बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। मार्च से अब तक 37 बार डील का दावा कर चुके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार ईरान से समझौते की बात कही है। खान ग्लोबल स्टडीज के निदेशक खान सर उर्फ फैजल खान को 20 जून तक गिरफ्तारी से राहत मिली है। सीतामढ़ी में पीपल का पेड़ गिरने से घर के अंदर सो रही मां, एक नवजात और तीन बच्चों समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई।
और, निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने पंडित नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि युद्ध समाप्ति को लेकर शांति वार्ता अंतिम चरण में है। दो-तीन दिनों में इसकी घोषणा हो सकती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और इसराइल ने मिसाइल हमलों के बाद फिलहाल सैन्य कार्रवाई रोक दी है। ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों ने उनकी मध्यस्थता में हमले रोकने पर सहमति जताई है और अब वार्ता निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। भास्कर के अनुसार उनके बयान के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 2% गिरकर 92 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई। हालांकि, मार्च से अब तक ट्रम्प 37 बार दावा कर चुके हैं कि ईरान समझौते के करीब है या डील करना चाहता है। इसके बावजूद अभी तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है। पलटवार करते हुए शीर्ष ईरानी अधिकारी ने ट्रम्प की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ट्रम्प में डील फाइनल करने की गंभीर इच्छा नहीं दिखती। अमेरिका का तेल भंडार 40 साल के निचले स्तर परः तनाव के बीच अमेरिका का इमरजेंसी क्रूड ऑयल भंडार तेजी से घट रहा है और 40 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है।
खान सर को 20 जून तक गिरफ्तारी से राहत
प्रभात ख़बर के अनुसार खान ग्लोबल स्टडीज के निदेशक खान सर उर्फ फैजल खान को पटना के प्रधान जिला जज की अदालत ने मंगलवार को अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर 20 जून तक के लिए रोक लगा दी है. हालांकि अदालत ने खान सर को यह आदेश दिया है कि वे पुलिस को जांच में मदद करेंगे. पुलिस जब भी उन्हें बुलायेगी, हाजिर होना होगा. यह मामला कोचिंग संस्थान के बाहर एक फायरिंग का वीडियो वारल होने से जुड़ा है. 4 जून को कदमकुआं थाना में कांड संख्या 418/2026. दर्ज किया है. खान सर, उनके दो गार्ड प्रमोद कुमार व तालेबर सिंह के खिलाफ में पुलिस के बयान पर केस दर्ज किया गया है. खान ग्लोबल स्टडीज के गार्ड से मारपीट मामले में अभियुक्त बनाये गये ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रौशन आनंद की नियमित जमानत याचिका पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी अनुराग वर्मा की अदालत में सुनवाई हुई इस दौरान रौशन आनंद के वकील राघव कुमार ने उन्हें जमानत दिये जाने की प्रार्थना की. उन्होंने अदालत में यह कहा कि इस मामले में धारा 109 लागू नहीं होती है. पीड़ित को लगी चोट साधारण है. हालांकि रौशन के वकील के दिये गये तर्क को अदालत ने नहीं माना और जमानत याचिका खारिज कर दी.
घर पर पीपल की डाल गिरने से मां के साथ चार बच्चों की मौत
सीतामढ़ी के रीगा थाना क्षेत्र की रेवासी पंचायत अंतर्गत धनुषी टोला में सोमवार देर रात आंधी के दौरान एक फूस के घर पर पीपल के पेड़ की मोटी डाली गिर गई। हादसे में घर के अंदर सो रही मां, एक नवजात और तीन बच्चों समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई। परिवार के मुखिया गंभीर रूप से जख्मी हो गए। मृतकों में सिकंदर सहनी की पत्नी पूजा देवी, तीन वर्षीय पुत्री शिवानी कुमारी, सात वर्षीय पुत्र राजकुमार, तीन वर्षीय पुत्र वीर बहादुर और एक नवजात पुत्र लाइगर कुमार शामिल हैं। घटना में चार लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि एक बच्चे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
श्रीराम मंदिर में चढ़ावे के गबन की रिपोर्ट तलब
