छ्पी-अनछपी: 400 नए डिग्री कॉलेज खुलेंगे, नेटो की तर्ज पर पाक-तुर्की-सऊदी समझौता

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में 400 नये डिग्री कालेज खोले जायेंगे। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच रक्षा समझौता हुआ है जिसमें से किसी एक देश पर भी होने वाले हमले को तीनों पर हमला माना जाएगा। सहरसा में साढ़े साल की नौकरी के दौरान जिला प्रोग्राम ऑफिसर ने काली कमाई से बने 5 करोड़ की संपत्ति। पटना में सड़क दुर्घटना में युवक की मौत के बाद आगजनी, 3 घंटे हुआ बवाल।

और, जानिएगा कि भारत के टॉप 10 साइबर क्राइम जिलों में पटना समेत बिहार के तीन जिले।

पहली खबर

प्रभात खबर के अनुसार बिहार में 400 नये डिग्री कालेज खोले जायेंगे. वहीं, सरकारी स्कूलों में 15 अगस्त से रात 11 बजे तक शिक्षक जेइइ-नीट की तैयारी के लिए आनलाइन उपलब्ध रहेंगे. शुक्रवार को ज्ञान भवन में संत शिरोमणि गुरु रविदास के 650वें जयंती वर्ष के अवसर पर बिहार सरकार और भाजपा की ओर से आयोजित ‘समरसता संकल्प अभियान’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसकी घोषणा की. सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार से छात्रों का पलायन रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसी उद्देश्य से राज्य में पहले ही 211 नये डिग्री कॉलेज खोले जा चुके हैं और अब 400 से अधिक नये डिग्री कॉलेज स्थापित किये जायेंगे. बिहार सरकार स्टूडेंट्स क्रेडिट कार्ड योजना से करीब 18 हजार करोड़ रुपये दूसरे राज्यों में बच्चों को पढ़ने के लिए भेजती है, इसे रोकने के लिए पूरी व्यवस्था की जा रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि नये 211 डिग्री कॉलेजों में 10 अगस्त से शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित की जायेगी.

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच रक्षा समझौता

भास्कर के अनुसार पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये में से किसी एक देश पर भी होने वाले हमले को तीनों पर हमला माना जाएगा। पाक पीएम शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रकब्जा तैयब अर्दोआन ने मक्का में संयुक्त रक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। संयुक्त बयान के अनुसार, ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का उद्देश्य किसी भी आक्रमण के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करना और रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं का विस्तार करना है।’ इसमें संयुक्त प्रशिक्षण, सुरक्षा समन्वय और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने का प्रावधान भी है। ‘मुस्लिम नाटो’ गठबंधन के संकेत देता यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब पश्चिम एशिया का संघर्ष लाल सागर और बाब-अल-मंदेब तक फैल चुका है। इससे पहले, सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी ऐसा ही रक्षा समझौता कर चुके हैं।

जिला प्रोग्राम ऑफिसर ने काली कमाई से बनाई 5 करोड़ की संपत्ति

भास्कर के अनुसार साढ़े चार साल की नौकरी में सहरसा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) अजीत अमर को 38 लाख रुपए सैलरी मिली। इसके बावजूद उन्होंने काली कमाई से करीब 5 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति बना ली। अवैध कमाई की रकम वे पत्नी पूजा कुमारी के खाते में डलवाते थे। अजीत के खिलाफ डीए का केस दर्ज करने के बाद ईओयू की चार टीमों ने शुक्रवार को सीवान, सहरसा और छपरा के चार ठिकानों पर छापेमारी की। अजीत अमर मूल रूप से सीवान के दरौंदा थाना के रैनी गांव के रहने वाले हैं। ईओयू की टीम ने उनके आवास, कार्यालय और पुश्तैनी मकान में करीब आठ घंटे तक तलाशी ली। इस दौरान 40.5 लाख रुपए के गहने मिले। पत्नी पूजा कुमारी के नाम से सारण के एकमा थाना के परसागढ़ गांव में 41.5 लाख रुपए कीमत की 6 बीघा 9 कट्ठा 8 धूर जमीन की कागजात मिले।

पटना में सड़क दुर्घटना में युवक की मौत के बाद आगजनी

जागरण के अनुसार पटना के अगमकुआं थाना क्षेत्र के एनएच-30 पर पटना-मसौढ़ी मोड़ (छोटी पहाड़ी) के पास शुक्रवार की सुबह नौ बजे बस ने युवक को कुचल दिया। घटनास्थल पर ही युवक मनीष कुमार की मौत हो गई। इससे आक्रोशित लोगों ने पुलिस की तीन गश्ती गाड़ी, स्लीपर बस, कार व स्कार्पियो तथा चार बाइक व स्कूटी में आग लगा दी। धू-धूकर जल रहे वाहनों को बुझाने पहुंची टीम को भी भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा। तीन घंटे से अधिक समय तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। पुलिस चौकी को भी आग के हवाले कर दिया। सीसीटीवी को तोड़ने के साथ वीडियो और फोटो लेने वालों को भी आक्रोश का सामना करना पड़ा। इससे बाइपास और आसपास की सड़कों पर भीषण जाम की स्थिति बनी रही।

