100 साल पुरानी संस्था के पास 13 कर्मचारियों को वेतन भुगतान के लिए पैसा नहीं

सैयद जावेद हसन, बिहार लोक संवाद डाॅट नेट पटना

बिहार की राजधानी पटना के सदर गली इलाक़े में यतीमख़ाना अंजुमन ख़ादिमुल इस्लाम की स्थापना 1910 में हुई थी। इसके तहत यतीमख़ाना और हाईस्कूल चलते हैं। लेकिन सौ साल से भी ज़्यादा उम्र वाली इस संस्था के पास इतना भी पैसा नहीं है कि वह अपने टीचिंग और नन टीचिंग स्टाफ़ समेत कुल 13 कर्मचारियों को 5 माह की तंख़्वाह दे सके।

इसके पीछे की असल वजह अंजुमन में चल रहा कमिटी-कमिटी का झगड़ा है। दो कमिटी है। हर एक कमिटी का प्रेसिंडेंट और सेक्रेटरी है। कुछ बैंक एकाउंट्स हैं जिनपर दोनों का क़ब्ज़ा है। इसके बावजूद यतीमख़ाना और स्कूल के विकास का काम ठप पड़ा है।

हालत ये है कि यतीमख़ाना और स्कूल में कार्यरत कर्मचारी पैसे-पैसे को मुहताज हैं। इन्हें 5 महीने से तंख़्वाह नहीं मिली है। हाल ही में गठित एक कमिटी ने यतीमख़ाने के नाम पर एक नया एकाउंट खुलवाकर 13 कर्मचारियों को 5 माह की बक़ाया तंख़्वाह की अदायगी के लिए चेक दिया। लेकिन जब कर्मचारी चेक लेकर संबंधित ग्रामीण बैंक गए तो पता चला कि एकाउंट ब्लाॅक कर दिया गया है।

इस सिलसिले में चेक पर सेक्रेटरी की हैसियत से दस्तख़त करने वाले एडवोकेट हुसैन मजीद ने बिहार लोक संवाद डाॅट नेट को फ़ोन पर बताया कि एकाउंट को एडवोकेट मुश्ताक़ ने ब्लाॅक करा दिया है। एडवोकेट मुश्ताक़ एक दूसरी कमिटी के सेक्रेटरी हैं। हुसैन मजीद ने बताया कि उनकी कमिटी के लोगों ने अपने स्तर से पैसा इकट्ठा किया था और नया बैंक एकाउंट खुलवाकर चेक जारी किया था।

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट ने जब एडवोकेट मुश्ताक़ से फ़ोन पर उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने फ़ोन रिसीव नहीं किया।

अब चेक हाथ में घूम रहे कर्मचारी परेशान हैं कि वो क्या करें और किसके पास जाएं।

अंजुमन की आमसभा के सदस्य अली इमाम भारती ने कमिटी का झगड़ा ख़त्म करके चर्मचारियों का वेतन भुगतान करने और यतीमख़ाना और स्कूल के विकास पर ध्यान केन्द्रित करने की मांग की है।

लेकिन इस मशहूर अक़्लीयती संस्थान की बदहाली तब तक दूर नहीं होगी, जब तक स्थानीय लोग मूकदर्शक बनकर सब कुछ देखते रहेंगे।

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