छपी-अनछपी: सोना छीनने के आरोप में थानेदार गिरफ्तार, मेट्रो में नौकरी के नाम पर बड़ी ठगी
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। गया जंक्शन पर ट्रेन के यात्री से चालीस दिन पहले सनसनीखेज सोना लूटकांड में जीआरपी के थानेदार को गिरफ्तार किया गया है। पटना मेट्रो में नौकरी दिलाने के नाम पर रैकेट चलाने वालों का पता लगा है। नए साल पर गिग वर्कर्स की हड़ताल से ऑनलाइन डिलीवरी पर असर पड़ा है।
और, जानिएगा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास कितनी दौलत है, और उनके सबसे अमीर मंत्री कौन हैं।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार पूर्व मध्य रेलवे के गया जंक्शन पर ट्रेन के यात्री से चालीस दिन पहले सनसनीखेज सोना लूटकांड में पुलिस की साख को गहरा झटका लगा है। एक किलो वजन के सोने के के बिस्कुट छीनने के मामले में नामजद गया जीआरपी के थानेदार राजेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर बुधवार को रेल न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस मामले में चार जीआरपी जवानों और देवे सिविलियन की संलिप्तता भी सामने आई है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। चारों जवान को निलंबित कर दिया गया है। पटना रेल पुलिस ने बुधवार की देर शाम एक्स हैंडल पर थानेदार की गिरफ्तारी व जवानों के निलंबन की पुष्टि की। । निलंबित सिपाही करण कुमार, अभिषेक चतुर्वेदी, रंजय कुमार और आनंद मोहन हैं। वे अन्य लोग परवेज आलम तथा रेल थाना के पूर्व चालक सीताराम हैं।
21 नवंबर का है मामला
यह मामला गत 21 नवंबर का है। हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस ट्रेन से कोलकाता से कानपुर जा रहे व्यवसायी के कर्मी धनंजय शाश्वत एक किलो वजन के सोने के विस्कुट ले जा रहे थे। आरोप है कि गया स्टेशन पर ट्रेन रुकी तो जीआरपी के चार जवान और दो सिविलियन ने जांच के बहाने युवक को रोका, उसके पास रखा सोना जब्त कर लिया और मारपीट कर उसे ट्रेन से आगे जाने दिया। बाद में सोना वापस नहीं किया। गिरफ्तार कर जेल भेजे गए राजेश कुमार सिंह गया से पहले लंबे समय तक छपरा ट्रैफिक पुलिस में थे। इस मामले में कार्रवाई नहीं होने पर व्यवसाय ने खगड़िया के सांसद राजेश वर्मा से संपर्क किया तब सांसद ने सीधे डीजीपी से शिकायत की। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने इस कांड को गंभीरता से लिया।
पटना मेट्रो में नौकरी के नाम पर ठगी
प्रभात ख़बर के अनुसार पटना मेट्रो में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े को पुलिस ने उजागर किया है. इस मामले में मास्टरमाइंड समेत तीन शातिरों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें सुपौल का अखिलेश कुमार चौधरी, नवादा का दिनेश कुमार साव और मधेपुरा का नवनीत कुमार शामिल हैं. गिरोह का सरगना अखिलेश कुमार चौधरी है. एएसपी सदर अभिनव कुमार ने बताया कि अभ्यर्थी की शिकायत के बाद जब पुलिस ने छापेमारी की, तो दो लोग इंटरव्यू लेते हुए पकड़े गये. पूछताछ में पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ. नवनीत पहले कंप्यूटर सेंटर चलता था और तकनीकी काम संभालता था.
