छ्पी-अनछपी: आज से रेल सफर महंगा, मणिपुर में फिर हिंसा- 4 मरे
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पूरे देश में रेल का सफर महंगा हो गया है। मणिपुर में लंबे समय से जारी हिंसा में एक बार फिर गोलीबारी हुई है जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। तेलंगाना की दवा फैक्ट्री में विस्फोट से 15 लोगों की मौत हो गई। चुनाव आयोग ने अब कहा है कि 2003 की वोटर लिस्ट में मां-बाप का नाम है तो वही उनके लिए दस्तावेज माना जाएगा।
और, जानिएगा कि बिहार के मखाना को ग्लोबल कोड मिला है।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार लंबी दूरी की ट्रेन यात्रा में किराए बढ़ाने के रेलवे बोर्ड के प्रस्ताव पर सरकार की मुहर लग गई है। पहली जुलाई से ट्रेनों का बढ़ा हुआ किराया लागू हो जाएगा। अधिकतम वृद्धि प्रति किलोमीटर दो पैसे की होगी। लोकल ट्रेनों और एमएसटी धारकों को राहत दी गई है। उप नगरीय और सीजन टिकट के किराए में किसी तरह का परिवर्तन नहीं किया गया है। सिर्फ मेल, एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों में ही बढ़ा हुआ किराया लागू होगा। रेलवे मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार 500 किलोमीटर से अधिक दूरी की यात्रा पर बढ़ा हुआ किराया जनरल, स्लीपर, फर्स्ट क्लास और एसी ट्रेनों की सभी श्रेणियों में लागू होगा। रेल मंत्रालय ने उन यात्रियों को राहत दी है जिन्होंने 1 जुलाई से पहले अपना टिकट बुक कराया है।
मणिपुर हिंसा में चार की मौत
हिन्दुस्तान के अनुसार मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में सोमवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने महिला सहित चार लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने बताया, मोंगजांग गांव के पास दोपहर दो बजे कार सवारों पर घात लगाकर हमला किया गया। मृतकों की पहचान 48 वर्षीय थेनखोथांग, 34 वर्षीय सेखोगिन, 35 वर्षीय लेंगोउहाओ, 72 वर्षीय फाल्हिंग के रूप में हुई है।
तेलंगाना की दवा फैक्ट्री में विस्फोट से 15 की मौत
भास्कर के अनुसार तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के पास संगारेड्डी जिले में सोमवार सुबह 9:30 बजे के आसपास फार्मा कंपनी सिगाची इंडस्टरीज लिमिटेड की फैक्ट्री में हुए विस्फोट में 15 लोगों की मौत हो गई। 34 दूसरे लोग घायल हैं और कई लोग फंसे हुए हैं जिन्हें निकालने के लिए देर रात तक ऑपरेशन चलता रहा। तेलंगाना के स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजा नरसिम्हा ने बताया कि धमाका फैक्ट्री के रिएक्टर में हुआ जहां केमिकल रिएक्शन के कारण आग लग गई। हादसे के वक्त फैक्ट्री में करीब डेढ़ सौ लोग मौजूद थे। मृतकों में बिहार के एक व्यक्ति शशि भूषण भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृतक के आश्रित को दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपए अनुग्रह अनुदान देने की घोषणा की है।
2003 की वोटर लिस्ट में मां-बाप का नाम तो वही दस्तावेज
प्रभात खबर के अनुसार निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के मद्देनजर बिहार की 2003 की मतदाता सूची सोमवार को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। इसमें 4.96 करोड़ मतदाताओं का विवरण शामिल है। इसका उपयोग 2003 की सूची में शामिल लोग अपना गणना फॉर्म जमा करते समय दस्तावेज साक्ष्य के रूप में कर सकते हैं। अब कुल मतदाताओं में से 60% को कोई दस्तावेज जमा नहीं करना होगा। उन्हें बस 2003 की मतदाता सूची से अपना विवरण सत्यापित करना होगा और भरा हुआ गणना फॉर्म जमा करना होगा। साथ ही इसमें कहा गया है कि जिस किसी का नाम 2003 की सूची में नहीं है वह भी अब अपनी मां या पिता के लिए कोई अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के बजाय 2003 की मतदाता सूची के उद्धरण का उपयोग कर सकता है। ऐसे मामलों में माता या पिता के किसी अन्य दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी।
बाहर रहते हैं तो फॉर्म डाउनलोड कर भरें
भास्कर के अनुसार बिहार से बाहर रहने वाले मतदाताओं को गणना फॉर्म भरना अनिवार्य है। इसके लिए चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है। बाहर रहने वाले मतदाताओं को भी गणना फॉर्म भरना जरूरी होगा। फॉर्म इसी की वेबसाइट से डाउनलोड करना होगा। इसे 26 जुलाई तक भरना है। फॉर्म को भरने और हस्ताक्षर करने के बाद दस्तावेज अपलोड करना होगा। इसके बाद मतदाता सूची में नाम बना रहेगा। फॉर्म नहीं भरने पर मतदाता सूची से नाम हटेगा।
आठ वर्षों में 50 गुना बढ़ी जीएसटी देने वालों की संख्या
