छ्पी-अनछपी: तालिबान के अफगानिस्तान में भारत फिर खोलेगा दूतावास, एनडीए में सीट शेयरिंग आज
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। भारत ने तालिबान के अफगानिस्तान में फिर से दूतावास खोलने का एलान किया है। एनडीए में आज सीट शेयरिंग का ऐलान हो सकता है जिसमें जदयू को 102 और भाजपा को 101 सीट मिल सकती है। वीआईपी को लेकर महागठबंधन में खींचतान जारी है और कांग्रेस ने इस पर सख्त रवैया अपनाया है। ग़ज़ा में जंगबन्दी लागू हो गई है और वहां से इसराइली लौटने लगे हैं।
और, जानिएगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जोर नहीं चला और किसी और को मिला शांति का नोबेल प्राइज।
पहली ख़बर
जागरण ने लिखा है कि ऐसे समय जब अफगानिस्तान एक बार फिर वैश्विक शक्तियों के आकर्षण का केंद्र बनता दिख रहा है, तब भारत ने काबुल स्थित दूतावास फिर खोलने का एलान किया है। साथ ही अफगानिस्तान को पड़ोसी देश बताकर भारत सरकार ने पाकिस्तान को साफ संकेत दिया है कि गुलाम कश्मीर को लेकर वह अपनी नीति पर अडिग है। शुक्रवार को तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी के साथ बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तकनीकी मिशन को पूर्णकालिक दूतावास में बदलने की घोषणा की। अगस्त, 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान की अस्थिर स्थिति को देखकर भारत ने दूतावास बंद कर दिया था। हालांकि भारत ने तालिबान सरकार को अभी मान्यता नहीं दी है। यहां बैठक में अफगानिस्तान को 20 एंबुलेंस देने समेत वहां की आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए भारत ने कई मदद की घोषण की। अफगानी विदेश मंत्री ने भारत को अस्वस्थ क्या कि उनके देश की जमीन का कभी भी भारत के हितों के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होगा साथ ही दाएश आतंकी समूह को क्षेत्र के लिए प्रमुख चुनौती बताया। अफगानिस्तान ने भारतीय कंपनियों को अपने खनन क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया है, जबकि उस पर अमेरिका और चीन की भी नजरें हैं।
एनडीए में सीट शेयरिंग आज
भास्कर के अनुसार बिहार चुनाव के लिए एनडीए की सीटें शनिवार को बंटेंगी। जदयू को 102, भाजपा को 101, लोजपा (रा.) को 24, हम को 10 तथा रालोमो को 6 सीटें मिलने की संभावना है। एनडीए के घटक दलों के तमाम बड़े नेता शुक्रवार की शाम दिल्ली गए। मीडिया से मुखातिब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि कल शाम तक एनडीए के बीच सीटों का बंटवारा हो जाएगा। औपचारिक घोषणा होगी। फिर, घटक दल अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे। उन्होंने एनडीए की चट्टानी एकता और उसकी फिर से सरकार बनने की बात कही। बैठक के बाद भाजपा के विहार प्रभारी विनोद तावड़े ने कहा कि सब कुछ पॉजिटिव है। एनडीए में किसी तरह की नाराजगी नहीं है।
वीआईपी को लेकर महागठबंधन में खींचतान
कांग्रेस वीआईपी का खेल खत्म करने के मूड में है। इंडिया गठबंधन में सीटों के बंटवारे की अड़चन के लिए वह वीआईपी को जिम्मेदार मान रही है। इस रोड़े को हटाने के लिए कांग्रेस ने राजद से पहल करने को कहा है। अब कांग्रेस राजद के जवाब का इंतजार कर रही है। शुक्रवार को दिल्ली में अजय माकन की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में वीआईपी को सबसे बड़ा अवरोध बताया गया। बैठक में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बिना एमपी-एमएलए वाली पार्टी ने इंडिया गठबंधन के कद्दावर नेताओं को नचा रखा है। नेताओं ने सुझाव दिया कि अगर वीआईपी नहीं मानी तो बाकी दलों के साथ चुनाव लड़ना चाहिए। परंतु, वीआईपी के प्रति राजद के सॉफ्ट कॉर्नर को देखते हुए यह संभव नहीं हो पा रहा है। कांग्रेस नेताओं को डर है कि सीटों के बंटवारे और उम्मीदवार घोषित करने में देरी से पार्टी के नेता प्रत्याशी बनने की लालच में विरोधी दलों की ओर जा सकते हैं।
