छपी-अनछपी: शेयर बाजार में ब्लडबाथ, अलकायदा मामले में तीन लोग 9 साल बाद बरी
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। शेयर बाजार में फरवरी का आखिरी कारोबारी सत्र ब्लैक फ्राइडे में बदल गया और निवेशकों को ब्लडबाथ का सामना करना पड़ा। अलकायदा से संबंध के आरोप में 9 साल बाद जमशेदपुर की अदालत ने तीन लोगों को बरी किया। बिहार के आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि अर्थव्यवस्था 14.5% की दर से बढ़ रही है। पीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी सेवा ठप की।
और, जानिएगा कि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी ने दलितों का वर्गीकरण किस आधार पर करने की वकालत की।
भास्कर के अनुसार शेयर बाजार में फरवरी महीने और सप्ताह के आखिरी कारोबार दिन शुक्रवार को भूचाल आ गया। सेंसेक्स 1414.33 अंक गिरकर 73198 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी लगातार आठवें दिन गिरावट देखी गई और 420 अंक टूट कर 22124 पर आ गया। सेंसेक्स व निफ्टी की यह इस वर्ष की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट है। दोनों फरवरी में 6% टूट चुके हैं। 27 फरवरी लगातार पांचवा महीना रहा जब बाजार में गिरावट रही। ऐसा 28 साल पहले हुआ था। बाजार के एक्सपर्ट बता रहे हैं कि कनाडा और मेक्सिको के साथ चीन के उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की अमेरिका की घोषणा का असर शेयर मार्केट पर पड़ा है।
पांच महीनों में निवेशकों को 95 लाख करोड़ रुपये का नुकसान
बीते साल 27 सितंबर को दोनों सूचकांक अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचे थे। सेंसेक्स ने 85,978.25 अंक और निफ्टी ने 26,277.35 अंक का शिखर छुआ था। इस अवधि में सेंसेक्स जहां 17.45 फीसदी टूट चुका है, वहीं निफ्टी में 18.70 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। इस अवधि के दौरान पांच महीनों में निवेशकों को 95 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। शुक्रवार को निवेशकों की संपत्ति में करीब 8.82 लाख करोड़ की गिरावट आई है।
अलकायदा मामले में मौलाना कटकी समेत 3 बरी
हिन्दुस्तान के अनुसार जमशेदपुर के एडीजे-वन विमलेश कुमार सहाय की अदालत ने शुक्रवार को अब्दुल रहमान कटकी, मो समी और मौलाना कलीमुद्दीन मुजाहिरी को बरी कर दिया। झारखंड में अलकायदा के इंडियन सब कंटिनेंट मॉड्यूल (एक्यूआईएस) के गठन और उसे राज्य में विस्तार करने के आरोप में 25 जनवरी 2016 को बिष्टूपुर थाने में केस दर्ज कर इन्हें गिरफ्तार किया गया था। बिष्टूपुर थाने में दर्ज केस में अब्दुल समी उर्फ उजरत उर्फ हासन, मोहम्मद अब्दुल रहमान उर्फ मौलाना मंसूर उर्फ कटकी, अब्दुल मसूद अकरम शेख उर्फ मसूद एवं राजू उर्फ नसीम अख्तर और बाद में मौलाना कलीमुद्दीन मुजाहिरी को आरोपी बनाया गया था। कटकी और समी के अधिवक्ता दिलीप महतो ने बताया कि मामले में 17 गवाहों में पुलिस के 15 कर्मी समेत दो अन्य गवाह थे। पुलिसवालों ने पहचान की थी, लेकिन वे यह नहीं सिद्ध कर पाए कि किसी ने भौतिक रूप से पहले अब्दुल रहमान कटकी, समी या फिर कलीमुद्दीन को कभी देखा था। इस आधार पर कोर्ट ने इनपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें बरी कर दिया।
बिहार की आर्थिक विकास दर 14.5%
प्रभात खबर के अनुसार अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में बिहार देश में सबसे तेजी से बढ़ाने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर है। बिहार की अर्थव्यवस्था 14.50% की दर से बढ़ रही है। वहीं पिछले वर्ष की तुलना में प्रति व्यक्ति आय में भी 12.8% की बढ़ोतरी होने की संभावना है और यह बढ़कर 66828 रुपए होने का अनुमान है। सोमवार को उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने विधानमंडल के दोनों सदनों में 2024-25 का आर्थिक सर्वे पेश किया।
पीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी सेवा ठप की
हिन्दुस्तान के अनुसार पीएमसीएच में 180 जूनियर डॉक्टरों (इंटर्न) के तीन घंटे के कार्य बहिष्कार के कारण ओपीडी सेवा पूरी तरह ठप रही। चार महीने से स्टाइपेंड नहीं मिलने से नाराज डॉक्टरों ने शुक्रवार को कार्य बहिष्कार किया। इसके कारण बिना इलाज कराए लगभग डेढ़ हजार मरीजों को वापस लौटना पड़ा। आमतौर पर पीएमसीएच में प्रतिदिन दो हजार से 21 सौ मरीजों का ओपीडी में इलाज होता है। जूनियर डॉक्टरों ने सुबह 9 बजे के पहले राजेन्द्र सर्जिकल ब्लॉक स्थित रजिस्ट्रेशन काउंटर पर ताला जड़ दिया। जूनियन डॉक्टरों का कहना है कि हर महीने 20 हजार रुपये स्टाइपेंड मिलती है, लेकिन बीते नवंबर महीने से अब तक एक रुपये भी नहीं मिला है।
