मुस्लिम मुक्त होगा वक्फ बोर्ड, चेयरमैन होगा कोई गैर मुस्लिम, पुश्तैनी कब्रिस्तान मुसलमानों के लिए हो जाएंगे बंद

सैयद जावेद हसन
हेडलाइन पढ़कर आपको हमारी बातें अटपटी या सनसनीखेज लग रही होंगी। लेकिन ऐसा नहीं है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने अगर मुसलमानों के साथ धोखाधड़ी बंद नहीं की, तो आने वाले दिनों की सच्चाई यही होगी। तब कोई अलहाज मोहम्मद इर्शादुल्लाह बिहार स्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड का या सैयद अफजल अब्बास शीया वक्फ बोर्ड का चेयरमैन नहीं होगा, बक्लि मोदी, झा, सिन्हा, चौधरी, पटेल सरनेम वाले लोगों के नाम वक्फ बोर्ड के बोर्ड पर दर्ज होंगे। इसके साथ ही, उन पुश्तैनी कब्रिसतानों के दरवाजे, जहां मुसलमानों की कई पीढ़ियां दफ्न होती आ रही हैं, मुसलमानों के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इनमें वो कब्रिस्तान भी शामिल होंगे जिनकी घेराबंदी कराने का जिक्र अक्सर नीतीश कुमार करते रहते हैं।

बिहार लोक संवाद ने वक्फ संशोधन बिल 2024 पर गठित ज्चायंट पार्लियामेंट्री कमिटी यानी जेपीसी की रिपोर्ट के चंद बेहद खतरनाक प्रावधानों पर वक्फ वेलफेयर फोरम के चैयरमैन जावेद अहमद से बात की। हमने इस सिलसिले में बिहार स्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड और शीया वक्फ बोर्ड के चैयरमैन से भी बात की। ये दोनों वक्फ बोर्ड के वजूद को लेकर काफी फिक्रमंद नजर आए। हम आपको जेपीसी में शािमल कांग्रेस एमपी डॉ. मोहम्मद जावेद की आशंकाएं भी सुनाएंगे। पहले बात करते हैं, जावेद अहमद की जो बता रहे हैं कि मोदी सरकार आखिर संशोधित कानून से करना क्या चाहती है।

बिहार स्टेट शीया वक्फ बोर्ड के चैयरमैन सैयद अफजल अब्बास को अंदेशा है कि पार्लियामेंट से मुसलमानों को इंसाफ नहीं मिलेगा। ऐसे कई लोग होंगे जो इंसाफ के लिए सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे।

बिहार स्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अलहाज मोहम्मद इर्शादुल्लाह को आशंका है कि मुसलमानों से उनके पुश्तैनी कब्रिस्तान छीन लिए जा सकते हैं।

जावेद अहमद कहते हैं कि भले ही पुश्तैनी कब्रिस्तान वक्फ बोर्ड में दर्ज हों लेकिन उनकी मिल्कियत अगर रेवेन्यू डिपोर्टमेंट की है तो विवाद खड़ा हो सकता है।

सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन कहते हैं कि ये सारी जमीनें वक्फ बोर्ड की हैं।

जावेद अहमद कहते हैं कि खतरा सिर्फ पुश्तैनी कब्रिस्तान पर नहीं है, बल्कि वक्फ शुदा जितने मजहबी मकामात और जायदाद हैं, उन सभी पर सरकार अपना कब्जा जमा लेगी।

एक बहुत बड़ा मसला सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड या स्टेट वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम लोगों की नुमाइंदगी का है। इर्शादुल्लाह कहते हैं कि पटना में हुई जेपीसी की बैठक के दौरान उन्होंने अध्यक्ष जगदंबिका पाल से कहा था कि बोर्ड में किसी गैर मुस्लिम को नहीं होना चाहिए।

जावेद अहमद कहते हैं कि वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम मेम्बर के होने और वक्फ करने के लिए पांच साल का मुसलमान होने की शर्त एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं।

जावेद अहमद सवाल उठाते हैं कि क्या नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू वक्फ के मामले में मुसलमानों के साथ खड़े होंगे?

इस सवाल के जवाब में इर्शादुल्लाह कहते हैं कि नीतीश कुमार देश के नंबर वन सेक्यूलर लीडर हैं और वो अगर एक बार फिर मुख्यमंत्री बनते हैं तो वो मुसलमान का नुकसान नहीं होने देंगे। कुछ ऐसी ही बातें अफजल अब्बास ने भी कहीं।

जेपीसी में शामिल कांग्रेस के एमपी डॉक्टर मोहम्मद जावेद कहते हैं कि सोकॉल्ड सेक्यूलर पार्टियां वक्फ इम्लाक की लूट योजना का हिस्सा बन गई हैं।

डॉक्टर जावेद ये भी कहते हैं कि मुसलमानों के बाद अन्य धर्मों की संपत्ति को लूटने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

अब आपको जेडीयू में चल रही खींचतान के बारे में बताते चलें। बिहार लोक संवाद के सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार अपनी ही पार्टी के कुछ दबंग नेताओं के सामने बेबस हैं। इनमें ललन सिंह, विजय कुमार चौधरी और संजय झा शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार को खतरा है कि अगर वो मुसलमानों की तरफदारी करते हुए वक्फ संशोधन बिल का विरोध करते हैं तो उनके कई सांसद टूट कर भाजपा में चले जाएंगे। ये वो सांसद हैं जो नजरियाती तौर भाजपा के करीब हैं। यही वजह है कि नीतीश कुमार इस मुद्दे पर खामोशी अख्तियार किए हुए हैं। ऐसा नहीं है कि भाजपा के नजरियात से प्रभावित जेडीयू नेताओं को ये पता नहीं है कि वक्फ के मामले पर मुसलमान अगर नाराज हो गए तो वो बिहार विधान सभा चुनाव में जेडीयू को वोट नहीं देंगे। दरअसल, इन नेताओं को मुस्लिम वोट की चिंता ही नहीं है। वो चाहते हैं कि वोटर का पोलराइजेशन हो जाए और बहुसंख्यक वर्ग एक तरफ हो जाए। इन हालात में मुस्लिम लीडरशिप वक्फ की लड़ाई को सियासी मैदान में कैसे लड़ेगी, ये देखने वाली बात होगी। ये मान लेने में कोई मुजायका नहीं कि नीतीश का पहले जैसा दौर खत्म हो चुका है।

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