चुनावी बुलेटिन:
- पूर्व सांसद अजय निषाद की भाजपा में हुई वापसी, 2024 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़े और हारे थे
- पूर्णिया से जदयू के सांसद रहे संतोष कुशवाहा ने राजद की सदस्यता ली
- बांका के जदयू के सांसद गिरधारी यादव के बेटे चाणक्य प्रसाद आरजेडी में शामिल
- राहुल शर्मा ने राजद की सदस्यता ली, जहानाबाद के घोसी विधानसभा क्षेत्र से हो सकते हैं पार्टी के उम्मीदवार
- सीट शेरियरिंग को लेकर जेडीयू और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने पटना में बैठक की
- राजद ने सीट और उम्मीदवारों के लिए लालू प्रसाद को अधिकृत किया
- जनसुरज के प्रमुख प्रशांत किशोर आज जाएंगे तेजस्वी यादव के चुनाव क्षेत्र राघोपुर
- शिवहर के बागी राजद विधायक चेतन आनंद और मोहनिया की विधायक संगीता कुमारी ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया
- पूर्व सांसद अरुण कुमार आज जदयू में शामिल होंगे
- पूर्व सांसद सूरजभान सिंह और उनकी पत्नी आज आरजेडी में शामिल होंगे
ग़ज़ा में जंगबन्दी लागू हो
पश्चिम एशिया में इस्राइल और हमास के बीच बीते दो साल से जारी हिंसक संघर्ष थमने वाला है। ग़ज़ा में ट्रंप की शांति योजना के तहत युद्धविराम समझौता लागू हो गया है। इसराइली सेना ने ट्रंप की शांति योजना पर कहा कि दोहपर 12 बजे से युद्धविराम लागू हो गया है। सैनिक वापस लौट रहे हैं। इसराइली सेना ने शुक्रवार को कहा कि हमास के साथ युद्धविराम समझौता स्थानीय समयानुसार दोपहर 12 बजे से प्रभावी हो गया है। मोर्चे पर तैनात सैनिक सहमति के तहत निर्धारित जगहों पर वापस लौट रहे हैं। युद्धविराम समझौता लागू करने के फैसले को इस्राइली कैबिनेट में मंजूरी दी गयी। प्रधानमंत्री नेतन्याहू के कार्यालय से जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा गया कि मंत्रिमंडल ने बंधकों की रिहाई के लिए समझौते की रूपरेखा को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इसराइली सरकार के बयान में योजना के अन्य पहलुओं का उल्लेख नहीं किया गया है। एक इसराइली सुरक्षा अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा कि सेना अपने नये ठिकानों पर जाकर ग़ज़ा के लगभग 50 फीसदी हिस्से पर अपना नियंत्रण स्थापित करेगी।
ट्रंप का ज़ोर नहीं काम आया, किसी और को मिला नोबेल पीस प्राइज़
हिन्दुस्तान के अनुसार वेनेजुएला में लोकतंत्र की लौ जलाए रखने वाली विपक्षी पार्टी वेंटे वेनेजुएला की नेता मारिया कोरिना मचाडो को शांति का नोबेल पुरस्कार मिलेगा। वहीं, इस पुरस्कार के लिए जोर लगाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सारी कोशिशें नाकाम हो गईं। नॉर्वे की नोबेल समिति के अध्यक्ष जार्गन वात्ने ने शुक्रवार को मारिया के नाम का ऐलान किया। मारिया को यह पुरस्कार वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकार दिलाने के लिए 20 वर्ष के लंबे संघर्ष के लिए दिया गया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मारिया ने कहा कि हमारी लड़ाई में डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी लोग और दूसरे लोकतांत्रिक देश भी शामिल हैं। इस पुरस्कार को वेनेजुएला के लोगों और ट्रंप को समर्पित करती हूं। वहीं, मारिया को शांति का नोबेल देने पर व्हाइट हाउस ने कहा, नोबेल समिति ने शांति की बजाय सियासत को तवज्जो दी। ट्रंप युद्ध रुकवाने और लोगों की जान बचाने की कोशिश जारी रखेंगे।
