छपी-अनछपी: आज बिहार बंद-माले विधायक गिरफ्तार, प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा आंदोलन

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। नीट पेपर लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और दिल्ली में जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज के खिलाफ आज शनिवार को बिहार बंद है। नीट पेपर लीग मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई तरह के ऐलान कर रहे हैं लेकिन छात्र आंदोलन और विपक्ष इस बात पर अड़े हैं कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हर हाल में इस्तीफा देना होगा।

पहली ख़बर

जागरण के अनुसार ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने नीट प्रश्नपत्र लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और दिल्ली में जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज के खिलाफ शनिवार को बिहार बंद का आह्वान किया है. माले, राजद और वीआइपी ने भी इस बंद को समर्थन दिया है. इधर, बिहार बंद के मद्देनजर पुलिस मुख्यालय ने अलर्ट जारी कर दिया है. पुलिस मुख्यालय ने राज्यभर के सभी एसपी और एसएसपी से जिलों की स्थिति के बारे में जानकारी ली है. साथ ही सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया गया है. इसके अलावा सरकारी कार्यालयों समेत भीड़ जुटने वाली जगहों की विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया. (इस कॉलम के साथ दी गयी तस्वीर सीपीआई एमएल ने जारी की है।)

माले विधायक और आइसा के नेता गिरफ्तार

शनिवार को प्रस्तावित बिहार बंद के पहले पुलिस ने भाकपा-माले के विधायक संदीप सौरभ सहित 19 छात्र नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस टीम ने शुक्रवार की देर रात से ही पटना विवि के हॉस्टल, लॉज व अन्य जगहों पर छापेमारी अभियान चलाया और पालीगंज के विधायक संदीप सौरव और अन्य को गिरफ्तार कर लिया. संदीप सौरभ को कोतवाली इलाके से गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार 19 लोगों में तीन युवतियां भी शामिल हैं. इसके अलावा इनमें आइसा के बिहार अध्यक्ष

धनंजय कुमार, राज्य सचिव दीपांकर मिश्रा, उपाध्यक्ष सबा आफरीन व बिहार मीडिया प्रभारी कुमार दिव्यम शामिल हैं. साथ ही पुलिस ने 43 अन्य को हिरासत में लिया है और उनकी संलिप्तता को लेकर छानबीन जारी है. पुलिस का कहना है कि 22 जुलाई को हुई हिंसा और उपद्रव को लेकर गिरफ्तारी की गयी है. इधर, पुलिस मुख्यालय ने अधिकारियों और जवानों की छुट्टियां भी रद्द कर दी है. गश्त बढ़ा दी गयी है.

मुजफ्फरपुर में 10 हज़ार का इनाम घोषित

जागरण के अनुसार नीट पेपर लीक के विरोध व दिल्ली-पटना में लाठीचार्ज के विरोध में प्रदर्शन को देखते हुए शुक्रवार को बिहार में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मुजफ्फरपुर में एहतियातन पुलिस सब डिवीजन टाउन-2 में शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे से रविवार सुबह 10 बजे तक सभी इंटरनेट नेटवर्किंग साइट व मैसेजिंग सर्विस पर रोक लगा दी गई थी हालांकि देर रात इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई।  वहीं, गुरुवार को तोड़‌फोड़ करने वालों की पहचान के लिए मुजफ्फरपुर पुलिस ने आठ उपद्रवियों की तस्वीर जारी करते हुए 10-10 हजार रुपये इनाम की घोषणा की है। कटिहार में गुरुवार को कलेक्ट्रेट गेट पर प्रदर्शन के दौरान हुए पथराव व उपद्रव के आरोप में पुलिस ने अब तक एक युवती समेत 23 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

बिहार पुलिस ने 391 तस्वीरें जारी कर उन्हें बताया उपद्रवी

प्रभात ख़बर के अनुसार नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पटना समेत बिहार के कई जिलों में प्रदर्शन के दौरान हुई तोड़फोड़ पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है. पुलिस ने राज्यभर में 391 लोगों को उपद्रवी घोषित करते हुए इनकी तस्वीर जारी की है और जनता से इनकी पहचान करने की अपील की है.

प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा आंदोलन

जागरण के अनुसार केंद्र सरकार और काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों के बीच शुक्रवार को हुई वार्ता निर्णायक मोड़ तक नहीं पहुंच सकी। आंदोलित युवाओं की तीन प्रमुख मांगों में से दो पर सरकार ने सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर मामला अटका हुआ है। सीजेपी इसे आंदोलन का मुख्य मसला बताते हुए पीछे हटने को तैयार नहीं है। सबकी निगाहें शनिवार दोपहर बाद होने वाली वार्ता पर टिकी हैं। इधर, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को दोहराया कि जब तक पेपर लीक के लिए जिम्मेदार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हो जाता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पुलिस की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई के लिए छात्रों से माफी नहीं मांग लेते, तब तक न तो सरकार से कोई बातचीत होगी और न ही चर्चा। पेपर लीक के विरुद्ध कठोर कदम उठाने के प्रधानमंत्री के आश्वासनों को खारिज करते हुए राहुल ने इसके लिए उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया। नेता विपक्ष ने संसदीय परंपराओं के विरुद्ध एक बार फिर उन्हें सदन में नहीं बोलने देने और माइक बंद किए जाने का भी आरोप लगाया।

