छ्पी-अनछपी: ईरान पर इसराइल के हमले से भारी तनाव, अहमदाबाद प्लेन क्रैश- ब्लैक बॉक्स मिला
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। ईरान पर इसराइल के हमले और ईरान के जवाबी हमले से पश्चिम एशिया में भारी तनाव पैदा हो गया है। अहमदाबाद में हादसे के शिकार जहाज का ब्लैक बॉक्स मिला है। बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 62 लाख लाभार्थियों को पैसे भेजे गए।
पहली खबर
हिन्दुस्तान के अनुसार इसराइल ने शुक्रवार तड़के और देर रात ईरान पर भीषण हवाई हमले किए। इसराइल ने चार परमाणु ठिकानों, दो सैन्य समेत करीब 100 स्थानों को निशाना बनाया। इन हमलों में ईरान ने चार सैन्य प्रमुख और छह वैज्ञानिकों के मारे जाने की पुष्टि की है। दूसरी तरफ, ट्रंप प्रशासन ने कहा कि इन हमलों में उसका कोई हाथ नहीं है। इसराइल के मुख्य सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा कि 200 लड़ाकू विमानों ने हमले किए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसराइली हमलों में रिवॉल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख होसैन सलामी, सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मोहम्मद बाघेरी, एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर आमिर अली हाजीजादेह सहित 20 वरिष्ठ कमांडर मारे गए। ईरान के नूरन्यूज के अनुसार, तेहरान में हमलों में 78 लोग मारे गए, जबकि 329 घायल हो गए। ईरान की मीडिया के अनुसार, तेहरान में कई स्थानों पर शुक्रवार देर रात फिर धमाकों की आवाज सुनी गई। तेहरान प्रांत के पश्चिम में विस्फोटों की खबरें मिली हैं। ईरानी समाचार नूर न्यूज ने बताया कि फोर्डो परमाणु संवर्धन स्थल के पास दो विस्फोट सुने गए। ईरान ने शुक्रवार देर रात दावा किया कि उसने इजरायल के दो लड़ाकू विमानों को मार गिराया है और पायलटों को हिरासत में ले लिया गया है। हालांकि, इजरायली सेना के प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि उसका कोई विमान नहीं गिराया गया है और न ही कोई पायलट ईरान की हिरासत में हैं।
हमले रोकने में अमेरिकी सेना ने मदद की
एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरानी मिसाइलों को मार गिराने में मदद की। समाचार एजेंसी रायटर ने शुक्रवार देर रात यह जानकारी दी। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी कि ईरान परमाणु समझौता कर ले, “इससे पहले कि कुछ भी न बचे। जिसे कभी ईरानी साम्राज्य के रूप में जाना जाता था, उसे बचा ले। अब और विनाश नहीं, बस कर डालो।”
मोसाद की चालबाजी
इसराइल ने शुक्रवार को ईरान पर लगभग 100 ठिकानों पर लड़ाकू विमानों से बम बरसाए। अधिकारियों ने बताया कि इस एयर स्ट्राइक से पहले ही मोसाद ने हथियार और ड्रोन ईरान के भीतर पहुंचा दिए गए थे और समय आते ही उनसे हमला किया गया। इसराइली सेना से जुड़े दो अधिकारियों ने अपने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर इस खुफिया मिशन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश की खुफिया एजेंसी मोसाद ने हमलों से पहले ही तस्करी के जरिये ड्रोन और हथियार ईरान भेज दिए थे। इनका इस्तेमाल वहां आंतरिक सुरक्षा को निशाना बनाने के लिए किया गया।
भारत ने चिंता जतायी, संयम बरतने को कहा
भारत ने इसराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष पर चिंता प्रकट की है। इस दौरान दोनों देशों से आक्रामक कार्रवाई से बचने का आग्रह किया है। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम ईरान और इसराइल के बीच हालिया घटनाक्रम से बहुत चिंतित हैं। भारत ने कहा कि हम परमाणु स्थलों पर हमलों से संबंधित रिपोर्ट सहित उभरती स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। तनाव को कम करने और अंतर्निहित मुद्दों को हल करने के लिए बातचीत और कूटनीति के तरीके अपनाएं।
शेयर बाजार पर बुरा असर
ईरान के सैन्य ठिकानों पर इसराइली हमले के बाद शुक्रवार को दुनियाभर के शेयर बाजारों में उथल-पुथल मच गई। इसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा और इनमें लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट आई। सेंसेक्स 573 अंक और निफ्टी 170 अंक टूट गया। इससे पहले सुबह कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स 1300 अंक और निफ्टी 400 अंक से अधिक की तेज गिरावट के साथ खुले। हालांकि,बाद में दोनों सूचकांक कुछ संभल गए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 573.38 अंक यानी 0.70 प्रतिशत गिरकर 81,118.60 अंक पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी भी 169.60 अंक गिरकर 24,718.60 अंक पर बंद हुआ। बाजार बंद होने पर सेंसेक्स के 30 में से 26 शेयर लाल निशान पर थे। पिछले दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स कुल 1,396.54 अंक टूट चुका है।
