सरकार की प्राथमिकता चुनाव जीतना, बच्चों के भविष्य की चिंता नहीं

सलमान गनी

कोरोना महामारी और उसके बाद के लॉकडाउन ने सब से अधिक कहर शिक्षा पर बरपाया है। यह वह विभाग है जो अभी भी लॉकडाउन से पीड़ित है। बिहार में स्थिति और भी खराब है। बिहार में स्कूलों और कोचिंग संसथानों को लेकर राज्य सरकार बहुत चिंतित नहीं दिखती है। स्कूल, कॉलेज और कोचिंग खोलने के लिए केंद्र से अनुमति मिलने के बावजूद, बिहार में अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट दिशानिर्देश जारी नहीं किया गया है। जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 21 सितंबर से नवीं से बारहवीं तक की कक्षाएं खोलने की अनुमति दी थी, तो पटना के अधिकांश स्कूलों ने इसके लिए योजना बना ली थी। उस समय के अखबारों के अनुसार सेंट जेवियर्स, सेंत माइकल, बाल्डविन एकेडमी, लिट्रा वैली, सेंत ऐंस के अलावा, पटना के अधकांश स्कूल शिफ्ट-वार कक्षाएं चलाने के लिए बिल्कुल तैयार थे और बच्चों को नोटिस भी भेज चुके थे। लेकिन 20 सितंबर की रात को अचानक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव संजय कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने स्कूलों को फिर से खोलने के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया है। इसलिए, बिहार में स्कूल 21 सितंबर से नहीं खुलेंगे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में एक बैठक 22 सितंबर को आयोजित की जाएगी जिसमें नौवीं से बारहवीं कक्षा चलाने पर निर्णय लिया जाएगा। इसका नतीजा यह हुआ कि बच्चों को यह बताने के लिए जैसे-तैसे रातों रात एसएमएस भेजना पड़ा कि कल से आपका स्कूल नहीं खुल रहा है । मजे की बात यह कि 21 सितंबर को गलती से हाजीपुर में एक निजी स्कूल खोल दिया गया और इसके खिलाफ कार्रवाई भी हो गई। 22 सितंबर को शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक में बिहार में कुछ शर्तों के साथ नौवीं से बारहवीं कक्षा खोलने की अनुमति दी गई।

1 अक्टूबर की गाइडलाइन के अनुसार, केंद्र सरकार ने एक बार फिर स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को अनलॉक -5 के तहत 15 अक्टूबर से खोलने की अनुमति दी है। लेकिन तीन दिनों बाद भी राज्य सरकार ने इस संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं किया है। बिहार में शिक्षा क्षेत्र से लापरवाही और बेहिसी ऐसी है कि स्कूलों को फिर से खोलने के संबंध में न कोई नियम बनाए जा रहे हैं और न ये कहा जा रहा है कि स्कूल अभी बंद रहेंगे। सीबीएसई ने पहले अपने सिलेबस में 30 फीसदी की कमी की थी और अब इसे बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया गया है। आधे से ज्यादा शैक्षणिक सत्र समाप्त हो चुके हैं। बच्चों ने जैसे-तैसे स्कूल की परीक्षा दे दी है। अब उन की बोर्ड परीक्षा उन के सिर पर है. राज्य सरकार अभी भी चुनाव के नशे में है। उसे शायद यह भी याद नहीं है कि उन्हें बिहार के स्कूलों के बारे में निर्णय लेना है। चुनाव प्रचार में शिक्षा के बारे में बड़े बड़े दावे किये जा रहे हैं, लेकिन शिक्षा में हो रहे नुकसान को कम करने के लिए कोई भी गंभीर नहीं है।

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