बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। 27 लाख लोगों को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के नाम पर वोट से वंचित कर देने वाले चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को ‘चुन’ लिया। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके के स्टालिन पर टीवीके के विजय ने जीत हासिल कर ली। असम में लगातार नफरती भाषण देने में बदनाम हिमंता बिस्व शर्मा ने एक बार फिर सरकार बना ली है। केरल में सीपीएम गठबंधन को हराकर कांग्रेस गठबंधन ने 10 साल बाद सरकार में वापसी की है।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने भारतीय राजनीति की दिशा और दशा दोनों बदल दी है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य किला ढहा दिया, वहीं तमिलनाडु में अभिनेता विजय की धमाकेदार एंट्री ने पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के समीकरणों को पलट दिया। असम में भाजपा ने जीत की हैट्रिक लगाकर पार्टी की जमीनी पकड़ और पुख्ता की। वहीं, केरल में कांग्रेस नीत यूडीएफ की सत्ता में वापसी से देश के नक्शे से वामपंथी सरकारों का पूरी तरह सफाया हो गया। निर्वाचन आयोग की ओर से रात दस बजे तक जारी परिणामों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में भाजपा ने दो सौ के आंकड़े के करीब पहुंचते हुए न केवल तृणमूल कांग्रेस का गढ़ ध्वस्त किया, बल्कि भाजपा की सबसे बड़ी और अहम विजय का इतिहास भी रच दिया। खुद ममता बनर्जी भवानीपुर सीट हार गईं। यह बदलाव विपक्ष की राजनीति को झकझोरने वाला है।
ममता बोलीं- बीजेपी ने 100 सीटें लूटीं
जागरण के अनुसार बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत पर मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग की मिलीभगत से 100 सीटों पर फर्जीवाड़ा करके हमें हराया गया है। तृणमूल की करारी हार के बीच चेहरे पर उदासी लिए अनियंत्रित हुई ममता ने सोमवार देर शाम अपने विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर. के मतगणना सेंटर शेखावत मेमोरियल स्कूल के बाहर पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि 100 सीटों पर लूट हुई है। भाजपा को दानवों की पार्टी बताते हुए ममता ने कहा कि एसआईआर के जरिए लाखों मतदाताओं के नाम काटने से लेकर ईवीएम मशीनों तक में वोटों की लूट की गई है। ममता ने केंद्रीय बलों पर मतगणना केंद्र पर उन्हें धक्का देने व पिटाई का भी गंभीर आरोप लगाया। दावा किया कि मतगणना केंद्र पर उन्हें मारा-पीटा गया।
असम और बंगाल में भाजपा ने चुराए चुनाव: राहुल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को आरोप लगाया कि असम और बंगाल ऐसे स्पष्ट मामले हैं जहां भाजपा ने चुनाव आयोग की मदद से चुनाव “चुराए” हैं। राहुल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “असम और बंगाल ऐसे स्पष्ट मामले हैं जहां भाजपा ने चुनाव आयोग की मदद से चुनाव चुराए हैं। हम ममता जी से सहमत हैं। बंगाल में 100 से अधिक सीटें चुराई गई हैं।” लोकसभा में नेता विपक्ष ने कहा, ‘हमने यह तरीका पहले भी देखा है। मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और लोकसभा चुनाव 2024 आदि।” उन्होंने कहा, “चुनाव चोरी, संस्था चोरी अब और चारा ही क्या है।” गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने बंगाल चुनावों में भाजपा की भारी जीत को अनैतिक बताया और आरोप लगाया कि सौ से अधिक सीटों पर जनादेश “लूटा” गया है। साथ ही कहा हम जोरदार वापसी करेंगे।”
विजय थलापति की टीवीके ने इतिहास रचा
भास्कर के अनुसार तमिलनाडु चुनाव के नतीजों ने द्रविड़ राजनीति के दशकों पुराने किले को ढहा दिया है। 1967 से 2021 के चुनाव तक यहां कभी द्रमुक तो कभी अन्नाद्रमुक ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। मगर, 2026 के नतीजों में अभिनेता विजय थलापति की नई टीवीके पार्टी (2 फरवरी 2024 में बनी) ने 107 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है। द्रमुक बमुश्किल 60 का आंकड़ा छू पाई और अन्नाद्रमुक तो 47 पर ही सिमट गई। सबसे ज्यादा चौंकाने वाले नतीजे मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सीट कोलाथुर के रहे। वहां टीवीके के वीएस बसु ने स्टालिन को 8,795 वोट के भारी अंतर से हरा दिया।
सोना देने का वादा किया था
टीवीके ने गरीब परिवारों की कन्याओं के विवाह के लिए 8 ग्राम सोना मुफ्त देने का ऐलान किया था। साथ ही शादी के खर्च के लिए 1 लाख की नकद सहायता देने का भी वादा किया था। युवाओं और महिलाओं ने इन वादों पर भरोसा जताया।
केरल में 13 मंत्री हारे