पूर्व विधायक राजबल्लभ को रेप मामले में बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार

भास्कर के अनुसार नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर आरोप में हाईकोर्ट से बरी हुए नवादा के पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बिहार सरकार ने पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है। सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए कई कानूनी आधार रखे हैं। शुक्रवार को एसएलपी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अब दो हफ्ते बाद फिर सुनवाई होगी। सरकार ने कोर्ट के सामने कई अहम कानूनी सवाल उठाए हैं। सरकार का कहना है कि पीड़िता भरोसेमंद गवाह है। उसकी गवाही के आधार पर भी आरोपी को सजा दी जा सकती है। सरकार ने पीड़िता के मैट्रिक सर्टिफिकेट को खारिज करने पर भी आपत्ति जताई। सरकार के अनुसार यह वैध दस्तावेज है। आरोपी पक्ष ने निचली अदालत में कभी इसे फर्जी नहीं बताया था। ऐसे में केवल मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उम्र तय करना और आरोपी को बरी करना गलत है।

टॉप 10 साइबर क्राइम जिलों में पटना समेत बिहार के तीन जिले

हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार में साइबर अपराध पर बड़े प्रहार की तैयारी है। शुक्रवार को राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और डीजीपी विनय कुमार ने सभी डीएम-एसपी के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में साइबर अपराध के मामलों में ई-जीरो एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में तेजी लाने और उसे तुरंत नियमित एफआईआर में बदलने का निर्देश दिया। साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट पर हुई इस बैठक में उन्होंने जिला स्तरीय बैंकर्स समिति (डीएलसीसी) की बैठकों के माध्यम से म्यूल खातों को फ्रीज करने और धोखाधड़ी की राशि पीड़ितों को लौटाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि देश के शीर्ष 10 साइबर हॉटस्पॉट जिलों में बिहार के तीन जिले शामिल हैं। इनमें नवादा दूसरे स्थान पर, नालंदा चौथे और पटना 7वें स्थान पर है। वहीं, शेखपुरा 15वें स्थान पर है।

कुछ और सुर्खियां:

  • पूर्वी चंपारण के अरेराज प्रखंड के गोविंदगंज थाना क्षेत्र की बभनटोली पंचायत के पास चौर से मां और चार बच्चों की लाश मिली, हत्या की आशंका
  • नीट पेपर लीक मामले में दाखिल चार्जशीट में कहा गया- विषय विशेषज्ञों ने ही सवाल लिख किए थे
  • पेमेंट कॉउन्सिल ऑफ़ इंडिया ने दी सफाई- आम ग्राहकों और छोटे व्यापारियों के लिए यूपीआई भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेगा
  • रेलवे के ग्रुप डी में 30000 पदों के लिए दिसंबर से पहले होगा आवेद
  • गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि से बगहा के 300 घरों में घुसा पानी

अनछपी: सरकारी विज्ञापनों में कई बार बेहद अहम जानकारी दी जाती है और अक्सर हम उसे पढ़ नहीं पाते हैं। एक ऐसा ही विज्ञापन बिहार सरकार ने जमीन खरीदने वालों के लिए दिया है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही गई है कि आपको यह ध्यान देना है कि आप जमीन खरीद रहे हैं, जमीन का झगड़ा तो नहीं खरीद रहे। इस बात का पता लगाने के लिए सरकार के विज्ञापन में यह बात कही गई है कि जमीन बेचने वाले की जमाबंदी ऑनलाइन है या नहीं, यह देखना जरूरी है। ऑनलाइन जमाबंदी में यह देखना है कि वहां खाता, खेसरा यानी प्लॉट और रकबा वगैरा दर्ज है या नहीं। यह भी देखना चाहिए की जमीन बेचने वाले के अपने नाम से ऑनलाइन जमाबंदी है या नहीं। अगर जमीन बेचने वाले के अपने नाम से जमाबंदी नहीं है तो फिर यह देखना चाहिए कि क्या उसके पास सभी हिस्सेदारों की जमीन बेचने के बारे में लिखित समझौता है या नहीं। यह जानकारी बिहार भूमि पोर्टल पर मिल सकती है। यह देखने की व्यवस्था भी है कि खतियान में जमीन सरकारी या गैर मजरूआ तो नहीं है। इसकी जांच के लिए भू अभिलेख पोर्टल पर जा सकते हैं। इसके साथ ही जमीन के मालिकाना हक के लिए दाखिल खारिज जरूरी है, इसको भी सुनिश्चित कर लेना चाहिए। इसका पता खतियान और ऑनलाइन जमाबंदी से ही चलता है। हो सकता है कि इसके बावजूद जमीन की खरीद बिक्री में कोई ना कोई उलझन हो लेकिन कम से कम इन बातों का ख्याल रख कर जमीन का झगड़ा खरीदने से बचा जा सकता है।

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