बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी द्वारा हराए जाने के बाद अब ममता बनर्जी की पार्टी में बड़ी फूट डालने की कोशिश चल रही है। ईरान और इसराइल ने एक दूसरे पर हमले फिलहाल रोक दिए हैं।
पहली ख़बर
भास्कर के अनुसार प. बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का संकट संसद तक पहुंच गया है। पार्टी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर एनडीए का समर्थन करने का दावा किया है। लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं। बागी सांसदों ने अलग ब्लॉक के रूप में मान्यता और अलग बैठक व्यवस्था मांगी है। यह सब ऐसे समय हुआ जब टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने पहुंची थीं। दूसरी ओर, टीएमसी नेतृत्व ने बागियों के दावे का विरोध किया है। पार्टी ने 20 मई का वह पत्र जारी किया है, जिसमें ममता ने कल्याण बनर्जी को मुख्य सचेतक नियुक्त करने की सूचना लोकसभा अध्यक्ष को दी थी। पार्टी ने 29 मई की रिसीविंग सार्वजनिक की है। टीएमसी ने कहा, दल-बदल कानून में अलग समूह का प्रावधान नहीं है। सांसदों को किसी दल में विलय करना होगा।
जागरण के अनुसार इससे पहले विधानसभा में ऋतब्रत चटर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस के 58 विधायकों को अलग गुट के रूप में मान्यता मिल चुकी है। इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर राय ने राज्यसभा के साथ-साथ पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा, राज्यसभा सदस्य कोयल मलिक के भी इस्तीफा देने की चर्चा है। वैसे तो लोकसभा में 20 सांसदों के साथ दो-तिहाई बहुमत के बाद यह सांसद दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई से बच जाएंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें भाजपा में अपने गुट का विलय करना होगा। संविधान की अनुसूची 10 में पार्टी के किसी धड़े के अलग होने का प्रविधान नहीं है। केवल दो-तिहाई से अधिक सदस्य किसी अन्य दल में अपना विलय कर सकते हैं, जैसा कि हाल में राघव चड्ढा के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के. सात राज्यसभा सदस्यों ने किया।
ईरान-इसराइल ने हमले रोके
इसराइल-ईरान के बीच आठ अप्रैल को हुए संघर्ष विराम के दो महीने बाद दोनों देशों ने सोमवार तड़के एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले किए। हालांकि, ट्रंप की अपील के बाद ईरान और इसराइल ने एक-दूसरे पर फिलहाल हमले रोकने की घोषणा की, लेकिन तनाव बरकरार है। इससे पूरे पश्चिम एशिया में बड़े क्षेत्रीय युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। ईरान के मिसाइल हमले के जांब में इसराइल ने मध्य और पश्चिमी ईरान के ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान के इस्फहान, कराज, तबरीज, तेहरान में विस्फोटों की आवाजें सुनी गई। हमलों के बाद तेहरान में हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया गया। माहशहर स्थित एक पेट्रोकेमिकल संयंत्र को भी निशाना बनाया गया। इसराइल ने दावा किया कि ईरान की ओर से किए गए मिसाइल हमलों के जवाब में उसने कार्रवाई की।
बिहार में ज़मीन की मापी महंगी
भास्कर के अनुसार बिहार में अब सरकारी अमीन से जमीन की मापी कराना महंगा होगा। सरकार ने गांव और शहर दोनों जगह प्रति खेसरा मापी की दर दोगुनी कर दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। सम्राट कैबिनेट ने 8 साल पुरानी ‘बिहार राज्य फसल सहायता योजना’ को भी खत्म कर दिया है। इसकी जगह अब ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ लागू होगी। यह बदलाव साल 2026-27 की रबी फसल से प्रभावी होगा। 2018 से पहले भी यही व्यवस्था लागू थी। नई योजना के तहत किसानों को खरीफ फसल के लिए बीमा की 2 फीसदी राशि, रबी के लिए 1.5 फीसदी और वाणिज्यिक या बागवानी फसलों के लिए 5 फीसदी राशि प्रीमियम के तौर पर भरनी होगी। बाकी प्रीमियम का खर्च केंद्र और राज्य सरकार आधा-आधा उठाएगी। नई योजना के तहत 2 हेक्टेयर के अधिकतम जोत की सीमा हटा दी गई है। अब बड़े जोत वाले किसानों को भी बीमा कराई गई फसल के नुकसान का पूरा मुआवजा मिलेगा। बीमा कंपनी का चयन सबसे कम रेट की बोली के आधार पर होगा।
उपेंद्र कुशवाहा के बेटे को विधान परिषद का चुनाव लड़ने का मौका नहीं
प्रभात खबर के अनुसार बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए नामांकन के आखिरी दिन सोमवार को 10 दलीय उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया. राजद ने अंतिम दिन सुनील कुमार सिंह को एक बार फिर उम्मीदवार बनाया. श्री सिंह के नामांकन के साथ ही सभी 10 सीटों के लिए 10 नामांकन हुए. खास बात यह कि पंचायती राज मंत्री और एनडीए के घटक दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश ने नामांकन नहीं किया. ऐसे में 11 जून को नाम वापसी का निर्धारित समय खत्म हो जाने के बाद सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा कर दी जायेगी. मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच होगी.