हिन्दुस्तान के अनुसार बीते आठ साल में राज्य में टैक्स देने वालों की संख्या में 50 गुना से ज्यादा इजाफा हुआ है। जीएसटी लागू होने के पहले मतलब 2016 तक राज्य में 12,746 लोग सरकार को टैक्स देते थे। मालूम हो कि 1 जुलाई 2017 से बिहार में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू हुआ। इसके बाद टैक्स देने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ। बिहार में वर्ष 2025 में जीएसटी देने वालों की संख्या बढ़कर 6,58,735 हो गई है। जीएसटी लागू होने के बाद इनकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बिहार राज्य व्यावसायिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजय गुप्ता बताते हैं कि बिहार में वर्ष 2017-18 में कर संग्रह 17,236 करोड़ रुपये था। जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 38,198 करोड़ रुपये हो गया। मार्च 2025 में जीएसटी संग्रह 2599 करोड़ रुपये, अप्रैल 2025 में 2290 करोड़ रुपये और मई 2025 में जीएसटी संग्रह 1871 करोड़ रुपये रहा।
मखाना को ग्लोबल कोड मिला
मखाना को ग्लोबल पासपोर्ट मिल गया है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का खास हर्मोनाइज्ड सिस्टम (एचएस) कोड प्रदान किया गया है। साथ ही बिहार का सुपरफूड मखाना अब वैश्विक स्तर पर विशेष रूप से पहचाना जाएगा। इससे इस खास किस्म के जल फल को नई पहचान मिली है। वर्षों के सतत प्रयासों के बाद मखाना उत्पादकों, प्रोसेसर्स और उद्यमियों को अब उनका हक मिला है। मिथिलांचल खासकर दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, पूर्णिया, कटिहार समेत अन्य जिलों की खास पहचान यह मखाना है। इस कोड के मिलने से यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपने अलग नाम और हक से जाना जाएगा। इससे इसके व्यापार में पारदर्शिता और सहूलियत बढ़ेगी। मखाना को तीन विशिष्ट श्रेणी में बांटकर इसके लिए एचएस कोड निर्धारित किए गए हैं। इसमें पॉप्ड मखाना के लिए 20081921, मखाना पाउडर और आटा के लिए 20081922 और अन्य तरह के मखाना उत्पादों के लिए 20081929 कोड दिया गया है।
कुछ और सुर्खियां:
- सुप्रीम कोर्ट में अधिकारियों और कर्मचारियों की सीधी नियुक्ति में पहली बार एससी-एसटी के लिए रिजर्वेशन लागू
- तेलंगाना में विवादास्पद बयानों के लिए बदनाम विधायक टी राजा ने भाजपा से इस्तीफा दिया
- बीपीएससी के 1298 पदों के लिए 4.39 लाख आवेदन आए
- असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम बिहार में तीसरा मोर्चा बनाएगी
- पटना समेत 26 जिलों के शिक्षा पदाधिकारी बदले गए
अनछपी: हमारे समाज में महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा के बारे में मीडिया और दूसरे वर्गों का रवैया इस बात पर निर्भर करता है कि यह अपराध किस राज्य में हुआ है। इस समय कोलकाता के एक लॉ कॉलेज में हुए गैंगरेप की चर्चा पूरे देश में है लेकिन बिहार में आए दिन गैंगरेप की खबरें आती रहती हैं, इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर इसकी कोई चर्चा नहीं होती। कुछ ही दिन पहले दरभंगा में एक नाबालिग के रेप और मर्डर की खबर आई थी लेकिन ना तो विपक्षी पार्टी ने इसे कोई बड़ा मुद्दा बनाया और ना ही मीडिया में यह खबर बहुत ज्यादा चर्चा में आई। अब पटना के एक गर्ल्स ब्लाइंड स्कूल की एक छात्रा के साथ एक क्लर्क द्वारा 2 साल से दुष्कर्म करने की खबर सामने आई है। बिहार में मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के समय ऐसी घटनाओं पर काफी चिंता व्यक्त की गई थी और उसकी चर्चा काफी देर तक जारी रही थी लेकिन इसके बावजूद बिहार में ऐसी घटनाएं रुकती नहीं हैं। ऐसी घटनाओं की रोकथाम की बड़ी जिम्मेदारी सरकार की भी है और मीडिया और समाज के दूसरे वर्ग सरकार को इस मामले में कटघरे में लाने में नाकाम नजर आते हैं। वैसे तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को महिला हितैषी बताया जाता है और उनकी साइकिल योजना को बालिका वर्ग के लिए ऐतिहासिक कदम माना जाता है, लेकिन जहां तक बालिकाओं और महिलाओं की सुरक्षा का मामला है नीतीश कुमार की सरकार नाकाम नजर आती है। मीडिया का एक वर्ग दरअसल यह देखता है कि रेप और मर्डर का कांड भारतीय जनता पार्टी के शासन वाले राज्य में हुआ है या विपक्षी दलों की सरकार में हुआ है। पश्चिम बंगाल को टारगेट करने की एक वजह यह भी होती है कि वहां ममता बनर्जी का शासन चलता है और वह भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथों लिए रहती हैं। वैसे, अपराध चाहे जहां हों उसके लिए सरकार को जिम्मेदार जरूर ठहराया जाना चाहिए लेकिन इसमें दो नीयत नहीं करनी चाहिए। फिलहाल जरूरी है कि बिहार में होने वाले रेप और मर्डर के मामलों को बड़ा मुद्दा बनाया जाए और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी इस और खास ध्यान देना चाहिए।
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