10 लाख में करते थे सौदा
हिन्दुस्तान के अनुसार पूछताछ में पता चला कि फ्रॉड बेरोजगार युवाओं को नौकरी के लिए 10 लाख में सौदा करते थे। पहले ऑनलाइन फार्म भरवाते थे, फिर 50-60 हजार लेकर मीठापुर स्थित फ्लैट में साक्षात्कार के लिए बुलाते। अलग-अलग अभ्यर्थियों से आठ लाख की वसूली की गई थी। गिरोह के कई सदस्य राज्य के अलग-अलग जिलों से अभ्यर्थियों को बुलाकर पटना लाते थे। पटना सदर-1 के एएसपी ने बताया कि 28 दिसंबर को सूचना मिली कि मीठापुर में एक फ्लैट में लोगों को झांसा देकर मेट्रो में नौकरी दिलाने के लिए साक्षात्कार हो रहा है। इस पर बुधवार को पुलिस ने मीठापुर बाइपास पिलर संख्या-88 पीएनबी बिल्डिंग के चौथे तल के फ्लैट संख्या 401 में छापेमारी की।
‘गिग वर्कर्स’ की हड़ताल, डिलीवरी प्रभावित
हिन्दुस्तान के अनुसार देश के कई हिस्सों में लोगों की नए साल का जश्न मनाने की तैयारी पर ‘गिग वर्कर्स’ की हड़ताल भारी पड़ गई। 2025 के आखिरी दिन ऐप आधारित डिलीवरी और परिवहन कंपनियों से जुड़े हजारों कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया। इससे कई राज्यों में ऑनलाइन सामान डिलीवरी ठप हो गई। हालांकि, दिल्ली-एनसीआर में हड़ताल का खास असर नहीं रहा। वहीं, कर्मियों के विरोध को देखते हुए कुछ कंपनियों ने उनके लिए प्रोत्साहन भुगतान का ऐलान भी किया है। गिग वर्कर्स की हड़ताल से ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों को बड़े नुकसान का अनुमान है। दूसरी ओर, संबंधित कंपनियों से जुड़े सूत्रों ने दावा किया कि नए साल की पूर्व संध्या पर उनका कामकाज पूरी तरह सामान्य रहा। हड़ताल से किसी भी तरह के असर की बात भी कंपनियों की ओर से फिलहाल नकार दी गई। उधर, कंपनियों ने कर्मियों ने इन्सेन्टिव का भी ऐलान किया है।
विदेश मंत्री ने मरहूम खालिदा जिया के बेटे से मुलाकात की, पीएम का पत्र सौंपा
जागरण ने लिखा है क्या पूर्व पीएम खालिदा जिया की मौत और उसके बाद भारत सरकार की संवेदनशील प्रतिक्रिया भारत और बांग्लादेश के लगातार खराब होते संबंधों पर विराम लगा सकते हैं? इस बारे में स्पष्ट आकलन तो मुश्किल होगा लेकिन जिया के अंतिम संस्कार में विदेश मंत्री एस जयशंकर की शिरकत और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान के नाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का व्यक्तिगत पत्र कुछ ऐसा ही संकेत देता है। जयशंकर ने तारिक से मुलाकात कर भारत सरकार व भारत की जनता की तरफ से पूर्व पीएम की मौत पर अपना शोक व संदेनाएं प्रकट कीं। साथ ही उन्हें पीएम मोदी का एक व्यक्तिगत मत्र भी सौंपा। माना जा रहा है कि इस पत्र में पीएम मोदी ने बांग्लादेश की जनता के लिए इस दुख की घड़ी में सहानुभूति प्रकट की है।
मुख्यमंत्री नीतीश के पास कितनी दौलत
भास्कर के अनुसार बिहार के सबसे अमीर मंत्री डॉ. अशोक चौधरी हैं। वे ग्रामीण कार्य मंत्री हैं। उनकी कुल संपत्ति 42.68 करोड़ रुपए है। इसमें उनकी पत्नी की भी संपत्ति शामिल है। दूसरे नंबर पर पिछड़ा अति पिछड़ा कल्याण मंत्री रमा निषाद हैं। उनकी कुल संपत्ति 31.85 करोड़ रुपए है। इसमें उनके पति की भी संपत्ति शामिल है। सबसे गरीब मंत्री संजय कुमार हैं। उनके पास सिर्फ 23.85 लाख की संपत्ति है। 