिका के दबाव में भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है, तो दूसरी तरफ संकेत दिया कि भारत पर और ज्यादा शुल्क लगाने की तैयारी है। इसके लिए वह कानून बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अपने कुछ अधिकारियों और अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम के साथ पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी टैरिफ के कारण भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। लेकिन, सांथ ही यह भी जोड़ दिया कि अगर भारत ने रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की मदद नहीं की तो उस पर और ज्यादा शुल्क लगाया जाएगा। ट्रंप ने कहा-उन्होंने (भारत) मुझे खुश करने की कोशिश की है (रूस से कम तेल खरीद कर)। मोदी एक अच्छे व्यक्ति हैं। वह जानते हैं कि मैं खुश नहीं हूं। मुझे खुश करना जरूरी है। अगर वह (रूस के साथ) कारोबार करते हैं तो हम जल्द ही शुल्क बढ़ा सकते हैं।

क्या अमेरिका के अंदर घिर सकते हैं ट्रंप?

भास्कर के अनुसार वेनेजुएला पर हमला कर शेखी बघारने में जुटे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब ‘घर’ में ही घिर रहे हैं। वेनेजुएला पर हमला और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंधक बनाकर अमेरिका लाने पर विपक्षी डेमोक्रेट्स सांसदों ने ट्रम्प को पद से हटाने के लिए महाभियोग की तैयारी में है। सीनेट में विदेशी मामलों की कमेटी के अध्यक्ष ग्रेगरी मीक्स ने कहा, ट्रम्प का ये कदम एकतरफा और मनमानी भरा है। डेमोक्रेटिक पार्टी के लगभग एक दर्जन से ज्यादा सांसदों का कहना है कि जनवरी के अंत में कांग्रेस के सत्र में महाभियोग की तैयारी है। ट्रम्प की पार्टी की सांसद डेलिया रामीरेज ने भी वेनेजुएला पर हमले का विरोध किया है। रूस-चीन गुट के विरोध के बीच ब्रिटेन और जर्मनी ने भी ट्रम्प की कार्रवाई का खुले रूप से समर्थन नहीं किया है। इस बीच, ट्रम्प की धमकी पर कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्ताव पेट्रो ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा, अमेरिका हमला करता है तो हम मुंहतोड़ जवाब देंगे। इस बीच, ट्रम्प ने ग्रीनलैंड और क्यूबा पर अमेरिकी हमले की धमकी को दोहराया है।

मैं नेक इंसान, और आज भी वेनेजुएला का राष्ट्रपति: मादुरो

वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तारी के बाद पहली बार सोमवार को मेनहैटन कोर्ट में पेश किया गया। अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। मादुरो पर नार्को आतंकवाद फैलाने सहित कई आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट के समक्ष मादुरो ने कहा कि वह बहुत नेक इंसान हैं और आज भी वेनेजुएला के राष्ट्रपति हैं। मादुरो ने कहा कि उन्हें वेनेजुएला से अगवा किया गया है। मैं निर्दोष हूं। उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस ने भी आरोपों से इनकार किया। मादुरो ने अपनी पैरवी के लिए विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे के वकील की सेवाएं ली हैं।

उमर ख़ालिद, शरजील इमाम को जमानत नहीं, पांच को मिली

जागरण के अनुसार दिल्ली दंगों की साजिश में आरोपित उमर खालिद और शरजील इमाम फिलहाल जेल में रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दोनों को जमानत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के विरुद्ध पहली नजर में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला बनता है। हालांकि अदालत ने पांच अन्य आरोपितों गुलफिशां फातिमा, मीरान हैदर, शिफ्त्र उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को सशर्त जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि खालिद और इमाम संरक्षित गवाहों के बयान हो जाने या एक वर्ष बाद नए सिरे से जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। सभी आरोपित पांच वर्षों से जेल में हैं। मालूम हो कि आरोपित शरजील इमाम का घर जहानाबाद है।

ट्रायल में देरी जमानत देने का आधार नहीं: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगे से जुड़े मामले में शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज करते हुए अपने अहम फैसले में कहा है कि किसी मुकदमे के ट्रायल में देरी जमानत देने का आधार नहीं हो सकता है। आतंकवाद निरोधक कानून यानी गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत मुकदमों में, ट्रायल में देरी ‘ट्रंप कार्ड’ के रूप में काम नहीं करती। जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि यूएपीए की धारा 43 डी (5) यह आकलन करने के लिए न्यायिक जांच को पूरी तरह से नहीं रोकती है कि क्या ‘पहली नजर में’ कोई मामला बनता है। पीठ ने कहा कि न्यायिक जांच ‘आरोपी-विशिष्ट’ होती है। साथ ही, जमानत देने के चरण में बचाव पक्ष की दलीलों की जांच नहीं की जानी है।

पटना में दिन दहाड़े मर्डर

पटना के पत्रकार नगर थाने के उमा अस्पताल स्थित विद्यापुरी पार्क के पास बाइक सवार दो अपराधियों ने पीएनबी लूटकांड के मुख्य आरोपित 38 वर्षीय अमन शुक्ला उर्फ सत्यम उर्फ अमित कुमार की गोली मार कर हत्या कर दी. घटना सोमवार की शाम उस वक्त हुई, जब वह आठ वर्षीय बेटे अक्षय की फिजियोथेरेपी करवा कर घर लौट रहा था. पत्नी पूजा बेटे को लेकर पीछे बैठी थी. अस्पताल से 10 कदम आगे बढ़ते ही विद्यापुरी पार्क के पास घात लगाये बाइक सवार दो अपराधी पीछे से आये और उसे ओवरटेक कर रोक दिया. अपराधियों ने धमकाते हुए पीछे बैठे पत्नी को उतरने के लिए कहा और फिर उसे ताबड़तोड़ तीन गोलियां मार कर उसे मौत के घाट उतार दिया. इसके बाद बाइक सवार अपराधी 90 फुट की ओर भाग निकले.

