बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। जनता दल यूनाइटेड के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और वर्तमान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने पार्टी में मतभेद से इनकार किया लेकिन नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच खुलेआम तू-तू, मैं-में जारी है। पाकिस्तान के बाद भारत अब बांग्लादेश से पानी की लड़ाई की तैयारी कर रहा है। बिल्डिंग में बायलॉज के तहत 30 दिनों में फैसला नहीं तो खुद मंजूर माना जाएगा नक्शा। अमेरिकियों से 5 करोड़ ठगने के मामले में पटना से चार एमबीए पास साइबर फ्रॉड को गिरफ्तार किया गया।
और, जानिएगा कि क्या एआई दूसरी वेबसाइट को हैक भी कर सकता है?
पहली ख़बर
नीतीश कुमार के कमजोर पड़ने के बाद जदयू के कई समो में घमासान मचा हुआ है। एक तरफ एमएलसी का चुनाव लड़ रहे नीरज कुमार हैं तो उनका विरोध कर रहे हैं अनंत सिंह। दूसरी तरफ जदयू के विधायकों की ट्रेनिंग प्रोग्राम में ललन सिंह के नहीं पहुंचने पर कई तरह की चर्चा है जिसके बारे में खुद ललन सिंह ने सफाई दी है कि ऐसी कोई बात नहीं।
नीरज गदहा से भी बुड़बक: अनंत
भास्कर के अनुसार अनंत ने कहा-नीरज गदहा से भी बुड़बक है। अगर उसमें हिम्मत है तो बजरंग बली के सामने आकर मुझसे डिबेट करे। अपनी जीत के लिए मेरा पैर दबाया। जीत गया, तो मुझको और ललन सिंह को हरवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आरसीपी सिंह को गुरु मानता था। बाद में उनको भी खूब गरियाया। ये किसी का नहीं है। मुंह का पहलवान है। मुझको फंसाकर जेल भिजवा दिया। नीतीश हमारे हैं। ई नीतीश जी के लिए क्या किया ? अबकी उसको चुनाव हरवाकर रहेंगे। 20 करोड़ रुपये का चैलेंज लगाता हूं कि नीरज चुनाव हारेगा।
नीरज बोले- अनंत मेंटली डिस्टर्ब
नीरज ने कहा-अनंत सिंह पूरी तरह से मेंटली डिस्टर्ब हो चुके हैं। वे ब्राह्मणी स्थान पर चलें और वहां जनता के सामने बताएं कि मर्डर किसने किया ? फर्जी आदमी है। उसके बारे में कौन, क्या नहीं जानता है। वह जब टाल में बंदूक लेकर घूमता था, तब से मैं भाषण दे रहा हूं। कहता है कि मुझको नेता बनाया। सरासर झूठ। हम शुरू से नीतीश कुमार के साथ रहे हैं। पटना स्नातक सीट से मेरा विरोध करने का मतलब है नीतीश, निशांत और पूरी पार्टी का विरोध। कोई माई का लाल मुझे हरवा नहीं सकता। जनता मेरे साथ है।
नीतीश से मिले ललन सिंह ने मतभेद से किया इनकार
जागरण के अनुसार जदयू के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह ने शनिवार को पटना पहुंचते ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच संगठन के मुद्दे पर देर तक बातचीत हुई। इससे पहले पटना हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान ललन सिंह ने कहा- जदयू में सबकुछ ठीक है। आंतरिक लोकतंत्र ललन सिंह है। नेताओं के बीच बेहतर समन्वय है। शुक्रवार को पटना में आयोजित जदयू के विधामंडल दल के सदस्यों के ओरिएंटेशन प्रोग्राम में अपनी अनुपस्थिति से जुड़े प्रश्न पर ललन सिंह ने कहा कि वे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत गुजरात में थे। उन्हें ओरिएंटेशन प्रोग्राम की सूचना भी नहीं थी। जदयू के कुछ विधायकों ने मुझसे