बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पटना जिले के दानापुर रेल मंडल में चलती ट्रेन में लूटपाट के दौरान ट्रेन से फेंकने की वजह से एक युवक की मौत हो गई (साथ दी गयी तस्वीर एआई से बनी है।)। अमेरिका ने ईरान के पांच तेल टैंकर डुबो दिए तो जवाब में ईरान ने भी हमले किए। बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी नीतीश कुमार की शराबबंदी को जारी रखेंगे। बिहार में बाढ़ में कमी आई है लेकिन अब तक 41 लाख लोग इससे प्रभावित हुए हैं। मतदाता पुनरीक्षण अभियान- एसआईआर में भारत रत्न वैज्ञानिक सीएन राव को भी नोटिस मिला।
और, जानिएगा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कुछ पुलिस अफसरों को झूठों का जमावड़ा क्यों कहा?
पहली ख़बर
प्रभात खबर की सबसे बड़ी खबर है कि दानापुर रेल मंडल के नेऊरा और सदिसोपुर स्टेशन के बीच रविवार की देर रात चलती ट्रेन में अपराधियों के दुस्साहस और रेल पुलिस की घोर लापरवाही का वाला मामला सामने आया है. ट्रेन की विकलांग बोगी में चार शातिर अपराधियों ने खुद को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का अधिकारी बताकर दो युवकों से बर्बरतापूर्वक मारपीट और लूटपाट की. घटना रविवार की रात 11 से 12 बजे के बीच की है. जब आरा के अनाईठ (धोबी घाट) निवासी 20 वर्षीय कैलाश कुमार ने विरोध किया, तो बदमाशों ने उसकी ही शर्ट से हाथ-पैर बांधकर उसे चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी. वहीं, उसके साथी आरा के नइका टोला, जगदीशपुर निवासी रितेश कुमार को इतना पीटा कि वह बेहोश हो गया. इस सनसनीखेज वारदात के बाद दानापुर जीआरपी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. लावारिस शव की शिनाख्त के लिए निर्धारित कानूनी मियाद (72 घंटे) पूरी होने से पहले ही महज 24 घंटे के भीतर आनन-फानन में शव का दाह-संस्कार कर दिया गया, जिससे परिजन पुलिस पर मामले को दबाने का आरोप लगा रहे हैं.
अमेरिका ने ईरान के पांच तेल टैंकर डुबोए
जागरण के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग तेज हो गई है। ईरान ने बुधवार को कहा कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के पास 10 जहाजों को निशाना बनाया है। ये हमले अमेरिका के पांच ईरानी तेल टैंकरों को समुद्र में डुबोने की कार्रवाई के बाद किए गए। इन हमलों में एक नाविक के मारे जाने और एक के लापता होने की सूचना है। ये हमले छह महीने से रह-रहकर तेज होने वाले युद्ध में ताजा कार्रवाई हैं। इन हमलों की वजह से विश्व बाजार में कच्चे तेल का मूल्य बढ़कर 100 डालर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। यह मूल्य बढ़ोतरी जुलाई के बाद सर्वाधिक है। ईरान ने कहा है कि उसने जार्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर भी बैलिस्टिक मसाले से हमला किया है।
शराबबंदी को जारी रखेंगे सम्राट
हिन्दुस्तान के अनुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दो टूक कहा है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी आगे भी लागू रहेगी। इससे कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भले ही इससे बिहार को सालाना 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन यह ऐतिहासिक फैसला बिहार की आधी आबादी के सम्मान से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने एक समाचार एजेंसी के साथ बातचीत में राज्य में शराबबंदी, बाढ़, रोजगार, पलायन से लेकर कई राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं के आग्रह पर राज्य में शराबबंदी लागू की थी।
बिहार में 41 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित
जागरण के अनुसार बिहार में बाढ़ प्रभावितों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। कई पंचायतें टापू बन गई हैं। नए इलाकों में भी पानी फैल रहा है। बाढ़ के पानी में डूबने से दो लोगों की मौत हुई है। जबकि गंडक के कटाव ने भी तबाही मचाई है। गन्ना किसानों को अपनी फसल कम कीमत पर बेचने को मजबूर होना पड़ा है। गंगा, कोसी, बागमती और बूढ़ी गंडक खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। पटना में पुनपुन लगातार दबाव बना रही है। बढ़इया कोल बांध का एक हिस्सा टूट गया। श्रीपालपुर में पुनपुन खतरे के निशान से 2.60 मीटर और गांधी घाट पर गंगा 1.52 मीटर ऊपर है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार अब 14 जिलों की 41.45 लाख की आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है। पटना में जलस्तर घटने के बावजूद खतरा बरकरार है।
एसआईआर में भारत रत्न वैज्ञानिक प्रोफेसर राव को भी नोटिस मिला
भारत रत्न से सम्मानित और मशहूर वैज्ञानिक 92 वर्षीय प्रोफेसर सीएन आर राव को कर्नाटक में चल रही मतदाता सूची की एसआईआर के तहत एक नोटिस मिला। यह नोटिस उनके नाम की स्पेलिंग में अंतर के कारण भेजा गया था। इसको लेकर हुए विवाद के बाद चुनाव आयोग के अधिकारी उनके घर जाकर सत्यापन करेंगे। वहीं ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण ने कहा कि राव को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था। पुरानी वोटर लिस्ट में उनका नाम प्रोफेसर सीएनआर रहा है जबकि मौजूदा वोटर लिस्ट में उनके प्रोफेशनल टाइटल में एक अतिरिक्त ‘एफ’ है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुछ पुलिस अफसरों को झूठों का जमावड़ा क्यों कहा?
