बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में छात्रों के आंदोलन के दौरान प्रदर्शन करने वाले 400 से अधिक छात्रों और युवाओं को गिरफ्तार किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर पिछले करीब दो सप्ताह से जारी हमलों को फिलहाल रोक दिया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भुवनेश्वर से भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सचिन राहर की इंटरनेट मीडिया पोस्ट को लेकर ओडिशा भाजपा में विवाद गहरा गया है।
और, जानिएगा की सुप्रीम कोर्ट के किस जज ने यह कहा कि गंगा में नाव पर बिरयानी खाना अपराध नहीं तो गिरफ्तारी क्यों हुई?
पहली ख़बर
प्रभात ख़बर के अनुसार नीट पेपर लीक मामले को लेकर शनिवार को हुए हिंसक बिहार बंद और पुलिस पर जानलेवा हमलों के बाद पूरे प्रदेश में पुलिस की कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी रही. (नोट: बिहार बंद को हिंसक कहना और प्रदर्शनकारियों को उपद्रवी शब्द का इस्तेमाल पुलिस के कहने पर किया गया लगता है।) रविवार को पटना, सीवान, छपरा, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, भागलपुर, किशनगंज, पूर्णिया, सहरसा और लखीसराय समेत सभी प्रभावित जिलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 400 से अधिक उपद्रवियों और साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया या हिरासत में लिया गया. राजधानी पटना में पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव समेत 190 लोगों को जेल भेज दिया गया, तो वहीं सीवान जिले में 102 और पूर्वी बिहार के जिलों में 80 से अधिक उपद्रवी सलाखों के पीछे पहुंचे. शनिवार को हुए हिंसक प्रदर्शन और पुलिस पर हमले में शामिल उपद्रवियों की पहचान करने के लिए पुलिस ने कई जिलों में सैकड़ों फोटो और पोस्टर जारी कर आम लोगों से अपील की है.
तेजस्वी ने सभी को रिहा करने का दिया अल्टीमेटम
जागरण के अनुसार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव 24 दिनों की विदेश यात्रा से लौटने के बाद सरकार पर हमलावर हो गए। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर छात्रों और विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए तेज प्रताप यादव समेत गिरफ्तार सभी लोगों को 24 घंटे के भीतर रिहा करने और उन पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पूरे बिहार में आंदोलन करेगा। रविवार को यहां पहुंचने पर तेजस्वी सीधे जयप्रभा मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गौली से घायल सिवान जिले के तीन आंदोलनकारियों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।
धर्मेंद्र प्रधान पर पोस्ट से ओडिशा भाजपा में बवाल
केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भुवनेश्वर से भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सचिन राहर की इंटरनेट मीडिया पोस्ट को लेकर ओडिशा भाजपा में विवाद गहरा गया है। आरोप है कि अर्चिता ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर खुशी जाहिर करते हुए पोस्ट साझा की, जिसे पार्टी के कई नेताओं ने अनुशासन के खिलाफ बताया। अर्चिता ने इंस्टाग्राम पर धर्मेंद्र प्रधान की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “नीट प्रश्नपत्र लीक प्रकरण को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया।” यह पोस्ट देखते ही देखते प्रसारित हो गया। दूसरी ओर, सांसद अपराजिता सारंगी ने सार्वजनिक रूप से धर्मेंद्र प्रधान के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा देना साहस का काम है। वह इस कठिन समय में धर्मेंद्र प्रधान के साथ खड़ी हैं। सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान के कार्यालय से संपर्क किए जाने के बाद अपराजिता ने बेटी से पोस्ट हटाने को कहा, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बाद अर्चिता ने एक और पोस्ट में लिखा कि, “डीपी (धर्मेंद्र प्रधान) के पीए मेरी मां से मेरी पिछली स्टोरी हटाने के लिए कहेंगे, जैसा पहले भी हुआ है, लेकिन मैं इसे डिलीट नहीं करूंगी। जय जगन्नाथ। जय हिंद।” इस मुद्दे पर विवाद बढ़ने के साथ अर्चिता का इंस्टाग्राम अकाउंट दिखाई देना बंद हो गया है।
परीक्षा सुधार के लिए हाईपावर टास्क फोर्स गठित
हिन्दुस्तान के अनुसार नीट पेपर लीक मामले में छात्रों का प्रदर्शन खत्म होने के एक दिन बाद ही रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधार के लिए हाईपावर टास्क फोर्स गठित करने का ऐलान किया। इसमें छह सदस्य होंगे। इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी अध्यक्ष बनाए गए हैं। यह विशेषज्ञ समूह विशेष रूप से प्रौद्योगिकी आधारित परीक्षा प्रणाली और संरचनात्मक सुधारों पर काम करेगा। प्रधानमंत्री ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि छात्रों के भविष्य के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है।
कांग्रेस की मांग: छात्रों पर बल प्रयोग के लिए माफी मांगें प्रधानमंत्री