रूस से जंग खत्म करने के मुद्दे पर ट्रंप-जेलेन्सकी में खुलेआम बहस
भास्कर के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेन्सकी के बीच व्हाइट हाउस में शुक्रवार देर रात यूक्रेन युद्ध को लेकर मीडिया के सामने ही गरमा गरम बहस हो गई। ट्रंप ने जेलेन्सकी पर सीधा आरोप जड़ा कि वह अमेरिकी मदद को लेकर शुक्रगुजार नहीं हैं। उन्होंने कहा, “लगता है कि जेलेन्सकी अमेरिका की मध्यस्थता में रूस के साथ युद्ध विराम को तैयार नहीं हैं। जेलेन्सकी तीसरा विश्व युद्ध करने पर तुले हैं।” ट्रंप ने चेताया कि यदि जेलेन्सकी युद्ध विराम के लिए राजी नहीं होते तो अमेरिका यूक्रेन को मदद देना बंद कर देगा। यूक्रेन अपना अंजाम भुगतेगा। ट्रंप ने कहा, यूक्रेन के सैनिक मारे जा रहे हैं। यूक्रेन किसी भी हालत में नहीं जीतने वाला।
जीतन राम मांझी ने शैक्षणिक आधार पर दलित वर्गीकरण की मांग की
जागरण के अनुसार हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा यानी ‘हम’ के संरक्षक एवं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने शुक्रवार को गांधी मैदान में आयोजित दलित समागम रैली में कहा कि दलितों को शैक्षणिक आधार पर वर्गीकृत कर आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुसूचित समाज में कई ऐसी उपजातियां हैं जिनकी साक्षरता दर महज 7 से 8% है। ऐसे में 20% से कम साक्षर लोगों को अलग वर्गीकृत कर आरक्षण दिया जाए और 20% से अधिक साक्षर लोगों को अलग आरक्षण मिले। मांझी ने कहा कि राजनीति चाबी है और विकास ताला। चाबी लीजिएगा, तभी ताला खुलेगा।
कुछ और सुर्खियां:
- पटना समेत बिहार के 22 जिलों में गुरुवार की रात भूकंप के झटके लगे, इस साल तीसरी बार
- बिहार में रमजान का चांद नहीं दिखा, 2 मार्च को पहला रोजा
- उत्तराखंड के चमोली में टूटा ग्लेशियर, 57 मजदूर आए चपेट में, 24 अब भी फंसे
- बिहार में होली को लेकर पुलिसकर्मियों की छुट्टी पर 10 से 18 मार्च तक रोक
- बिहार ट्रक ओनर एसोसिएशन की तरफ से दो-तीन मार्च को सांकेतिक हड़ताल, सरकारी अधिकारियों पर शोषण का आरोप
अनछपी: मुस्लिम समाज को यह शिकायत रहती है कि सरकारी एजेंसियां बेकसूर मुसलमानों को आतंकवाद के कानून के तहत गिरफ्तार करती है और जब उनकी गिरफ्तारी होती है तो मीडिया उसे बढ़ा चढ़ा कर पेश करता है जबकि उनके बरी होने की खबर दबा दी जाती है। ऐसा ही कुछ जमशेदपुर की एक अदालत से आए फैसले में देखने को मिलता है। 25 जनवरी 2016 को जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाने में केस कर तीन लोगों को अलकायदा के इंडियन सब कॉन्टिनेंट माड्यूल के गठन और उसे राज्य में विस्तार देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार होने वाले थे अब्दुल समी, मौलाना मंसूर कटकी, अब्दुल मसूद अकरम और दो और लोग। कटकी और समी के वकील दिलीप महतो ने बताया कि कोर्ट ने इन आरोपों को खारिज कर उन्हें बरी कर दिया। बरी होने वाले में तीसरे शख्स थे कलीमुद्दीन मुजाहिरी। दरअसल दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने कटकी को ओडिशा और मेवात से अब्दुल समी को गिरफ्तार किया था। नौ साल तक गिरफ्तारी की वजह से इन तीनों का जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई कौन करेगा, मीडिया में कभी इसकी चर्चा नहीं होती। अदालत से बरी होने को दिल्ली पुलिस की ज्यादती मानी जाए या उसकी अयोग्यता? मुस्लिम समाज की यह शिकायत रही है कि अधिकतर मामलों में पुलिस और खासकर दिल्ली पुलिस बेकसूर लोगों को गिरफ्तार करती है, लंबा केस चलता है, लोग रिहा होते हैं, लेकिन पुलिस पर कोई कार्रवाई नहीं होती। यह मानना पड़ेगा कि या तो पुलिस इतनी निकम्मी है कि अपने ही आरोप को साबित करने में नाकाम होती है या उसकी नीयत इतनी खराब है कि वह बेकसूर लोगों को फंसाती है। इन मामलों में कानून के उस बुनियादी सिद्धांत का भी ध्यान नहीं रखा जाता जिसमें दोष साबित होने तक लोगों को निर्दोष माना जाता है बल्कि इसके उलट बिना दोष साबित हुए ही आरोपितों को दोषी करार दिया जाता है। पुलिस के रवैया के साथ-साथ मीडिया के रवैया की चर्चा भी जरूरी है क्योंकि इससे समाज में बहुत बुरा असर पड़ता है और जब कुछ हद तक इस असर को कम करने का मौका आता है यानी जब लोग बरी होते हैं तब उस खबर को मीडिया दबा जाता है। ऐसी खबरों को स्थानीय अखबारों में तो जगह मिल जाती है लेकिन उस राज्य से बाहर और राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी खबरों को जगह नहीं मिलती है, जो बेहद खतरनाक रवैया है।
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