हिन्दुस्तान के प्रयागराज संस्करण के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को अवैध हिरासत में रखे जाने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने थाने के सीसीटीवी कैमरों के खराब होने और हिरासत की अवधि की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने को लेकर थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक से तीखे सवाल किए। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने अधिकारियों की सफाई पर नाराजगी जताते हुए मौखिक रूप से झूठों का झुंड तक कह दिया। अवैध हिरासत के मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार को चारों याचियों को मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। याची संख्या 2, 3 व 4 को 20-20 हजार रुपये और याची संख्या एक को पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। कुल 65 हजार रुपये की यह राशि संबंधित थाना प्रभारी के वेतन से वसूल की जाएगी। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने महेंद्र गौर एवं तीन अन्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए की है।
कुछ और सुर्खियां:
- 11 सितंबर को बैंकों में हड़ताल रहेगी, 12 और 13 को बैंकों की छुट्टी
- आईटी शेयर मार्केट लुढ़का, सेंसेक्स 813 अंक टूटकर 3 महीने के निचले स्तर पर 74764 पर बंद हुआ
- बांका के चंदन अंचल कार्यालय में ₹20000 घूस लेते सीओ गिरफ्तार, जमीन की दखलदह नानी के लिए मांगी थी रिश्वत
- रांची में आरएसएस कार्यालय पर हमले के मामले में एनआईए का पटना के कंकड़बाग में छापा
- अप्रैल 2007 के पहले सप्ताह से शुरू होगी हज यात्रा, बिहार से जाएंगे 3637 यात्री
अनछपी: आज वर्ल्ड सुसाइड प्रीवेंशन डे है और भारत में इसकी बहुत कम लोगों को जानकारी होगी की आत्महत्या रोकने के लिए भी किसी दिवस का आयोजन होता है हालांकि इसकी बढ़ती संख्या को देखते हुए देश में इसके बारे में चर्चा बेहद जरूरी है। हाल के एक रिसर्च में बताया गया है कि बीते 10 वर्षों में किशोर में खुदकुशी के विचार दो गुना तक बढ़ गए हैं। 2026 में प्रकाशित चाइल्ड एंड एडोलेसेंट साइकिएट्री एंड मेंटल हेल्थ के एक अध्ययन में 2016 और 2023 के बीच भारतीय किशोरों में आत्महत्या से जुड़े व्यवहार की तुलना की गई है। इसी तरह एनसीआरबी की एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड इन इंडिया 2024 की रिपोर्ट के अनुसार 2024 में भारत में छात्र आत्महत्याओं की संख्या 2023 के 13892 से बढ़कर 2024 में 14488 हो गई। 2014 में यह आंकड़ा 8068 था यानी एक दशक में आत्महत्या में 80% वृद्धि हुई है। इतनी भयावह तस्वीर के बावजूद आत्महत्या रोकने के मामले में हम जब विश्लेषण करते हैं तो उसके सभी पहलुओं पर ध्यान न देकर ज्यादा फोकस इस बात पर होता है कि छात्रों की काउंसलिंग कैसे की जाए लेकिन जरूरत इस बात की भी है कि सरकार की भी काउंसलिंग हो कि वह छात्रों के लिए ऐसी स्थिति न पैदा करे जिससे वह आत्महत्या के लिए मजबूर होते हैं। छात्रों में आत्महत्या की एक वजह तो उन पर पढ़ाई का दबाव होता है लेकिन दूसरी तरफ कैंपस के हालात और सरकार के जरिए उनकी सुविधाओं और छात्रवृत्तियों में कमी भी बहुत बड़ा कारण बन गया है जिसकी चर्चा बहुत कम होती है। दिक्कत यह है कि जिन मंचों पर इस बात की चर्चा होनी चाहिए उन्हें सरकार की सहायता की दरकार होती है इसलिए वह ऐसा कोई सवाल खड़ा नहीं करते जिससे सरकार नाराज हो जाए। ऐसे में उन सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है जो ऐसे किसी सरकारी दबाव में नहीं होते लेकिन उनकी तरफ से भी आत्महत्या रोकने में सरकार की जिम्मेदारी पर बात नहीं होती है। इस मामले में पहले ही काफी देर हो चुकी है और जितनी जल्द हो सके इस पर विचार विमर्श शुरू होना चाहिए।
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