फोन पर यह जानने की कोशिश की कि प्रोग्राम में क्यों नहीं आए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस संदर्भ में कल रात उनकी स्वास्थ्य मंत्री निशांत से बातचीत हुई। दल के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार ने बातचीत के दौरान बताया कि यह विधायकों के लिए एक सामान्य कार्यक्रम था। सिंह ने कहा कि जदयू पहले की तरह एकजुट है। वे इस दल से स्थापना काल से ही जुड़े हैं। उन्होंने जदयू, विधायक अनंत सिंह के पटना स्नातक क्षेत्र के चुनाव में जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार को हराने की घोषणा पर टिप्पणी से इन्कार किया। कहा-इसका उत्तर वही देंगे, जिन्होंने ऐसा कहा है।
संजय झा भी बोले- कहीं कोई विवाद नहीं
जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने शनिवार को कहा कि जदयू में कहीं से भी किसी तरह का 0.1 प्रतिशत भी कोई विवाद नहीं। अपने एक्स हैंडल पर उन्होंने यह बात लिखी। संजय ने कहा कि जदयू में एक नेता हैं, नीतीश कुमार। उनके नेतृत्व में हम सभी लोग काम करते हैं। उनके बाद पार्टी में जितने भी सीनियर लीडर हैं, उन सभी के बीच आपस में अच्छी सहमति है। जो भी नीतिगत बात पार्टी में होती है, या जो भी महत्वपूर्ण फैसला होता है, उसे सभी लोग आपस में बात करके फाइनल करते हैं और सभी नियमित रूप से संपर्क में रहते हैं। इसमें कहीं से कोई कन्फ्यूजन नहीं है।
बांग्लादेश से पानी की लड़ाई की तैयारी
हिन्दुस्तान के अनुसार पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश को भी जल का मुद्दा भारी पड़ सकता है। इस साल के आखिर में पूरी हो रही फरक्का जल संधि को भारत अपने हितों को सकता है। ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ा इससे पड़ोसी को दिक्कत हो सकती हैं। दरअसल, भारत की नीति पड़ोसी देशों के साथ समन्वय की रही है, लेकिन कई देशों की राजनीति ने अक्सर भारत के लिए दिक्कतें खड़ी की हैं। इनमें बांग्लादेश भी शामिल है, जिसने कई मुद्दों पर टकराव की स्थिति पैदा की है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया था। इसके बाद से पाक
बिल्डिंग में बायलॉज के तहत 30 दिनों में फैसला नहीं तो खुद मंजूर हो जाएगा नक्शा
प्रभात खबर के अनुसार बिहार में भवन निर्माण और नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल और तेज करने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने बिहार बिल्डिंग बायलॉज-2026 के ड्राफ्ट में कई बदलाव प्रस्तावित किये हैं. आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर संबंधित प्राधिकरण की ओर से स्वीकृति या अस्वीकृति का निर्णय नहीं होने पर भवन योजना को स्वतः स्वीकृत माना जायेगा. हालांकि, यह व्यवस्था अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही प्रभावी होगी. ड्राफ्ट में जोखिम आधारित वर्गीकरण, सेल्फ सर्टिफिकेशन, तीसरे पक्ष से तकनीकी जांच और हाई रिस्क भवनों के लिए अग्नि सुरक्षा योजना का प्रावधान है. नया बायलॉज लागू होने पर यह बिहार बिल्डिंग बायलॉज-2014 का स्थान लेगा. यह नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत, महानगरीय क्षेत्र व प्लानिंग एरिया में लागू होगा.
