छपी-अनछपी: बिहार में “घुसपैठ” पर अमित शाह चुप, महागठबंधन में संकट के बादल जारी

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पटना में घुसपैठ के लिए विपक्षी सरकारों को दोषी ठहराया लेकिन बिहार के मामले में कुछ नहीं बोला क्योंकि बिहार में एनडीए की सरकार होने के बावजूद वह घुसपैठ का आरोप लगाते हैं। महागठबंधन पर संकट के बादल अभी बरकरार हैं। गोपालगंज में एक छोटे दुकानदार के पास से एक करोड़ रुपए मिले जिस पर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का शक है।

पहली ख़बर

हिन्दुस्तान ने पटना में शनिवार को आयोजित अपने खास कार्यक्रम बिहार समागम के हवाले से लिखा है कि केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सीमावर्ती राज्यों की गैर एनडीए सरकारों पर बड़ा हमला बोला है। उनका कहना है कि जहां एनडीए की सरकारें हैं, वहां सीमा से अवैध घुसपैठ रुक चुकी है। गुजरात, राजस्थान और असम इसका उदाहरण हैं। लेकिन बंगाल और झारखंड में जहां विपक्षी दल सत्ता में हैं, वहां घुसपैठ को वोट बैंक बना दिया गया है। अमित शाह का बयान: “बंगाल और झारखंड में हमारी सरकारें नहीं हैं। जिन्होंने बांग्लादेश, कश्मीर और पंजाब का बॉर्डर देखा है, उन्हें मालूम होगा कि बॉर्डर कोई पटना शहर की सड़कों जैसा नहीं है। वहां सैकड़ों नदी-नाले हैं। घने जंगल हैं। ऊंचे पहाड़। हैं। यहां तार बाड़ लगाना संभव नहीं है। वहां चार घंटे निगरानी भी संभव नहीं हो पाती। बारिश के समय में तो बड़ी से बड़ी निगरानी नाव भी बह जाती है। आरोप लगाने वाले लुटियन में बैठकर बात करते है, कभी बॉर्डर पर जाएं तो पता चले। घुसपैठिए सबसे पहले किसी गांव में ही जाएंगे। क्या उस गांव के पटवारी को कुछ पता नहीं चलता। थाना भी अनजान रहता है। घुसपैठ इसलिए हो रही है क्योंकि बंगाल और झारखंड में पटवारियों और थानों को निर्देश है कि घुसपैठियों का स्वागत किया जाए। क्योंकि ये उनके वोट बैंक है। क्यों गुजरात, राजस्थान से अब घुसपैठ नहीं होती है। असम से घुसपैठ क्यों ठप है। क्योंकि वहां पर हमारी सरकार है।”

अमित शाह बिहार पर क्या बोले?

बिहार की सरकार का फैसला कोई घुसपैठिया कर सकता है क्या? करना चाहिए क्या? हमारे लोकतंत्र का मूल तत्व हमारा चुनाव है और चुनाव के अंदर मूल इकाई मतदाता सूची और मतदाता हैं। जो देश का नागरिक नहीं है, वह कैसे देश का मतदाता बन सकता है? हमारे देश का प्रधानमंत्री और राज्यों का मुख्यमंत्री कौन होगा, क्या यह विदेशी नागरिक तय करेंगे। चुनाव आयोग अगर एसआईआर के जरिए मतदाता सूची से घुसपैठियों को निकालता है तो उनके पेट में दर्द क्यों हो रहा है? उन्होंने घुसपैठ कराकर वोट बैंक तैयार किया है, जिसके आधार पर वह सत्ता पाना चाहते हैं।

महागठबंधन पर नहीं छटे संकट के बादल

जागरण के अनुसार पहले चरण के मतदान के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी महागठबंधन में सीटों के बंटवारे पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। घटक दलों के बीच तनाव इस कदर है कि टूट की आशंका जाहिर की जा रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने छह सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। झामुमो दावे पर कायम रहा तो 20 से अधिक सीटों पर एनडीए के बदले महागठबंधन के घटक दलों में ही लड़ाई हो जाएगी। इधर, कांग्रेस का आंतरिक असंतोष भी बाहर हो रहा है। पार्टी के दो पूर्व विधायकों-गजानन शाही और बंटी चौधरी ने कांग्रेस के बिहार प्रभारी के अल्लावरु पर आला कमान को अंधेरे में रख पैरवी वालों को उम्मीदवार बनाने का आरोप लगाया है। राजद से कांग्रेस के विवाद का असर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार उर्फ राजेश राम की विधानसभा सीट कुटुंबा पर भी पड़ा है। पूर्व मंत्री सुरेश राम को यहां से राजद उम्मीदवार बना सकता है। महागठबंधन में विवाद की शुरुआत बेगूसराय के बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार की घोषणा के बाद हुई। 2024 के चुनाव में भाकपा यहां दूसरे स्थान पर थी। कांग्रेस ने उस चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे गरीब दास को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। भाकपा की त्वरित प्रतिक्रिया हुई। उसने कांग्रेस की सिटिंग सीट राजापाकर पर अपना उम्मीदवार उतार दिया।

चुनाव बुलेटिन:

  • भाजपा नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अक्टूबर को बेगूसराय और समस्तीपुर में सभा करेंगे
  • सारण जिले की मढौरा सीट से चिराग पासवान की पार्टी लोजपा की उम्मीदवार सीमा सिंह का नॉमिनेशन रद्द
  • अमर से जेडीयू के सबा जफर से पार्टी ने वापस लिया सिंबल, साबिर अली बने उम्मीदवार
  • भागलपुर से बागी उम्मीदवार बनने वाले अश्विनी चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत ने फोन आने के बाद नहीं किया नामांकन
  • पूर्व एमएलसी और वरिष्ठ नेता संजीव श्याम सिंह ने जदयू से इस्तीफा दिया, अतरी के लिए टिकट नहीं मिलने से नाराज थे
  • भारतीय जनता पार्टी के चतरा से पूर्व सांसद धीरेंद्र अग्रवाल ने जन सुराज की सदस्यता ली, गया सदर से होंगे उम्मीदवार