3 मंत्रियों को छोड़ सभी मंत्री, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से ज्यादा धनवान हैं। मंत्रियों ने साल के आखिरी दिन अपनी संपत्ति सार्वजनिक की। मुख्यमंत्री की कुल संपत्ति 1 करोड़ 65 लाख 66 हजार 196 रुपए है। यह पिछले साल की तुलना में सिर्फ 68 हजार 455 रुपए अधिक है। चल संपत्ति 17 लाख 66 हजार 196 रुपए की तथा अचल संपत्ति 1 करोड़ 48 रुपए की। नकदी 20 हजार 552 रुपए। 2015 मॉडल की फोर्ड इको स्पोर्ट कार (कीमत 11.32 लाख) है। 12 गाय तथा इसके 9 बच्चे थे। अब 10 गाय व इसके 13 बच्चे हैं। 3 बैंक खातों में 57766 रुपए है। सोना की 2 तथा मोती लगे चांदी की 1 अंगूठी है। इसकी कुल कीमत पिछले साल 1.31 लाख थी। अब 2 लाख 3 हजार रुपए है। अचल संपत्ति के नाम पर उनके पास द्वारका (दिल्ली) में 1 फ्लैट है। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के पास 6.38 करोड़ और विजय कुमार सिन्हा के पास 8.81 करोड़ की संपत्ति है।
कुछ और सुर्खियां:
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- बिहार में अब प्रीपेड मीटर के साथ ही मिलेगा बिजली का नया कनेक्शन
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के लिए 3 करोड़ रजिस्ट्रेशन
अनछपी: अफसोस की बात है कि वर्ष 2026 के पहले दिन हम एक ऐसी खबर की चर्चा कर रहे हैं जिनकी चर्चा आम अखबारों में बहुत नहीं है और यह खबर जुड़ी है इंदौर से जो भारत का सबसे साफ सुथरा शहर माना जाता है लेकिन वहां गंदा पानी पीने से लगभग 13 लोगों की मौत हो गई है। खबरों में बताया गया है कि यहां 1100 से ज्यादा लोग गंदा पानी पीने से बीमार है जिनमें से कई लोगों की हालत नाजुक है। इंदौर के भागीरथपुरा में लोग कई दिनों से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे लेकिन जिम्मेदारों ने वक्त रहते इस पर ध्यान नहीं दिया और 26 दिसंबर से म्यूट का सिलसिला शुरू हो गया। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पीने के पानी के पाइप में लीकेज था और उसमें ड्रेनेज का गंदा पानी मिल गया । इस तरह ड्रेनेज का पानी पीने के पानी के पाइप में जाने की घटना कोई नई-नई है लेकिन इंदौर जैसे शहर में इसका होना जरूर सबको चौंकाता है। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और जहीर कांग्रेस पार्टी ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया है। राजनीति से अलग हटकर भी देखा जाए तो जब 5 दिन पहले से लोग शिकायत कर रहे थे तो उस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत से कौन इनकार कर सकता है। ऐसे मामलों में कोई नैतिक जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा नहीं देता और खास तौर पर यह शिकायत भारत ही जनता पार्टी के बारे में मिलती है। इसलिए इसमें भी एक-दो अधिकारी को सस्पेंड कर खानापुरी कर दी गई है। क्योंकि यह मामला हाई कोर्ट भी पहुंच चुका है, इसलिए यह देखना होगा कि आखिर कोर्ट इस मामले में कोर्ट क्या दिशा निर्देश देता है। इस समय अगर मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार होती तो भारतीय जनता पार्टी ने इसे बहुत बड़ा मुद्दा बनाया होता और मीडिया में भी इसको लेकर काफी तीखी चर्चा होती लेकिन अफसोस की बात है कि लोगों की मौत का मामला भी पार्टी में बंटा हुआ है और मीडिया भी उसी तरह अपनी प्रतिक्रिया देता है।
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