रोमिंग पैकेज पर ही अब विदेशों से व्हाट्सअप कॉल

हिन्दुस्तान के अनुसार सिम के रोमिंग पैकेज पर ही अब विदेशों से व्हाट्सअप कॉल होगी। यानी विदेश जाने के बाद बिना रोमिंग पैकेज के व्हाट्सअप, टेलीग्राम आदि से कॉल नहीं कर सकेंगे। इस बाबत दूरसंचार विभाग ने सभी कंपनियों को पत्र लिख कर जानकारी दी है। इसमें सभी कंपनियों को 90 दिनों का समय दिया गया है। 90 दिनों के अंदर सभी कंपनियों को अपने उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी मैसेज और फोन करके बताना है। बता दें कि भी विदेश जाने पर नॉर्मल कॉल करना मुश्किल होता है, लेकिन व्हाट्सअप और टेलीग्राम से कॉल आसासन है। इसके अलावा फेसबुक मैसेंजर से भी कॉल की जाती है। लेकिन अब ये सारा कुछ फरवरी के बाद बंद हो जाएगा। दूरसंचार विभाग ने सभी कंपनियों को उपभोक्ता को देने वाली इसी सुविधा को बंद करने का आदेश दिया है। फरवरी के बाद विदेश जाने वाले मोबाइल धारी व्हाट्सअप कॉल तभी कर पायेंगे जब उनके पास रोमिंग पैकेज रहेगा।

कुछ और सुर्खियां:

  • एनएचएआई के पूर्व डीजीएम प्रभांशु शेखर की 2.85 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त
  • बांग्लादेश ने तेज गेंदबाज मुस्तफ़ीजुर रहमान को आईपीएल से बाहर किए जाने के बाद इसके टेलीकास्ट पर बैन लगाया
  • मणिपुर में कुछ दिनों की शांति के बाद फिर दो आईडी ब्लास्ट हुए, तनाव बढ़ा
  • बंगाल में एसआईआर के तहत तृणमूल कांग्रेस के सांसद देव दीपक अधिकारी और तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी तलब
  • सेकेंडरी टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी एसटीईटी का रिजल्ट जारी, 2.56 लाख कामयाब

अनछपी: उमर खालिद और शरजील इमाम को बिना ट्रायल 5 साल से ज्यादा जेल में रखने के बावजूद जमानत न मिलने की जो वजह सुप्रीम कोर्ट ने बताई है उससे शायद ही कोई इंसाफ़पसंद खुश नजर आया हो। बहुत से लोगों को लगता है कि ऐसा फैसला सुप्रीम कोर्ट ने किसी राजनीतिक दबाव में लिया होगा हालांकि सीधे तौर पर ऐसा कोई कहे तो उस पर अदालत की तौहीन का केस हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह तो कह दिया कि ट्रायल में देरी जमानत का आधार नहीं हो सकती लेकिन उसने इस पूरी प्रक्रिया में बिना ट्रायल किसी को कैद रखने के बारे में कुछ नहीं कहा। सुप्रीम कोर्ट के पक्ष में कुछ लोग यह कह सकते हैं कि उसने इसी ट्रायल को एक साल में पूरा करने की बात कही है लेकिन ध्यान देने की बात यह है कि इसके लिए कोई आदेश पारित नहीं किया। इसका मतलब यह हुआ कि अगर एक साल के बाद भी ट्रायल पूरा नहीं होता है तो जमानत के लिए तो अपील की जा सकती है लेकिन उस समय सुप्रीम कोर्ट कोई और दलील देकर जमानत से इंकार करे तो कोई क्या कर सकता है? इसीलिए यह आरोप लगा है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दरअसल उस राजनीतिक सोच के मुताबिक है जो सरकार चलाने वाली पार्टी की है। यह बात याद दिलाने की है कि सुप्रीम कोर्ट का काम इंसाफ दिलाना है, ना कि राजनीतिक नेतृत्व की सोच के मुताबिक काम करना। ऐसे में यह सवाल करना जरूरी हो जाता है कि आखिर किसी को कब तक बिना ट्रायल कैद रखा जा सकता है और सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामले में इंसाफ के लिए कौन सी दलील पसंद करेगा? ऐसे में तो सरकारी तंत्र किसी को ताउम्र बिना ट्रायल के जेल में रख सकता है? इसलिए अगर सुप्रीम कोर्ट यह भरोसा दिलाना चाहता है कि वहां से इंसाफ मिलेगा तो इस तरह के फैसले पर पुनर्विचार जरूरी है।

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