बिहार में 16 प्रतिशत एससी-एसटी, इन्हें पोस्ट मैट्रिक स्काॅलरशिप मिलने में मुश्किलें

बिहार लोक संवाद डाॅट नेट
बिहार सरकार के अधिकारियों ने आखिर ऐसा क्या किया है कि एक तरफ पोस्ट मैट्रिक स्काॅलरशिप के लिए एससी-एसटी छात्रों का आवेदन पत्र जमा नहीं हो पा रही तो दूसरी तरफ उन्हें मिलने वाली स्काॅलरशिप के पैसे कम मिल रहे हैं? बिहार में आखिरी बार 2018-19 में लगभग 75 हजार एससी-एसटी विद्यार्थियों को पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति दी गयी थी।
विद्यार्थियों की शिकायत है नेशनल स्काॅलरशिप पोर्टल पर बिहार का नाम ही नहीं मिलता। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वेबपोर्टल बनाने में एनआईसी की मदद ली जा रही है।
बिहार में एससी यानी अनुसूचित जाति और एसटी यानी अनुसूचित जनजाति की आबाद क्रमशः 15 और एक प्रतिशत यानी दोनों की आबादी कुल 16 प्रतिशत है।
इस योजना के तहत केन्द्र और राज्य दोनों के अंशदान से एससी-एसटी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति मिलती है।
इस बारे में पूर्व उप मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का कहना है कि पिछले पांच वर्षों से एससी-एसटी छात्रों को पोस्ट मैट्रिक स्काॅलरशिप नहीं दी जा रही है या इसमें परेशानी हो रही है। दूसरी ओर लोक जनशक्ति पार्टी के चिराग पासवान का कहना है कि इस स्काॅलरशिप के लिए 75 प्रतिशत पैसे केन्द्र सरकार देती है, फिर भी बिहार में तीन साल से यह स्काॅलरशिप बन्द है। उनके अनुसार इस कारण लाखों एससीट-एसटी छात्रों को नुकसान हो रहा है।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार बिहार सरकार ने 2019-20 और 2020-21 में पोस्ट मैट्रिक स्काॅलरशिप का एक भी आवेदन नहीं लिया है। नये सत्र 2021-22 के लिए भी स्काॅलरशिप की प्रक्रिया शुरू नहीं की गयी है।
दूसरी तरफ, जिन छात्रों को पहले स्काॅलरशिप मिली थी उसके पैसों में भी धीरे-धीरे काफी कमी कर दी गयी है। उदाहरण के लिए एक छात्र को इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पहले साल 52 हजार की स्काॅलरशिप दी गयी लेकिन तीसरे वर्ष में 45 हजार और अंतिम वर्ष में महज 15 हजार रुपये की राशि दी गयी।

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