बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। भारत में कोरोना टीका दिए जाने के दौरान जमा डेटा के लीक होने के दावे को अखबारों ने खास तवज्जो नहीं दी है। दरभंगा में बनने वाले एम्स के लिए जमीन कहां मिले इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी को अच्छी कवरेज मिली है।
भास्कर की खबर है: कोविन पोर्टल से 100 करोड़ लोगों का डेटा लीक। अख़बार लिखता है कि केंद्र सरकार के कोविन ऐप से लगभग 100 करोड़ लोगों का पर्सनल डाटा मैसेजिंग एप टेलीग्राम पर लीक होने से हड़कंप मच गया। टेलीग्राम के ऑटोमेटिक अकाउंट (बॉट) पर वैक्सीन लेने वाले व्यक्ति का मोबाइल नंबर डालने पर आधार, पासपोर्ट, पैन कार्ड, जन्म तिथि और वैक्सीन सेंटर की जानकारियां दिखाई देने लगीं। सोमवार को सबसे पहले तृणमूल कांग्रेस के नेता संकेत गोखले ने सोशल मीडिया पर लीक के स्क्रीनशॉट शेयर किए। पी चिदंबरम, डेरेक ओ ब्रायन और जयराम रमेश जैसे लोगों की निजी जानकारियां सार्वजनिक हो गई। कुछ समय बाद ही बॉट अकाउंट रहस्यमय ढंग से बंद भी हो गया। कोविन ऐप पर अपना मोबाइल नंबर डालने के बाद ओटीपी से ही आगे की जानकारी खुलती है लेकिन टेलीग्राम पर बॉट अकाउंट किसी का भी मोबाइल नंबर डालने पर जानकारी को बिना ओटीपी के प्रोसेस करके दे रहा था। इधर आईटी मंत्री राजीव चंद्रशेखर के अनुसार बॉट अकाउंट ने थिएटर एक्टर (डेटा चोरी करने वाला) के डेटाबेस से जानकारियां लीं। लगता है कि यह सूचना पहले चोरी हुए डेटा से ली गई थीं। कोविन ऐप में सेंध लगाकर जानकारियां नहीं चुराई गई हैं।
एम्स दरभंगा की ज़मीन पर सियासत
भास्कर की सबसे बड़ी खबर है: नीतीश बोले- दरभंगा एम्स पर केंद्र की हर बात मानी, अब क्या करें? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोभन, दरभंगा में एम्स ना बनाने के केंद्र के फैसले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “हमने दरभंगा एम्स के लिए केंद्र सरकार की हर बात मानी, अब क्या करें? हमने शोभन में बेहतरीन जमीन दी। पता नहीं केंद्र सरकार के दिमाग में क्या है? अब यह लोग हटेंगे, तब अच्छा अच्छा काम होगा।” हिन्दुस्तान ने लिखा है कि दरभंगा में एम्स मांग को लेकर सियासत शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने एकमी-शोभन बाईपास के पास इसके लिए जमीन दी है। पहले भाजपा ने उसका विरोध किया और अब केंद्र सरकार ने वहां एम्स बनाने से इनकार कर दिया है। इससे पहले केंद्रीय टीम ने मायने के बाद जमीन को एम्स के लिए ठीक बताया था। इधर भाजपा के स्थानीय सांसद गोपाल जी ठाकुर डीएमसीएच परिसर में ही एम्स बनाने की मांग पर अड़े हैं। बहरहाल दरभंगा एम्स के लिए एकमी-शोभन बाईपास पर चिन्हित 189 एकड़ जमीन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को फिर से भेजा जाएगा।
बेवजह फायरिंग
जागरण की सबसे बड़ी खबर है: बेवजह फायरिंग, होगी प्राथमिकी। पुलिस मुख्यालय के एडीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने सोमवार को बताया कि लाइसेंसी हथियार से बेवजह फायरिंग करना ही अपराध है। शस्त्र लाइसेंस सुरक्षा के लिए दिया जाता है, न कि शादी समारोह या अन्य उत्सव पर फायरिंग करने के लिए। सभी जिला एसपी को स्पष्ट निर्देश है कि अगर कोई भी व्यक्ति बिना वजह फायरिंग करता है या प्रभाव जमाने के लिए हथियार चमकाता दिखे तो अविलंब गिरफ्तार कर कार्रवाई की जाए। उनके हथियार का लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा की जाए। अगर शस्त्र का लाइसेंस नहीं है तो उसकी अलग से प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाए। यह भी पता लगाया जाए कि अवैध हथियार और गोलियां कहां से मिली। इसी तरह हर्ष फायरिंग के दौरान अगर किसी की मौत हो जाती है तो हत्या की धारा में प्राथमिकी दर्ज होगी। घायल होने पर भी प्राथमिकी में अलग से धारा लगाकर कार्रवाई होगी।
कोरोना के बाद हवाई किराया 41% बढ़ा
एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों में भारत में अंतरराष्ट्रीय हवाई किराये में कोरोनाकाल के बाद सर्वाधिक उछाल आया है। हिन्दुस्तान की खबर के अनुसार अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा परिषद (एसीआई) की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में यह बढ़ोतरी 41 फीसदी रही। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात में 34 फीसदी, सिंगापुर में 30 फीसदी और ऑस्ट्रेलिया 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। एसीआई के अनुसार, एशिया-प्रशांत और मध्य पूर्व के लगभग 36 हजार मार्गों पर अध्ययन किया गया।
