खेल नहीं DL: ड्राइविंग का बदलता पेशा और लाइसेंस के नए नियम

आपने कुछ दिनों पहले सुना होगा कि कुछ क्रिकेट खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया में ड्राइविंग कर पैसे कमा रहे। आपने होटलों में टोपी लगाए ड्राइवर को भी देखा होगा।
दूसरी तरफ अपनी गाड़ी रखने का चलन भी काफी बढ़ चुका है। ऐसे लोग या तो खुद गाड़ी चलाते हैं या इसके लिए ड्राइवर रखते हैं।
विदेशों की तरह भारत में भी ड्राइविंग एक पार्ट टाइम जॉब बन सकती है। अब तो ड्राइवर देने के लिए ऐप भी हैं।
इसके लिए सबको चाहिए डीएल यानी ड्राइविंग लाइसेंस।
सरकार की कोशिश है कि ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ट्रेनिंग को बेहतर बनाया जाए। इसके लिए ड्राइविंग स्कूल भी खोले जा रहे।
तो क्या डीएल के लिए नए नियम और कैसे इसे बिना दलाल के चक्कर में पड़े हासिल किया जा सकता है? हम ये सब जानेंगे अपने मेहमान मोहम्मद खालिद आलम उर्फ भुट्टो और ज़हीब अजमल से। खालिद आलम सीखने-सिखाने से जुड़े रहे हैं। बरसों से बिहारशरीफ में +2 तक का स्कूल चलाते हैं और इनका एक बीएड कॉलेज भी हैं। अब इन्होंने ड्राइविंग स्कूल भी खोला है।
ज़हीब ‘ड्राइवर साहब’ नाम से ऐप चलाते हैं जिसके जरिए ज़रूरत के हिसाब से ड्राइवर की सेवा ले सकते हैं ।
उनसे बात की है बिहार लोक संवाद के कंसल्टिंग एडिटर समी अहमद ने।

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