कुछ और सुर्खियां:
- मुजफ्फरपुर के मीनापुर थाना क्षेत्र में ट्रैक्टर पिकअप में भिड़ंत, चार की मौत
- चांदी में सबसे अधिक उछाल, 1 किलो की कीमत ₹1.70 लाख के पार
- औरंगाबाद में सोन नदी में नाव पलटने से दो लोगों की मौत
अनछपी: तालिबान के विदेश मंत्री अमीर मुत्तक़ी ख़ान से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की हाथ मिलाने वाली तस्वीर दरअसल इस बात क्या जीता जागता सबूत है कि दुनिया में केवल अपना फायदा देखने का चलन है और कोई नीति सिद्धांत इसके ऊपर नहीं है। आपको याद होगा कि इसी तालिबान को भारत में भी बर्बर और अमानवीय बताया गया। यहां तक कि अत्याचार को तालिबानी सोच का नाम दिया गया। कोई किसी के साथ पूरा रवैया अपनाता तो उसे भी तालिबानी रवैया कहा जाता। खासकर महिलाओं के साथ तालिबान ने जो रवैया अपनाया उसकी हर तरफ भर्त्सना की गई। यह भी हुआ कि तालिबान के बहाने भारत के मुसलमानों को भी बदनाम किया गया। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने तो कुछ मुसलमानों को इसी नाम पर गिरफ्तार भी किया। दिलचस्प बात यह है कि तालिबान ने महिलाओं की शिक्षा पर जो पाबंदी लगाई है उसे मुसलमान भी बेहद गलत मानते हैं। तालिबान जिस देवबंदी विचारधारा से खुद को प्रभावित बताते हैं और उनके विदेश मंत्री दारुल उलूम देवबंद जाने वाले हैं उसे देवबंद ने भी महिला शिक्षा पर पाबंदी नहीं लगाई। अफसोस की बात यह है कि तालिबान के विदेश मंत्री को भारत में एक मौका था कि वह अपने पक्ष की बात रखते लेकिन उन्होंने महिला पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं बुलाया। तो फिर भारत मैं तालिबान सरकार से अपने रिश्ते बेहतर करने की पहल क्यों की? सरकार के पक्ष में बोलने वाले विश्लेषकों का कहना है कि क्योंकि तालिबान सरकार और पाकिस्तान में दुश्मनी जैसी बात है इसलिए दुश्मन का दुश्मन दोस्त है। आसान शब्दों में कहा जाए तो भारत दरअसल तालिबान सरकार के साथ अपने बेहतर रिश्ते से पाकिस्तान को एक संदेश देना चाहता है। वैसे भारत अफगानिस्तान के रिश्ते पहले भी अच्छे रहे हैं लेकिन तालिबान की वजह से भारत ने इससे दूरी बनाई थी। अब बदले हालात में भारत नहीं चाहता कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान का प्रभाव बढ़े। इसलिए बदले हालात में भारत ने तालिबान से दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। इससे यह भी साफ हो गया कि तालिबान का विरोध दरअसल महिला शिक्षा के खिलाफ उनकी नीति की वजह से नहीं था, यह और बात है कि जब तालिबान का विरोध करना था तो इसे भी एक वजह बताया गया। कहा जाता है कि अंतरराष्ट्रीय संबंध नीतियों से नहीं बल्कि अपने फायदे के हिसाब से चलता है तो बेहतर है कि उसी हिसाब से टीका टिप्पणी की जाए और किसी धर्म को निशाना बनाने के लिए किसी विदेशी शक्ति का इस्तेमाल न किया जाए।
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