इंडिया गठबंधन की बैठक में एसआईआर पर केंद्र को गिरने की रणनीति
हिन्दुस्तान के अनुसार विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ के नेताओं की सोमवार को दिल्ली में बैठक हुई। इसमें भाजपा से मुकाबला करने के लिए एकजुटता पर जोर देते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने का फैसला किया गया। बैठक में फैसला लिया गया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) और वोटों की कथित गड़बड़ी पर विपक्ष केंद्र की घेराबंदी करेगा। गठबंधन दलों ने केंद्र सरकार पर कथित तौर पर लोकतंत्र को नुकसान और चुनाव आयोग पर सरकार को लाभ पहुंचाने की कोशिश का आरोप लगाया। विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से तय किया कि एस आईआर के मसले पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। इसे लेकर जल्द मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजने पर सहमति बनी।
कुछ और सुर्खियां:
- विशाखापट्टनम में राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के स्टील प्लांट में पिघला हुआ लोहा गिरने से आठ कर्मचारियों की मौत
- पीओके में हिंसक झड़प में 11 की मौत, 100 घायल
- औरंगाबाद में आंध्र प्रदेश की टूरिस्ट बस ट्रक से टकराई, तीन की मौत, 22 घायल
- उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने दोबारा मंत्री बनने के खिलाफ याचिका
- फिलिपींस में भूकंप से 35 लोगों की मौत
- उज्ज्वला योजना के तहत 9 की जगह चार गैस सिलेंडर पर ही मिलेगी सब्सिडी
- बिहार के 211 नए डिग्री कॉलेज में गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति पर लगी रोक
- भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल के घर से बॉडीगार्ड की पिस्टल दस्तावेज कंप्यूटर और सीसीटीवी कैमरा चोरी
अनछपी: बिहार की राजनीति में सेवा का नाम लेकर सिर्फ मेवा खाने पर अगर कोई किताब लिखी जाएगी तो उसमें उपेंद्र कुशवाहा का जिक्र जरूर होगा जिनके बेटे दूसरी बार मंत्री बने हैं और एक बार भी बिहार विधानमंडल की किसी सदन के सदस्य नहीं बन पाए। जेपी और लोहिया का नाम लेकर राजनीति करने वाले उपेंद्र कुशवाहा ने उनकी नीतियों की धज्जियां उड़ाते हुए अपने बेटे को मंत्री बनवाया और अपनी पत्नी को भी चुनाव लड़ा कर बिहार विधानसभा भेजा। उपेंद्र कुशवाहा के बारे में याद करने की बात यह है कि वह नीतीश कुमार के साथ राजनीति करने के बावजूद एक बार राष्ट्रीय लोक समता पार्टी बनाई और दूसरी बार राष्ट्रीय लोक मोर्चा बनाया। वह उम्मीद कर रहे थे कि जैसे नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को बिहार विधान परिषद का सदस्य बनाया जा रहा है वैसा ही मौका उनके बेटे दीपक प्रकाश को भी मिलेगा। इस मामले में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश की यह शिकायत सही मालूम पड़ सकती है कि नेता के बेटा तो निशांत कुमार भी हैं लेकिन उन्हें तो विधान परिषद का सदस्य बनने का मौका मिल गया तो दीपक प्रकाश को इस सुविधा से क्यों वंचित होना पड़ा। इस परिस्थिति में भी उपेंद्र कुशवाहा पुत्र मोह में अपने आत्म सम्मान को ठिकाने लगाने से भी नहीं चूक रहे हैं। इसे ढिठाई कहा जा सकता है कि वह अपने पुत्र को इस्तीफा देने के लिए कहने के बजाय कह रहे हैं कि जब तक एनडीए चाहेगा उनका पुत्र मंत्री बना रहेगा। लोकतंत्र में इस राजतंत्र का कोई इलाज भारत में नजर नहीं आता और इस मामले में कोर्ट भी कोई मतलब रखते हुए नहीं दिख रहा है।
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