अहमदाबाद प्लेन क्रैश- ब्लैक बॉक्स मिला
भास्कर के अनुसार अहमदाबाद विमान हादसे के बाद केंद्र सरकार ने बोइंग पर सख्ती शुरू कर दी है। सरकार ने तय किया है कि टेक ऑफ से पहले बोइंग ड्रीमलाइनर विमान की विशेष अतिरिक्त जांच की जाएगी। नागरिक उड्डयन निदेशालय ने शुक्रवार को इसके आदेश जारी किए हैं। इसमें एयर इंडिया को आदेश दिया गया है कि वह 15 जून से जेईएनएक्स इंजन वाले बोइंग ड्रीमलाइनर बेड़े की हर उड़ान से पहले विशेष जांच प्रक्रिया लागू करें। शुक्रवार को भारत समेत तीन देशों की आठ जनशियों ने विमान हादसे की जान शुरू कर दी। शुक्रवार को ही विमान का एक ब्लैक बॉक्स मिल गया। दूसरे की तलाश जारी है हादसे से पहले विमान के पायलट सुमित सभरवाल का एटीसी को भेजा गया आखिरी मेडे मैसेज भी सामने आया है। इस बीच शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। उन्होंने एयरपोर्ट पर बैठक भी की। दूसरी तरफ बिजी मेडिकल कॉलेज में करने वाले मेडिकल स्टूडेंट और अन्य की संख्या 27 से बढ़कर 34 हो गई। इससे मृतक संख्या 275 हो गई है।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन खाते में गयी
प्रभात खबर के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के बारे में लोगों को बताने का निर्देश समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को दिया है। मुख्यमंत्री नहीं है बात सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना और मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के लाभों के खाते में 271 करोड़ 15 लाख रुपए की राशि का डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर करने के बाद कही। उन्होंने कहा कि बहुत खुशी की बात है की पांच सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के कुल 61 लाख 29 हजार 548 लोगों को राशि ट्रांसफर की गई है।
कुछ और सुर्खियां:
- अहमदाबाद प्लेन क्रैश में पटना निवासी केबिन क्रु मेंबर मनीषा की मौत
- मंगनी लाल मंडल होंगे राजद के बिहार प्रदेश अध्यक्ष, लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव ने लगाई मुहर
- मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट नीट यूजी का रिजल्ट आज जारी हो सकता है
- सोना ₹2200 उछलकर फिर एक लाख के पार
अनछपी: ईरान पर इसराइल के हमले से एक बार फिर यह बात साबित होती है कि अगर आपके पास ताकत हो तो कोई भी बहाना बनाकर किसी भी देश पर हमला कर सकते हैं। उदाहरण के लिए अमेरिका ने इराक पर वेपंस ऑफ मास डिस्ट्रक्शन का बहाना बनाकर हमला किया था हालांकि वहां ऐसा कुछ नहीं मिला। इसी तरह इसराइल यह बहाना बना रहा है कि ईरान न्यूक्लियर बम बनाने वाला है जो उसकी सुरक्षा के लिए खतरा है। इसराइल का यह बहाना दरअसल अमेरिका का बहाना है और अमेरिका की शह और मदद से ही इसराइल इस काबिल है कि वह ईरान पर आसानी से हमले कर के भी बच जाता है। अगर यह बात मान भी ली जाए कि ईरान को न्यूक्लियर बम नहीं बनाना चाहिए तो क्या इससे इसराइल को यह अधिकार प्राप्त हो जाता है कि वह ईरान पर हमले कर दे? इसराइल फलस्तीन और ख़ासकर ग़ज़ा में लगातार क़त्ले आम कर रहा है जिसमें आम आदमी, औरतों, बच्चों, पत्रकारों और डॉक्टरों- सब को निशाना बनाया गया है। इंसानियत की बात तो यह होती कि इसराइल के राजनीतिक और सैनिक नेताओं पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में जनसंहार का मुकदमा चलता और इसराइल का पूरी दुनिया बायकॉट करती। लेकिन एक तो अमेरिका इसराइल का सबसे बड़ा रक्षक और उसके हर अत्याचार का समर्थक है, जिसे वह उसकी आत्मरक्षा के अधिकार का नाम देता है। दूसरी बात यह है कि दुनिया इतनी स्वार्थी है कि उसे इंसानियत के कत्ल पर भी नहीं बोलने में फायदा नजर आता है। भारतीय विदेश नीति के लिए चुनौतीपूर्ण बात यह है कि वह इसराइल को भी खुश रखना चाहता है और ईरान को भी नाराज नहीं करना चाहता। ऐसे समय में अगर भारत दोनों देशों के बीच शांति बहाल करने में कामयाब होता है तो यह भारतीय विदेश नीति के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। इसकी संभावना तो कम है लेकिन भारत अगर इसराइल को उसके बेजा हमले और अत्याचार से रोकने के लिए तैयार कर दे तो यह भी कम बड़ी बात नहीं होगी। इसराइल के हर हमले के बाद ईरान बदला लेने की बात करता है लेकिन लगातार अपने शीर्ष कमांडरों को खोने के बाद भी वह इसमें कामयाब नहीं हो पा रहा। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि जॉर्डन जैसे देश इसराइल को ईरान पर अपनी सैन्य कार्रवाई करने में मदद दे रहे हैं। दुनिया भर में लोकतंत्र के नाम पर अपनी वाहवाही करने वाला अमेरिका मध्य पूर्व में तानाशाहों का समर्थक बना हुआ है और इसकी वजह यह है कि वह इन तानाशाहों के जरिए अपनी तानाशाही चला रहा है।
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