सरकार ने लिए धुंआधार फैसले

नीट पेपर लीक मामले को लेकर खड़े हुए आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने सुधार की दिशा में धुंआधार फैसले लिए हैं। सरकार नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं को पेपर लीक सहित दूसरी गड़बड़ियों से बचाने के लिए 2024 के अपने कानून को और सख्त बनाएगी। इसमें गड़बड़ियों की जांच और दोषियों को पकड़ने के लिए एक समर्पित टीम गठित होगी, साथ ही दोषियों को तीन महीने के भीतर सजा दिलाई जा सके, इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को एक वीडियो संदेश जारी कर पेपर लीक के विरुद्ध कड़ा कानून लाने और फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित को कैबिनेट ने संधोधित कानून के करने का एलान किया था। शुक्रवार मसौदे को मंजूरी दे दी और पूरी संभावना है कि सोमवार को ही इसे संसद में पेश कर दिया जाएगा।

पेलेट गन से हुए हमले, ऐसा करने वालों पर हो कार्रवाई: राहुल गांधी

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बीते सोमवार संसद मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल किए जाने के प्रमाण के तौर पर पैलेट गन से घायल एक आंदोलनकारी छात्र साहिल केधावों को दिखाते हुए सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने छात्रों पर ऐसे हमले को देश के भविष्य पर हमला बताते हुए लाठीचार्ज तथा पैलेट गन चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की पुरजोर आवाज उठाई। वहीं, शिक्षा मंत्री पर बेहद तीखा हमला करते हुए राहुल कहा कि धर्मेंद्र प्रधान एक “आपराधिक शिक्षा मंत्री हैं। भारत की शिक्षा व्यवस्था के ध्वस्त होने का प्रतीक हैं। इसलिए उन्हें हटाया जाना चाहिए। पीड़ित छात्र साहिल को लेकर मीडिया से रूबरू हुए कहा कि मेरे इस भाई को पैलेट गन के छर्रे तब लगे जब वह हाथ में तिरंगा लेकर शांतिपूर्ण विरोध कर रहा था। हजारों युवाओं के साथ ऐसा ही हुआ है। उन पर पैलेट गन से गोली चलाई गई है।

दो पोतों पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत

हिन्दुस्तान के अनुसार काला सागर और ईरान के जलक्षेत्र में दो पोतों पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि 28 नाविकों को सुरक्षित बचाया गया। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि 18 जुलाई को काला सागर में रूस जलक्षेत्र से गुजर रहे पोत एमवी ओमोरफी पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। वहीं, शुक्रवार को ईरान के जलक्षेत्र से गुजर रहे मोजाम्बिक के झंडे वाले एलपीजी टैंकर ‘दिशा’ पर हमला किया गया। पोत पर सवार भारतीय चालक दल के सभी 28 सदस्य सुरक्षित हैं। एमवी ओमोरफी पर हमले के समय पोत पर चालक दल के कुल 10 सदस्य थे, जिनमें तीन भारतीय नागरिक थे। 19 जुलाई को यूक्रेन तट के पास एमवी गोल्डन लियो पर हुए हमले में चार भारतीयों की मौत हो गई थी।

कुछ और सुर्खियां:

  • सूरजपुरी मुसलमानों को अति पिछड़ा दर्जा देने के लिए बिहार सरकार कराएगी सर्वे
  • राजद के पूर्व प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी भारतीय जनता पार्टी में शामिल
  • मेडल लाओ नौकरी पाओ नीति के तहत क्रिकेटर आकाशदीप और मुकेश कुमार बिहार पुलिस में डीएसपी बने
  • असम, गुजरात और जम्मू कश्मीर में बाढ़ से कम से कम 73 लोगों की मौत

अनछपी: नीट पेपर लिक और शिक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और नौजवानों के खिलाफ बिहार पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर जो रवैया अपनाया है, उसके लिए एक ही शब्द है- तानाशाही। पटना में पुलिस ने जिस तरह आइसा के छात्र नेताओं और भाकपा माले के विधायक संदीप सौरभ को गिरफ्तार किया है वह बेहद चिंतनीय और निंदनीय है।मुजफ्फरपुर पुलिस ने तो तमाम सीमाओं को पार करते हुए छात्र आंदोलनकारियों को उपद्रवी घोषित करते हुए न केवल उनकी तस्वीरें जारी कीं बल्कि उन पर इनाम घोषित कर दिया जैसे कोई वह दुर्दांत अपराधी हों। उम्मीद की जानी चाहिए कि यह सब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जनता दल यूनाइटेड के नेतृत्व की मर्जी से नहीं हो रहा है बल्कि पुलिस कुछ ज्यादा उत्साह दिखा रही है। यह सही है कि हिंसा नहीं होनी चाहिए और तोड़फोड़ से भी बचा जाना चाहिए लेकिन पुलिस जिस तरह छात्रों का दमन कर रही है वह भी नहीं होना चाहिए और उसके लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इस सिलसिले में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत का यह बयान विचारणीय है जिसमें उन्होंने कहा कि बल प्रयोग अंतिम विकल्प है और निर्दोष छात्रों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। अब पुलिस अधिकारियों से यह पूछा जा सकता है कि अगर उनके जवान अंधाधुंध लाठी चलाते हैं तो क्या वह यह देखते हैं कि कौन दोषी है और कौन निर्दोष? यह भी ध्यान में रखने की बात है कि ऐसे आंदोलन कर रहे छात्र पुलिस की नजर में मुलजिम तो हो सकते हैं लेकिन वह उन्हें मुजरिम करार देने का अधिकार नहीं रखती। बेहतर यह है कि पुलिस छात्र आंदोलन में रुकावट ना डाले और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने में प्रशासन भी अड़ंगा न डाले। हिंसा किसी का भी स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए चाहे वह प्रदर्शनकारी करें या पुलिस वाले। लेकिन ऐसा भी ना हो कि पुलिस वाले हिंसा करते रहें और उन पर कोई कार्रवाई भी ना हो।

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