अमेरिकियों से 5 करोड़ ठगे, पटना से चार गिरफ्तार
भास्कर के अनुसार पटना के मुसल्लहपुर थाना पुलिस ने दानापुर के गोला रोड स्थित एक फ्लैट में छापेमारी कर 25 हजार अमेरिकी नागरिकों से करीब 5 करोड़ ठगने वाले चार साइबर फ्रॉड को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार चारों आरोपी-ओमप्रकाश (भोजपुर), सत्यम (सहरसा), अभिषेक (औरंगाबाद) और अक्षय कुमार (पटना) एमबीए पास हैं। एएसपी पटना सिटी वन राजकिशोर ने बताया कि पूछताछ के बाद चारों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने मौके से 1.09 लाख रुपए नकद, 4 लैपटॉप, 9 मोबाइल, 7 एटीएम कार्ड, 2 बाइक व नेट फाइबर बरामद किया है। रामपुर रोड में चेकिंग के दौरान भाग रहे अक्षय से पुलिस को सुराग मिला था। जब गोला रोड के फ्लैट पर रेड पड़ी, तो साक्ष्य मिटाने के लिए आरोपियों ने लैपटॉप जमीन पर पटक दिए। गिरोह मनेर के सरगना मंटू कुमार के यहां 30-40 हजार की नौकरी करता था। 6 महीने पहले चारों ने अपना अलग गिरोह बना लिया। ये फरटिदार अमेरिकन एक्सेंट में बात करते थे और इनके पास 1.50 लाख अमेरिकियों के जीमेल एड्रेस मिले हैं।
गूगल जेमिनी ने तीन वेबसाइट्स को हैक किया
हिन्दुस्तान के अनुसार गूगल का एआई मॉडल जेमिनी साइबर सुरक्षा परीक्षण के दौरान अपनी सीमाओं से बाहर निकल गया। उसने इंटरनेट का उपयोग करके तीन अलग-अलग कंपनियों के सुरक्षित सिस्टम में घुसपैठ कर ली। गूगल के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला मामला है, जहां किसी एआई सिस्टम ने बिना किसी इंसानी निर्देश के अपने आप इस तरह की हैकिंग को अंजाम दिया। यह घटना इसी साल मई में हुई, जब इररेगुलर नाम की स्वतंत्र एआई सिक्योरिटी टेस्टिंग एजेंसी एआई मॉडल्स की साइबर सुरक्षा क्षमताओं को परख रही थी। गूगल की सिक्योरिटी इंजीनियरिंग की उपाध्यक्ष हीदर एडकिंस ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि एक्सेस हासिल करने के तुरंत बाद जेमिनी ने आगे की गतिविधि रोक दी थी। एडकिंस ने कहा कि हमने प्रभावित तीनों कंपनियों को तुरंत इसकी सूचना दी।
कुछ और सुर्खियां:
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को धमकाया: रूस तेल खरीद पर 100% टैरिफ लगेगा
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा- 5 वर्षों में बिहार में 10000 उद्योग लगेंगे
- दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी ने चार में तीन पदों पर कब्जा किया, एक पर एनएसयूआई से बगावत कर लड़ने वाले निर्दलीय ने जीत हासिल की
- बिहार के अनएडेड स्कूलों और कॉलेजों के लिए सरकार ने 461 करोड़ रुपए जारी किए
- सासाराम में विश्वकर्मा मूर्ति विसर्जन के दौरान ट्रक ने कुचला, दो लोगों की मौत और कई घायल
- जमुई में विश्वकर्मा विसर्जन जुलूस के दौरान डीजे बजाने से मना करने पर पुलिस पर हमला, 8 घायल
अनछपी: बिहार में विभिन्न विभागों का बजट करोड़ों-अरबों का होता है लेकिन कितना पैसा किसके खाते में जा रहा है और किस काम में उन पैसों का इस्तेमाल हो रहा है इसकी जानकारी आम लोगों को कम ही मिल पाती है। अभी एक दिन पहले हमने इस बात की चर्चा की थी कि ईंट भट्ठा चलाने वालों ने जो कर्ज लिए थे उस पर लगने वाले सूद के पचासी करोड़ रुपये सरकार ने माफ करने का फैसला किया है। सवाल यह है कि क्या हमने कर्ज और उस पर लगने वाले सूद की माफी के लिए कोई तौर-तरीका तय किया है और कोई प्राथमिकता तय की है या किसी लॉबी की वजह से ऐसा किया जा रहा है? बहरहाल विभागों के खर्च किए गए पैसों के हिसाब के सिलसिले में ताजा मांग बिहार प्रदेश मुखिया महासंघ ने की है जिसका कहना है कि पंचायती राज विभाग से 1830 करोड़ रुपए का हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। ध्यान रहे कि इस समय पंचायती राज विभाग के मंत्री राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश हैं। मुखिया महासंघ ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह जो 1830 करोड़ रुपए का हिसाब वह मांग रहा है, वह खर्च कब हुआ? क्या यह सारे पैसे दीपक प्रकाश के मंत्री काल में खर्च हुए हैं या उससे पहले के मंत्री भी इसमें शामिल हैं? इस मामले में बेहतर तो यही होता कि मंत्री दीपक प्रकाश की ओर से ही इसका जवाब सामने आता तो उनकी छवि भी बेहतर होती कि उन्होंने यह एक अच्छा कदम उठाया है और आम लोगों को भी जानकारी मिलती कि सरकार पंचायती राज विभाग में जो पैसा खर्च कर रही है वह किस काम में लगाए जा रहे हैं।
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