श्रीराम मंदिर के दानपात्र की धनराशि के गबन प्रकरण के तूल पकड़ने के बाद ट्रस्टी नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि परिसर में ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ बैठक कर प्रकरण की जानकारी ली। उनके आगमन को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के निर्देश से जोड़ा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक प्रकरण में पीएमओ ने पूरी रिपोर्ट मांगी है। नृपेंद्र मिश्र ने मीडिया के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। दानपात्र गबन प्रकरण में पकड़े गए कर्मियों से पूछताछ चल रही है। अब तक दो-तीन स्थानों से पुलिस ने बड़ी रकम बरामद भी कर ली है। गणना से ही जुड़े कुछ कर्मी अभी रडार पर हैं। सूत्रों के अनुसार, इन कर्मियों की संख्या अब चार से बढ़ कर छह से नौ तक पहुंच गई है। दानपात्रों की धनराशि का बीते कई दिनों से ट्रस्ट आंतरिक आडिट करा रहा है। इसी दौरान यह पाया गया कि दर्शनार्थियों की संख्या तो अधिक है, परंतु दान पहले से कम हो गया है।
नरेंद्र मोदी: 9013 दिनों से सत्ता का शिखर पर
भास्कर के अनुसार पीएम नरेंद्र मोदी ने 10 जून को भारतीय राजनीति में नया कीर्तिमान अपने नाम कर लिया। 26 मई 2014 को पहली बार पीएम पद की शपथ लेने वाले मोदी ने 10 जून को कार्यकाल के 4,399 दिन पूरे करते हुए देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया। इसके साथ ही उन्होंने स्वतंत्र भारत के पहले पीएम जवाहरलाल नेहरू का 64 साल पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। नेहरू ने पहले आम चुनाव के बाद 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार 4,398 दिन प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया था। इसके साथ ही, मोदी सीएम और 3 बार पीएम के रूप में लगातार 9,013 दिन सत्ता के शिखर पर रहने वाले देश के एकमात्र नेता भी बन गए हैं। वे 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात के सीएम बने थे।
कुछ और सुर्खियां:
- पटना के बोरिंग रोड में मैनहोल की सफाई के दौरान दम घुटने से दो मजदूर बेहोश हुए, एक की मौत
- आईआईटी पटना में हाइब्रिड मोड के 10 छात्रों को मिला 56-56 लख रुपए का सालाना पैकेज
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- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का ऐलान अब इंडस्ट्री लगाने की मंजूरी सिर्फ 30 दिन में, नहीं तो डीम्ड क्लीयरेंस मिलेगा
अनछपी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया लेकिन अब भी सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड पंडित नेहरू के पास ही है क्योंकि वह 1947 से 1952 तक बिना निर्वाचन के प्रधानमंत्री रहे इसलिए उनका कुल कार्यकाल अब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ज्यादा है। भारतीय मीडिया में इस बात की बहुत चर्चा हुई लेकिन असल बात यह है कि कार्यकाल की अवधि महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि कार्यकाल में क्या किया गया, यह महत्वपूर्ण होना चाहिए। वास्तव में इस समय मीडिया में यह चर्चा होनी कि पंडित नेहरू को भारत किस रूप में मिला था और उन्होंने अपने कार्यकाल में आधुनिक भारत के लिए जो बुनियाद डाली वह आज कहां तक पहुंचा है। तकनीकी और मेडिकल शिक्षा से लेकर इंडस्ट्री लगाने तक पंडित नेहरू ने जो बुनियाद दी आज उसी की इमारत पर भारत खड़ा है। सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 12 साल के कार्यकाल में ऐसी बुनियाद दी है जो 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में सामने ला सके? कुछ मामलों में पिछले 12 सालों में जो तरक्की हुई है उसकी चर्चा भी जरूरी है जैसे कि डिजिटल लेनदेन, सड़कों और एक्सप्रेसवे का फैलाव, आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा और उज्ज्वला गैस योजना आदि। इसके साथ ही इस बात का जायजा लिया जाना भी जरूरी है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमीर उद्योगपतियों के पक्ष में ज्यादा फैसले किए? क्या पिछले 12 सालों में नोटबंदी और कोरोना के समय किए गए अजीबोगरीब फ़ैसलों से भारत के गरीब और मध्यम वर्ग की परेशानी बढ़ गयी है? प्रधानमंत्री मोदी वैसे तो सबका साथ, सबका विकास का नारा देते हैं लेकिन उनके बारे में यह गंभीर शिकायत है कि भारत की सामाजिक समरसता तहस नहस हो चुकी है और यहां सांप्रदायिक भेदभाव अपने चरम पर है। इसी तरह भारत की शिक्षा व्यवस्था भी बुरे हाल में बताई जाती है और हाल के दिनों में पेपर लीक कांड ने तो इसे और बदहाल कर दिया है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भारत ने पिछले 12 सालों में दिखने वाली कुछ कामयाबी हासिल जरूर की है लेकिन इसके साथ भारत को जो नुकसान हुआ है उसका आकलन करना भी जरूरी है।
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