केरल विधानसभा चुनाव में सीएम ‘पिनराई विजयन के नेतृत्त्व वाली एलडीएफ सरकार को बड़ा झटका लगा है। 21 सदस्यीय कैबिनेट के 13 मंत्री चुनाव हार गए। कैबिनेट से सिर्फ सीएम विजयन समेत 5 मंत्री जीत पाए। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने बहुमत पाया। कांग्रेस ने 63 सीटें जीतीं। यूडीएफ ने 10 साल बाद सत्ता में वापसी की। 49 साल में ऐसा पहली बार, देश में कहीं वाम सरकार नहीं 1977 से अब तक, भारत के किसी न किसी राज्य (बंगाल, केरल या त्रिपुरा) में वामपंथियों की सत्ता हमेशा रही, पर अब नहीं। केरल वामपंथ का आखिरी मजबूत गढ़ था, जहां विजयन की सत्ता थी। बंगाल व त्रिपुरा में वामपंथ पहले ही सत्ता खो चुका था।
असम में सरकार बरकरार
जागरण के अनुसार पूर्वोत्तर राज्य असम में हैट्रिक लगाने के साथ ही मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने चुनावी जीत की शतक पार कर ली है। सत्तारूढ़ राजग ने असम में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है। इसमें गठबंधन ने सोमवार को 126 सदस्यीय विधानसभा में 101 सीटें जातीं हैं। खुद मुख्यमंत्री सरमा ने जलुकबाड़ी निर्वाचन क्षेत्र से लगातार छठी बार जीत हासिल की हैं। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार बिदिशा नेओग को 89,434 मतों से हराया।
पुडुवेरी में भी एनडीए की जीत
सत्ता समर्थक लहर पर सवार होकर एआइएनआरसी के नेतृत्व बाला राजग पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में जीत हासिल कर लगातार दूसरी बार सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, एआइएनआरसी नेता और मुख्यमंत्री एन रंगासामी ने दोनों सीटों थट्टनचावडी और मंगलम से जीत दर्ज की, जबकि पार्टी कुल 12 सीटें जीती है। नौ अप्रैल को 30 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। क्षेत्रीय विधानसभा में तीन मनोनीत सदस्य भी होते हैं।
कुछ और सुर्खियां:
- रोहतास के दिनारा में बेकाबू कंटेनर ने 15 लोगों को रौंदा, 5 की मौत
- बिहार में 7 मई को होगा मंत्रिमंडल का विस्तार, भाजपा और जदयू की बराबर रह सकती है भागीदारी
- आंधी और पानी से भारी नुकसान, पूरे बिहार में काम से कम 27 लोगों की मौत
- विधान परिषद चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार सूर्यकुमार शर्मा उर्फ अरविंद शर्मा निर्विरोध चुने गए
- पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी समेत कई पूर्व मंत्रियों को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस
अनछपी: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का रिजल्ट वैसे तो कल यानी 4 मई को आया लेकिन जिस दिन यह पता चला था कि 27 लाख वोटरों को इसलिए वोट देने का अधिकार नहीं मिल पाएगा क्योंकि चुनाव आयोग को उनमें ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ मिली है तो उसी दिन यह तय हो गया था कि दरअसल चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी को पश्चिम बंगाल में चुन लिया है। याद रखने की बात यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट ने ‘एसआईआर’ की सुनवाई के दौरान काफी शिकायत मिलने के बाद भी यहां तक कह दिया कि अगर कोई इस बार वोट नहीं दे रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह कभी वोट नहीं दे पाएगा। यानी सुप्रीम कोर्ट को इस बात पर कोई एतराज और परेशानी नहीं थी कि लगभग 27 लाख लोग इस बार वोट नहीं दे पाएंगे। एक तरह से सुप्रीम कोर्ट ने वही किया जो चुनाव आयोग चाहता था और चुनाव आयोग वही कर रहा था जो भारतीय जनता पार्टी चाह रही थी। इसलिए पश्चिम बंगाल में विधानसभा के रिजल्ट पर इंसाफ़ पसंद लोगों को अफसोस तो हुआ लेकिन किसी को ताज्जुब नहीं हुआ। इसका मतलब यह भी नहीं है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जो गुंडागर्दी की है उसे नजरअंदाज कर दिया जाए लेकिन ममता को हराने का यह तरीका कहीं से सही नहीं माना जा सकता। दूसरे शब्दों में यह कहा जाए कि यह तरीका दरअसल ममता को हराने का नहीं बल्कि भाजपा को जिताने का था। अब ममता बनर्जी के लिए भी यह बात सोचने की है कि क्या उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं के बारे में गुंडागर्दी और रंगबाजी करने की शिकायतों को नजरअंदाज करके अपने पैर पर ही कुल्हाड़ी तो नहीं मारी थी। यह बात भी ममता के लिए सोचने की है कि क्या विपक्ष की राजनीति में कांग्रेस को मटियामेट कर वह खुद अपना अस्तित्व बचा सकती हैं? फिलहाल ममता बनर्जी को अपनी पार्टी बचाने की चुनौती का भी सामना करना पड़ेगा क्योंकि एक बार सरकार से बाहर जाने के बाद विचारधारा किनारे चली जाती है और नेता उस तरफ रुख करते हैं जहां उन्हें अपना फायदा दिखता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी यह सोचना होगा कि ऐसे माहौल में चुनाव कैसे जीतेंगे जबकि क्षेत्रीय दल भी किनारे कर दिए जा रहे हैं, चुनाव आयोग के बारे में उनकी शिकायत है और सुप्रीम कोर्ट से भी लोगों को मायूसी मिल रही है। इस समय चुनाव आयोग के बारे में यह शिकायत भी जरूरी है कि उसने अपना सारा खेल पश्चिम बंगाल में खेला है और फिलहाल तमिलनाडु और केरल में उसकी बहुत नहीं चल पाई है ताकि लोगों को उसके ईमानदारी और बेईमानी के बारे में कोई राय बनाने में आसानी नहीं हो।
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