नई दिल्ली। संसद में सोमवार को सरकार पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश कर सकती है, लेकिन इससे पहले विपक्ष ने नई शर्तें रख दी हैं। कांग्रेस छात्रों पर बल प्रयोग के खिलाफ सख्त कार्रवाई एवं प्रधानमंत्री से माफी की मांग कर रही है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर विपक्ष के इरादे साफ कर दिए हैं। दो पेज के पत्र में उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बर्बर हमले की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने पूछा है कि पैलेट गन के प्रयोग की इजाजत किसने दी थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन महत्वपूर्ण हैं।
अमेरिका ने फिलहाल ईरान पर हमला रोका
हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर पिछले करीब दो सप्ताह से जारी हमलों को फिलहाल रोक दिया है। उन्होंने कहा कि समझौता ही बेहतर विकल्प है। योजना तैयार होने के बावजूद ट्रंप ने सेना को नए हमले करने से मना कर दिया है। अमेरिका का ध्यान अब बातचीत पर है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर उसने सैन्य अभियान फिर से शुरू करने की पूरी तैयारी कर रखी है। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, ट्रंप ने कूटनीतिक कोशिशों को मौका देने, घटते मिसाइल रक्षा भंडार की चिंता और युद्ध ज्यादा बढ़ने के डर से ये फैसला लिया है। ट्रंप ने कहा, अमेरिका तैयार है, लेकिन उनका मानना है कि ईरान के साथ समझौता करना ज्यादा समझदारी होगी।
गंगा में नाव पर बिरयानी खाना अपराध नहीं तो गिरफ्तारी क्यों
जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्जल भुयन ने वाराणसी के चर्चित गंगा में नाव पर गंगा में नाव पर चर्चित इफ्तार पार्टी प्रकरण का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि यदि गंगा में नाव पर बिरयानी खाना कानूनन अपराध नहीं है तो युवाओं को गिरफ्तार कर तीन महीने तक जेल में क्यों रखा गया? उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि कानून का उपयोग नागरिकों की स्वतंत्रता सीमित करने के लिए किया जा रहा है। वह शनिवार को भोपाल स्थित राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय (एनएलआइयू) में न्यायमूर्ति जीपी सिंह चतुर्थ स्मृति व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। न्यायपालिका में जनविश्वास, न्यायिक निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लोकतंत्र की आधारशिला बताते हुए उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की सबसे बड़ी शक्ति जनता का विश्वास है। जब तक समाज का भरोसा न्यायपालिका पर बना रहेगा, तब तक लोकतंत्र भी मजबूत रहेगा। अपने संबोधन में न्यायमूर्ति भुयन ने कहा कि देश में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दायरा लगातार सिमटता दिखाई दे रहा है। अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को गिरफ्तार किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण की आवाज उठाने वालों के साथ भी कई बार अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाता है।
कुछ और सुर्खियां:
- रोहतास जिले के बिक्रमगंज शहर में रविवार को दिनदहाड़े 35 लाख के गहनों की लूट
- बेगूसराय के कावर झील की बिगड़ती हालत पर केंद्र और राज्य को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का नोटिस
- यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह पर चार भारतीयों वाले वाणिज्यिक पोत पर हमला, दो लापता
- राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अर्जुन राय ने पार्टी से इस्तीफा दिया, भाजपा में जा सकते हैं
अनछपी: पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान एक बार फिर से जीविका दीदियों की भूमिका सवालों के घेरे में है और उन पर वही आरोप लग रहा है जो विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान लगा था। आप अगर सरकारी वेबसाइट पर जाएंगे तो वहां यह लिखा हुआ पाएंगे कि जीविका बिहार सरकार की गरीबी उन्मूलन पहल है। दूसरी तरफ अगर इसका व्यावहारिक पहलू देखा जाए तो जीविका सरकार और सरकार चलाने वाले नेताओं के लिए यह एक राजनीतिक विंग के तौर पर काम कर रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर जीविका दीदियों को बसों में भर भर कर उनके राजनीतिक कार्यक्रम में लाया जाता था। यहां तक इल्जाम लगा कि उन जीविका दीदियों को इस बात की धमकी दी जाती थी कि अगर वह उनके कार्यक्रम में नहीं गईं तो उनकी हाजिरी काट दी जाएगी। अब बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव लड़ रहे जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने जीविका दीदियों के माध्यम से मतदाताओं पर भाजपा के पक्ष में मतदान का दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि 24 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर सोमवार को चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर धरना दिया जाएगा। उनका आरोप है कि जीविका दीदियों के जरिए लोगों तक तक यह संदेश पहुंचाया जा रहा है कि भाजपा के पक्ष में वोट नहीं डालने पर उनके लिए सरकारी योजनाओं का लाभ बंद हो सकता है। यह गंभीर आरोप है लेकिन अफसोस की बात है कि चुनाव आयोग इस मामले में बिल्कुल खामोश है। दरअसल जीविका दीदियों का इस तरह राजनीतिक इस्तेमाल बिहार के लिए एक बेहद गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए।
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