किसके पास कितनी दौलत

  • मधुबनी के विधायक समीर महासेठ की आमदनी में 5 साल में 129% का इजाफा, कुल 5 करोड़ 60 लाख के मालिक
  • पटना जिले में सात उम्मीदवारों की संपत्ति 10 करोड़ के पार, इनमें केवल यादव और भूमिहार
  • निर्दलीय जीतकर मंत्री बने और अब जमुई के चकाई से जेडीयू प्रत्याशी सुमित कुमार की दौलत 5 करोड़ से अधिक
  • शिवहर से जदयू उम्मीदवार श्वेता गुप्ता के पास 17 करोड़ से अधिक की संपत्ति

गोपालगंज में छोटे दुकानदार के घर से 1.8 करोड़ बरामद

थावे के अमैठी खुर्द गांव में शुक्रवार की देर रात छापेमारी के दौरान एक युवक के घर से एक करोड़ आठ लाख से अधिक की नकदी मिली। युवक संतोष कुशवाहा की गैस चूल्हे तो बेटे की चाय दुकान है। उसके घर से 30 से अधिक बैंकों के पासबुक और एटीएम कार्ड भी बरामद हुए हैं। थावे पुलिस इस मामले में एक महिला सहित छह लोगों से पूछताछ कर रही है। आर्थिक अपराध इकाई पटना व आयकर विभाग तथा सीवान की टीम साइबर अपराध और मनी लांड्रिंग के एंगल से मामले की जांच कर रही है। गांव में बड़ी रकम छुपाए जाने की सूचना पर सदर एसडीपीओ प्रांजल कुमार के नेतृत्व में शुक्रवार की रात 10 बजे से लगातार 10 घंटे तक छापेमारी चली। इस दौरान अलमीरा, ट्रंक, बक्से और बेड के नीचे छिपा कर रखे गए नोट बरामद हुए। बरामद रकम की गिनती सीओ कुमारी रूपम शर्मा की देखरेख में दो मशीनों से की गई। इसमें 500, 200 और 100 रुपए के नोट शामिल हैं। गिनती में पूरा दिन लग गया। इतने नोट कहां से आएं, पुलिस इसकी छानबीन कर रही है।

कुछ और सुर्खियां:

  • पाकिस्तान हवाई हमले में अफगानिस्तान के तीन घरेलू क्रिकेटरों की जान गई
  • धनतेरस पर पटना में इस साल एक करोड़ वाली 15 मर्सिडीज़-बेंज कारें बिकीं, डेढ़ करोड़ की 4 बीएमडब्ल्यू कारें भी बिकीं
  • ढाका एयरपोर्ट पर आग लगने से कुछ देर के लिए फ्लाइट्स को रोका गया
  • अमृतसर- सहरसा गरीब रथ के तीन डिब्बों में लगी आग, कुछ यात्री झुलसे

अनछपी: इसमें कोई शक नहीं कि महागठबंधन ने राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान जो बढ़त हासिल की थी वह सीट के बंटवारे में मची अफरा तफरी से काफी हद तक गंवाई जा चुकी है। यह बात भी बिल्कुल सही है कि सीटों के बंटवारे को लेकर एनडीए में भी बहुत तनातनी रही और वहां भी रूठने मनाने का दौर चला। लेकिन महागठबंधन की अपनी बीमारी इसलिए ठीक नहीं हो सकती कि एनडीए में भी वैसी ही बीमारी है। एनडीए की बीमारी के इलाज के लिए अमित शाह खुद तीन दिन पटना में डेरा डाले रहे। बताया जा रहा कि अमित शाह ने कई लोगों को व्यक्तिगत तौर पर फोन कर बागी उम्मीदवार के रूप में नॉमिनेशन नहीं करने के लिए मना लिया है जिसमें पटना की मेयर सीता साहू के पुत्र भी शामिल हैं। यानी एनडीए में डैमेज हुआ है तो डैमेज कंट्रोल भी चालू है। ऐसी कोई कोशिश महागठबंधन के घटक दलों में नजर नहीं आ रही है। अगर ऐसी कोई कोशिश हो भी रही होगी तो उसकी खबर सामने नहीं आ रही जिससे आम लोगों पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता। महागठबंधन के नेता खुद यह आरोप लगाते हैं कि एनडीए को चुनाव आयोग का अनैतिक समर्थन प्राप्त है। यह बात भी सही है कि चुनाव के दौरान प्रशासन का रुख उसी की तरफ रहता है जिसकी सरकार होती है। ऐसे में सरकार से बाहर चल रहे महागठबंधन के लिए यह गुंजाइश नहीं है कि वह उसी तरह की गलतियां करे जैसी गलती उसे एनडीए में नजर आ रही है। हालांकि वक्त बहुत तेजी से निकल रहा है लेकिन महागठबंधन अब भी चाहे तो डैमेज कंट्रोल की शुरुआत कर सकता है और बिहार सरकार के खिलाफ आम लोगों में जो गुस्सा है उसका फायदा उठाकर चुनाव में अच्छा प्रदर्शन भी कर सकता है। इस समय अगर लालू प्रसाद और राहुल गांधी ने स्थिति को संभालने की कोशिश नहीं की तो उनके लिए यह चुनाव हाथ से निकल चुका है।

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