जी-20 बैठक
जागरण की खबर है: जी-20 बैठक में साझा घोषणापत्र पर फिर नहीं बन सकी बात। जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों की एक और बैठक पर यूक्रेन विवाद की छाया रही। वाराणसी में सदस्य देशों के विकास मंत्रियों की बैठक के बाद कोई साझा घोषणापत्र जारी नहीं किया जा सका। संयुक्त घोषणापत्र की जगह जो पत्र जारी किया गया उसे आउटकम डॉक्यूमेंट एंड चेयर्स समरी यानी परिणाम प्रपत्र और अध्यक्ष देश का सार कहा गया है। इसमें यूक्रेन विवाद का ज़िक्र किया गया है और इसके लिए इशारों में रूस को ज़िम्मेदार ठहराया गया है।
स्कूल कॉलेज में स्टाफ क्वार्टर
हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर है: शिक्षण संस्थानों में बनेंगे शिक्षक-कर्मियों के आवास। शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों और कर्मियों के लिए आवास बनेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विज्ञान व प्रावैधिकी विभाग के सहायक प्राध्यापकों, व्याख्याताओं को नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दौरान यह निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक यदि बाहर से आएंगे तो पढ़ाने में परेशानी होगी। इसीलिए उनके रहने की व्यवस्था वहीं होनी चाहिए। इससे कई तरह की समस्याएं दूर होंगी। उन्होंने छात्रों के लिए भी हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराने को कहा। यही नहीं मुख्यमंत्री ने विभाग का नाम बदलकर विज्ञान, प्रावैधिकी व तकनीकी शिक्षा विभाग करने की भी घोषणा की।
कुछ और सुर्खियां
- यूपीएससी सिविल सर्विसेज पीटी का रिजल्ट जारी, 14624 सफल
- वंदे भारत ट्रेन के ट्रायल में मनाही के बावजूद सवार हुए भाजपा सांसद जयंत सिन्हा
- शराब के धंधे वालों के खिलाफ छापेमारी में इस्तेमाल होगा मिर्ची स्प्रे, विभाग ने खरीदी 700 बोतलें
- चीन ने आखरी भारतीय पत्रकार को भी देश छोड़ने को कहा
- मणिपुर में फिर हिंसा 1 की मौत, 10 लोग घायल
- शिक्षक दक्षता परीक्षा में नकल करते पकड़े गए तो नौकरी से होंगे बर्खास्त
- भारत और यूएई के बीच रुपए दिरहम में व्यापार जल्द
अनछपी: 100 करोड़ लोगों का डेटा लीक होने की खबर अगर ब्रिटेन या अमेरिका जैसे देश में आती तो वहां सरकार हिल जाती लेकिन भारत में सरकार के प्रति वफादार मीडिया के रहते ऐसा मुमकिन नहीं है। कोरोना का टीका लेने के लिए जिस कोविन पोर्टल पर सारी जानकारी लोड की गई है वहीं से इसके लीक होने की खबर है। डेटा लीक होने का सबूत भी दिया गया है। सरकार ने इसके जवाब में सिर्फ यह कहा है कि डेटा कोविन पोर्टल से लीक नहीं हुआ है। हालांकि सरकार के इस दावे की भी जांच होनी है और अगर इसे सही मान लिया जाए तो भी शायद सरकार यह कह रही है कि डेटा लीक हुआ है, भले ही वह कोविन पोर्टल से नहीं हुआ हो। डेटा लीक होने से क्या परेशानी हो सकती है इसकी एक छोटी मिसाल आधार कार्ड से ली जा सकती है। पिछले दिनों खबर आई कि एक ही आधार कार्ड पर सैकड़ों मोबाइल फोन सिम लिए गए हैं। यह सिम किसी एक व्यक्ति ने नहीं लिए बल्कि किसी एक व्यक्ति के आधार की जानकारी चुरा कर उसकी बुनियाद पर यह सारे सिम लिए गए और इसका इस्तेमाल साइबर अपराध में लोगों को ठगने के लिए किया गया। यानी आप जो आधार कार्ड मोबाइल फोन सिम लेने के लिए देते हैं उसके लीक होने से आप परेशानी में पड़ सकते हैं। कोविन पोर्टल से जिस डेटा लीक की शिकायत की गई है उसमें टेलीफोन नंबर और दूसरी जानकारी भी लीक होने की बात कही गई है। देश की विपक्षी पार्टियों की यह जिम्मेदारी है कि सरकार से इस बारे में सवाल करें और इस मामले को जनता के बीच लाए क्योंकि डेटा लीक जितना खतरनाक मामला है, हम उसे उतना खतरनाक नहीं समझ पा रहे हैं। जाहिर है सरकार ने जानबूझकर तो डेटा लीक नहीं होने दिया होगा लेकिन उसकी भी जिम्मेदारी बनती है कि डेटा सुरक्षा को सुनिश्चित करे और लोगों को भी जागरूक करे कि वह अपने डेटा के बारे में सतर्क रहें।
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